पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय की सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएं; सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्ट

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पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय की सुरक्षा पर बढ़ती चिंताएं; सांप्रदायिक हिंसा की रिपोर्ट

सारांश

पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ बढ़ी हैं। हालिया रिपोर्ट में शिया, अहमदिया और हजारा समुदायों को बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा का शिकार बताया गया है। सरकार उनकी सुरक्षा में असफल हो रही है। यह स्थिति चिंताजनक है।

Key Takeaways

  • पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की स्थिति चिंताजनक है।
  • शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं।
  • सरकार ने सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता दिखाई है।

एथेंस, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल उठ खड़े हुए हैं। एक नई रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि शिया, अहमदिया और हजारा जैसे समुदाय लगातार बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा का शिकार हो रहे हैं और सरकार उनकी सुरक्षा में नाकाम साबित हो रही है।

डायरेक्टस नामक एथेंस स्थित संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों के दुरुपयोग के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रही है, जबकि चरमपंथी समूह धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बना रहे हैं।

रिपोर्ट में पिछले महीने इस्लामाबाद में एक शिया मस्जिद पर हुए आत्मघाती हमले का उल्लेख है, जिसमें 36 शिया लोगों की जान गई और लगभग 170 लोग घायल हुए। यह घटना पाकिस्तान में अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों की सुरक्षा के प्रति चिंता को और बढ़ाती है।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की कुल जनसंख्या में शिया समुदाय का हिस्सा लगभग 10 से 15 प्रतिशत है, लेकिन उन्हें अक्सर बहुसंख्यक सुन्नी समुदाय द्वारा उत्पीड़न और घातक हमलों का सामना करना पड़ता है।

शिया नेता राजा नासिर अब्बास जाफरी ने कहा कि संघीय राजधानी में हुए इस तरह के आतंकी हमले ने न केवल लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता को उजागर किया है, बल्कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि हजारा, अहमदिया, इस्माइली, दाऊदी बोहरा, जिक्रि, सूफी और बरेलवी मुस्लिम समुदायों को लगातार सांप्रदायिक हिंसा, भेदभावपूर्ण कानूनों और कमजोर कानूनी सुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। इनके धार्मिक स्थलों पर भी अक्सर हमले का खतरा बना रहता है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के अनुसार, पाकिस्तान में सुन्नी चरमपंथी समूहों द्वारा अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदायों पर हमले बढ़ रहे हैं, जिसका मुख्य कारण सरकार द्वारा इन समूहों पर प्रभावी कार्रवाई न करना है।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई मामलों में सांप्रदायिक हिंसा के आरोपियों के खिलाफ मुकदमा न चलाने के कारण ऐसे हमलों को बढ़ावा मिलता है।

पाकिस्तान में अक्सर निशाने पर रहने वाले प्रमुख अल्पसंख्यक समुदायों में अहमदिया समुदाय भी शामिल है। अक्टूबर 2025 में लाहौर की एक अहमदिया मस्जिद पर हुए हमले का उल्लेख करते हुए अहमदिया मुस्लिम जमात कनाडा ने इसे पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के खिलाफ जारी हिंसा और राज्य-समर्थित भेदभाव का उदाहरण बताया है।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय की कब्रों और मीनारों के अपमान की घटनाओं की निंदा की थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में इस्माइली समुदाय भी सुन्नी चरमपंथियों के निशाने पर रहा है। लगभग एक दशक पहले कराची जा रही एक बस पर हुए हमले में 43 इस्माइली मारे गए थे।

हमले के स्थल से मिले पर्चों में यह धमकी दी गई थी कि इस समुदाय को खत्म करने और इस्लामी शरीया लागू करने तक हमलावर चैन से नहीं बैठेंगे।

Point of View

वे सरकार के प्रति गंभीर सवाल उठाते हैं। अल्पसंख्यकों को सही सुरक्षा प्रदान करना और सांप्रदायिक हिंसा को रोकना अत्यंत आवश्यक है।
NationPress
18/03/2026

Frequently Asked Questions

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदायों को किस प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ रहा है?
पाकिस्तान में शिया, अहमदिया और हजारा समुदाय को बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा, भेदभावपूर्ण कानूनों और हमलों का सामना करना पड़ रहा है।
क्या पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर पा रही है?
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा में नाकाम साबित हो रही है और प्रभावी कार्रवाई करने में असफल है।
क्या अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर कुछ कहा है?
हां, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के खिलाफ भेदभाव और हमलों की निंदा की है।
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