भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कुंदन लाल सहगल: जिन्होंने 'देवदास' को अमर बनाया

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भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार कुंदन लाल सहगल: जिन्होंने 'देवदास' को अमर बनाया

सारांश

कुंदन लाल सहगल, भारतीय सिनेमा के पहले सुपरस्टार, ने अपनी अनोखी आवाज और अदाकारी से 'देवदास' को अमर बना दिया। इस लेख में जानें उनके संघर्ष, संगीत और अनमोल विरासत के बारे में।

Key Takeaways

  • कुंदन लाल सहगल को भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता है।
  • उन्होंने 'देवदास' फिल्म से अपनी पहचान बनाई।
  • संगीत के क्षेत्र में उनकी अनोखी आवाज ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई।
  • उनकी ज़िंदगी में संघर्ष और शराब की लत दोनों शामिल थे।
  • वे आज भी सिनेमा प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं।

मुंबई, 10 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। फिल्म उद्योग में कई ऐसे अदाकार रहे हैं, जिनका नाम सुनते ही उनके द्वारा किए गए कार्यों का चित्र प्रशंसकों के मन में उभर जाता है। भारतीय सिनेमा के एक ऐसे ही अद्वितीय सितारे का नाम कुंदन लाल सहगल है, जिन्हें आमतौर पर केएल सहगल के नाम से जाना जाता है।

छोटी नौकरियों से अपने करियर की शुरुआत करते हुए उन्होंने भारतीय सिनेमा को अपनी विशेष आवाज और अदाकारी से समृद्ध किया। उनकी फिल्म 'देवदास' ने न केवल एक किरदार को अमर बना दिया, बल्कि उन्हें भारतीय सिनेमा का पहला सुपरस्टार भी सिद्ध किया। उनकी मेहनत, संघर्ष, और संगीत की विरासत आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करती है।

11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवा शहर में जन्मे इस अभिनेता को भारतीय फिल्म जगत का पहला सुपरस्टार माना जाता है। उनकी अदाकारी और आवाज दोनों ही अद्भुत थीं। कहा जाता है कि उनकी फिल्में उनके नाम से ही सुपरहिट हो जाती थीं। संगीत के क्षेत्र में मेलोडी की नींव रखने वाले कलाकार के रूप में भी उन्हें याद किया जाता है।

कुंदन लाल सहगल के पिता तहसीलदार थे, किंतु घर में संगीत की कोई पारंपरिक विरासत नहीं थी। उनकी माँ केसर बाई के भजनों ने उनके मन में सुरों का बीज बो दिया। उनकी संगीत शिक्षा किसी नामी उस्ताद के पास नहीं हुई। उन्होंने सूफी संतों की दरगाहों और रामलीला के मंचों पर गाकर अपने आप को संगीत की दुनिया से जोड़ा।

फिल्मों में कदम रखने से पहले सहगल की जिंदगी संघर्ष भरी थी। उन्होंने स्कूल छोड़कर रेलवे में टाइमकीपर के रूप में काम करना शुरू किया। बाद में वे टाइपराइटर कंपनी में सेल्समैन बने, जिससे उन्हें भारत भर में घूमने का अवसर मिला। विभिन्न स्थानों की भाषाएं, संस्कृति और लोक संगीत उन्होंने अपने अंदर समेटा। इसके अलावा, कुछ समय के लिए उन्होंने होटल में भी काम किया। लेकिन इन छोटी-छोटी नौकरियों के बीच उनका गाने का शौक कभी कम नहीं हुआ।

1930 का दशक भारतीय सिनेमा में बोलती फिल्मों का स्वर्ण काल था। सहगल कोलकाता पहुंचे, जहाँ न्यू थिएटर्स के बीएन सरकार ने उनकी अनोखी आवाज को पहचाना। उनकी शुरुआत 'सहगल कश्मीरी' नाम से हुई, लेकिन असली पहचान 1935 में आई फिल्म 'देवदास' से मिली। शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की प्रसिद्ध कहानी 'देवदास' में सहगल ने मुख्य भूमिका निभाई। उनकी अदाकारी और गायकी ने इस किरदार को अमर बना दिया। फिल्म के गीत जैसे 'बालम आए बसो मोरे मन में' और 'दुख के अब दिन बीतत नाहीं' ने पूरे देश में धूम मचा दी। लोग सिर्फ सहगल के नाम पर ग्रामोफोन रिकॉर्ड खरीदने लगे।

सहगल की आवाज में एक विशेष 'नोजल टोन' थी, जो भावनाओं को गहराई देती थी। शास्त्रीय संगीत के महान उस्ताद फैयाज खान भी उनकी गायकी सुनकर चकित रह जाते थे। उन्होंने मिर्जा गालिब की गजलों को नई जान दी। 'नुक्ताचीन है गम-ए-दिल' और 'आह को चाहिए इक उम्र असर होने तक' जैसी गजलें आज भी सहगल की आवाज में सुनकर दिल को छू जाती हैं।

हालांकि, सहगल की जिंदगी में शराब की लत भी एक अहम पहलू बन गई। रिकॉर्डिंग से पहले वे अक्सर शराब की मांग करते थे, जिसे वे 'काली पांच' कहकर बुलाते थे। संगीतकार नौशाद ने साल 1946 में आई फिल्म 'शाहजहां' के दौरान उन्हें बिना शराब के 'जब दिल ही टूट गया' गाने के लिए राजी किया। गाना रिकॉर्ड करने के बाद सहगल खुद भावुक हो गए और कहा कि बिना नशे के उनकी आवाज ज्यादा साफ और दर्द भरी लग रही थी।

दुर्भाग्य से, यह समझ उन्हें बहुत देर से आई। शराब ने उनके लिवर को बुरी तरह प्रभावित कर दिया था। केवल 42 वर्ष की आयु में, 18 जनवरी 1947 को उन्होंने जालंधर में दुनिया को अलविदा कह दिया।

केएल सहगल को लता मंगेशकर अपना गुरु मानती थीं। किशोर कुमार ने जीवनभर सहगल के गीतों को रीमेक करने से मना कर दिया, क्योंकि वे उन्हें गुरु की तरह सम्मान देते थे। आज भी जालंधर में केएल सहगल मेमोरियल हॉल उनकी यादों को संजोए हुए है।

Point of View

NationPress
18/04/2026

Frequently Asked Questions

कुंदन लाल सहगल का जन्म कब हुआ?
कुंदन लाल सहगल का जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू के नवा शहर में हुआ था।
कुंदन लाल सहगल को किस फिल्म से पहचान मिली?
उन्हें 1935 में आई फिल्म 'देवदास' से पहचान मिली।
कुंदन लाल सहगल का संगीत करियर कैसे शुरू हुआ?
उन्होंने सूफी संतों की दरगाहों और रामलीला के मंचों पर गाकर अपने संगीत करियर की शुरुआत की।
कुंदन लाल सहगल की मृत्यु कब हुई?
कुंदन लाल सहगल का निधन 18 जनवरी 1947 को हुआ।
किसने कुंदन लाल सहगल को अपना गुरु माना?
लता मंगेशकर ने कुंदन लाल सहगल को अपना गुरु माना।
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