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शीना चौहान का शकुंतला फोटोशूट: राजा रवि वर्मा की विरासत को मिली नई आवाज़

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शीना चौहान का शकुंतला फोटोशूट: राजा रवि वर्मा की विरासत को मिली नई आवाज़

सारांश

शीना चौहान ने शकुंतला के रूप में एक ऐसा फोटोशूट किया जो केवल सौंदर्य-प्रदर्शन नहीं — यह मिथक के पीछे छिपी स्त्री को समझने की कोशिश है। राजा रवि वर्मा की विरासत को हम्पी की पृष्ठभूमि में नई आवाज़ देते हुए, उन्होंने पूछा: अगर शकुंतला आज होतीं, तो कैसा महसूस करतीं?

मुख्य बातें

अभिनेत्री शीना चौहान ने राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स से प्रेरित होकर शकुंतला के किरदार पर आधारित विशेष फोटोशूट कराया।
फोटोशूट हम्पी के 'इवोल्व बैक' रिज़ॉर्ट में किया गया, जिसमें मेहराब, जलाशय और प्राकृतिक परिवेश का उपयोग हुआ।
शीना ने कहा कि वह 'मिथक के पीछे छिपी महिला को जानना चाहती थीं' — केवल सौंदर्य-कथा नहीं, बल्कि शकुंतला की आंतरिक यात्रा उन्हें आकर्षित करती है।
फोटोग्राफी प्रसाद एच.एम.
, एडिटिंग वैभव वेणु गोपाल वेरनेकर और स्टाइलिंग वीना शंकर ने की।
तस्वीरों में शीना सफेद साड़ी , कमल का फूल और पारंपरिक श्रृंगार के साथ नज़र आ रही हैं।

अभिनेत्री शीना चौहान ने भारतीय पौराणिक कथाओं और महान चित्रकार राजा रवि वर्मा की कालजयी पेंटिंग्स से प्रेरणा लेकर एक विशेष फोटोशूट कराया है, जिसमें उन्होंने शकुंतला के किरदार को नए सिरे से जीवंत किया है। 8 सितंबर को सामने आई इन तस्वीरों में शीना ने पौराणिक नारी-पात्र की मासूमियत, भावनात्मक गहराई और आंतरिक मज़बूती को अपने अंदाज़ में प्रस्तुत किया है। यह फोटोशूट महज़ एक कलात्मक प्रयोग नहीं, बल्कि उस विरासत को सलाम है जो सदियों से भारतीय स्त्री-चेतना को परिभाषित करती आई है।

मिथक के पीछे की स्त्री को समझने की चाहत

शीना चौहान ने बताया कि शकुंतला के प्रति उनका आकर्षण केवल उनकी सौंदर्य-कथा तक सीमित नहीं था। उन्होंने कहा, 'शकुंतला में मुझे सिर्फ उनकी खूबसूरती या प्रेम कहानी ने ही नहीं बल्कि बदलावों ने भी अपनी ओर आकर्षित किया है। वह एक सीधी-सादी, मासूम महिला के रूप में शुरू होती हैं, फिर भी उनके सफर में इतनी खूबसूरती, भावनाएं और मजबूती है। असल में मैं मिथक के पीछे छिपी महिला को जानना चाहती थी और सोचना चाहती थी कि अगर शकुंतला हमारे समय की महिला होती तो वह कैसा महसूस करती।'

यह सोच उस व्यापक सांस्कृतिक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें समकालीन कलाकार पौराणिक स्त्री-पात्रों को आधुनिक दृष्टि से पुनर्पाठ कर रहे हैं — उन्हें केवल प्रतीक नहीं, बल्कि जीती-जागती इंसान के रूप में देखने की कोशिश।

पौराणिक विरासत को नई आवाज़

शीना ने अपने इस कलात्मक चुनाव के पीछे की भावना को विस्तार से साझा किया। उनके शब्दों में, 'मुझे कहानियों, कला और पीढ़ियों को प्रेरित करने वाली महिलाओं के बारे में जानना बहुत पसंद है। मैं खास तौर पर पौराणिक भारतीय कहानियों और किरदारों की ओर आकर्षित होती हूं क्योंकि उनमें बहुत सारा इतिहास, भावना, सुंदरता और आज के समय से जुड़ाव होता है। शकुंतला के जरिए मैं उस विरासत को सम्मान देना चाहती थी और साथ ही उसे एक नई आवाज देना चाहती थी। उनकी दुनिया भले ही किसी और दौर की हो लेकिन वह जिन भावनाओं को दर्शाती हैं, वो आज भी हमारी ही हैं।'

गौरतलब है कि राजा रवि वर्मा की शकुंतला श्रृंखला भारतीय चित्रकला के इतिहास में सबसे प्रतिष्ठित कृतियों में से एक मानी जाती है। इन पेंटिंग्स ने न केवल भारतीय पौराणिक पात्रों को दृश्य-रूप दिया, बल्कि आधुनिक भारतीय कला की नींव भी रखी।

फोटोशूट का सौंदर्यशास्त्र

यह फोटोशूट हम्पी स्थित 'इवोल्व बैक' रिज़ॉर्ट में कराया गया है। मेहराबों, जलाशयों और प्राकृतिक परिवेश से सजे इस पृष्ठभूमि ने तस्वीरों को एक कालातीत आभा दी है — जैसे किसी क्लासिक भारतीय कलाकृति के पन्ने सजीव हो उठे हों।

तस्वीरों में शीना सफेद साड़ी में नज़र आ रही हैं, जिसमें हल्का गुलाबी और सुनहरा बॉर्डर है। खुले बाल, हल्का पारंपरिक मेकअप, काजल लगी आँखें, छोटी बिंदी, फूलों की नाज़ुक बालियाँ और सफेद फूलों की मालाएँ उनके रूप को शकुंतला की सहजता के करीब ले जाती हैं। हाथों में कमल का फूल लिए और पानी के किनारे नंगे पैर खड़ी होकर वह मासूमियत, नारीत्व और शांति का अनुभव कराती हैं।

रचनात्मक टीम

इस परियोजना को तकनीकी और कलात्मक रूप देने में पूरी टीम का योगदान रहा। फोटोग्राफी प्रसाद एच.एम. ने की है, पोस्ट-प्रोडक्शन एडिटिंग वैभव वेणु गोपाल वेरनेकर ने संभाली है और स्टाइलिंग की ज़िम्मेदारी वीना शंकर ने निभाई है। राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स की हूबहू नकल न करते हुए, टीम ने उनकी भावना को आधुनिक फोटोग्राफी में उतारने का प्रयास किया है।

आगे की राह

यह फोटोशूट शीना चौहान की उस कलात्मक यात्रा का हिस्सा प्रतीत होता है जिसमें वह परंपरा और समकालीनता के बीच संवाद स्थापित करना चाहती हैं। पौराणिक पात्रों को आधुनिक संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत करने की यह कोशिश भारतीय मनोरंजन और कला जगत में एक बढ़ती हुई प्रवृत्ति को दर्शाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जटिल इंसान के रूप में देखने की कोशिश कर रहे हैं। दिलचस्प यह है कि यह प्रश्न — 'अगर शकुंतला आज होतीं तो कैसा महसूस करतीं?' — सदियों पुरानी कथा को वर्तमान स्त्री-विमर्श से जोड़ता है। हालाँकि, मुख्यधारा की कवरेज अक्सर ऐसे प्रयासों को केवल 'लुक' और 'स्टाइल' तक सीमित कर देती है, जबकि असली बात यह है कि पौराणिक आख्यानों का पुनर्पाठ एक सांस्कृतिक-राजनीतिक कार्य भी है। राजा रवि वर्मा की विरासत को 'श्रद्धांजलि' और 'नई आवाज़' — दोनों एक साथ देना आसान नहीं, और यह तनाव ही इस फोटोशूट को महज़ ग्लैमर से परे ले जाता है।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शीना चौहान का शकुंतला फोटोशूट क्या है?
यह अभिनेत्री शीना चौहान द्वारा कराया गया एक विशेष फोटोशूट है, जो राजा रवि वर्मा की प्रसिद्ध पेंटिंग्स और भारतीय पौराणिक कथाओं से प्रेरित है। इसमें उन्होंने शकुंतला के किरदार को आधुनिक फोटोग्राफी के माध्यम से जीवंत किया है।
यह फोटोशूट कहाँ किया गया?
यह फोटोशूट हम्पी स्थित 'इवोल्व बैक' रिज़ॉर्ट में किया गया, जहाँ मेहराबों, जलाशयों और प्राकृतिक परिवेश ने तस्वीरों को एक कालातीत, पुरातन भव्यता प्रदान की।
शीना चौहान ने शकुंतला का किरदार क्यों चुना?
शीना ने बताया कि वह मिथक के पीछे छिपी स्त्री को समझना चाहती थीं — शकुंतला की केवल सौंदर्य-कथा नहीं, बल्कि उनकी भावनात्मक यात्रा और आंतरिक मज़बूती उन्हें आकर्षित करती है। उन्होंने यह भी सोचा कि अगर शकुंतला आज के समय में होतीं तो कैसा महसूस करतीं।
इस फोटोशूट की रचनात्मक टीम कौन है?
फोटोग्राफी प्रसाद एच.एम. ने की है, एडिटिंग वैभव वेणु गोपाल वेरनेकर ने और स्टाइलिंग वीना शंकर ने संभाली है। टीम ने राजा रवि वर्मा की पेंटिंग्स की हूबहू नकल किए बिना उनकी भावना को कैमरे में उतारा।
राजा रवि वर्मा की शकुंतला पेंटिंग्स क्यों महत्वपूर्ण हैं?
राजा रवि वर्मा की शकुंतला श्रृंखला भारतीय चित्रकला के इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित कृतियों में से एक मानी जाती है। इन पेंटिंग्स ने पौराणिक पात्रों को पहली बार यथार्थवादी दृश्य-रूप दिया और आधुनिक भारतीय कला की नींव रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राष्ट्र प्रेस
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