क्या बाबा महाकाल की भस्म आरती में शामिल होकर मंत्रमुग्ध हुईं सोना महापात्रा?
सारांश
Key Takeaways
- सोना महापात्रा ने महाकाल महोत्सव में अपनी आवाज का जादू बिखेरा।
- भस्म आरती का अनुभव उनके लिए अद्वितीय रहा।
- उन्हें आशा है कि इस ऊर्जा से उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा।
उज्जैन, 17 जनवरी (राष्ट्र प्रेस) - उज्जैन के महाकाल मंदिर में 5 दिवसीय महाकाल महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें महोत्सव के तीसरे दिन बॉलीवुड गायिका सोना महापात्रा ने अपने अद्भुत सुरों में शिव भक्ति गीत गाए।
यह शो महाकाल मंदिर के परिसर में ही आयोजित किया गया। पहली बार उन्हें शिव भक्ति से भरे गीत गाने का अवसर मिला और भस्म आरती से लेकर भक्ति गीत गाने का अनुभव उनके लिए अविस्मरणीय रहा।
सोना महापात्रा ने भस्म आरती में शामिल होने के अनुभव को साझा करते हुए राष्ट्र प्रेस से कहा, "भस्म आरती में शामिल होने का अवसर मुझे पहली बार मिला है और मैंने महाकाल महोत्सव में गाया है। यह पहली बार है जब मैंने 2 घंटे तक लगातार भक्ति गीत गाए। भगवान शिव और मां पार्वती के आशीर्वाद से यह संभव हुआ। भस्म आरती में शामिल होकर शांति और ऊर्जा दोनों मिली है। जब सभी एक सुर में गा रहे थे, तो मन ऊर्जा से भर गया। मैं पहली बार आई हूं लेकिन अब बार-बार आऊंगी।"
उन्होंने आगे बताया, "मुझे लगता है कि आज के बाद मेरे जीवन और देश में सब कुछ बेहतर होने वाला है। 2025 हर तरह से उतार-चढ़ाव वाला साल रहा है और मुझे उम्मीद है कि भस्म आरती की जो ऊर्जा है, वो इस साल सब कुछ सही कर देगी। मैं इस ऊर्जा को अपने साथ लेकर जा रही हूं।"
हिंदी सिनेमा में जारी गानों के प्रति सोना ने कहा, "मुझे लगता है कि हमें अब सुकून देने वाले गाने सुनने और गाने चाहिए, क्योंकि हर जगह केवल दबाव महसूस होता है। भगवान शिव हमारे लिए सब कुछ हैं, क्योंकि उन्होंने ही नृत्य और कला की नींव रखी है। उनके आशीर्वाद की आवश्यकता हम सभी को है।"
गौरतलब है कि सोना महापात्रा ने बॉलीवुड को कई बेहतरीन गाने दिए हैं, जैसे 'अंबरसरिया', 'बहारा', 'नैना', 'मुझे का लूटेगा रुपैया', 'बेड़ा-पार', और 'जिया लागे न'।