11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

रिपोर्ट: गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का धर्म का उपयोग अपने खतरनाक एजेंडे को छुपाने के लिए

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
रिपोर्ट: गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान का धर्म का उपयोग अपने खतरनाक एजेंडे को छुपाने के लिए

सारांश

पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने खतरनाक एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का सहारा लिया है। एक नई रिपोर्ट में इस गंभीर मुद्दे का खुलासा किया गया है, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और शिया समुदाय की सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकता है।

मुख्य बातें

पाकिस्तान अपने खतरनाक एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का सहारा ले रहा है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में बढ़ते तनाव के कारण हालात बिगड़ रहे हैं।
रिपोर्ट में शिया समुदाय की सुरक्षा पर चिंता व्यक्त की गई है।
पाकिस्तान की सेना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रही है।
मीडिया पर आरोप है कि वह ईरान को खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।

वॉशिंगटन, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने कथित खतरनाक एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का सहारा लिया है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में सामने आई है।

वॉशिंगटन स्थित ग्लोबल स्ट्रैट व्यू के लिए लिखते हुए सेंगे सेरिंग ने उल्लेख किया कि पाकिस्तान धर्म का उपयोग “धुएं के पर्दे” के रूप में कर रहा है, जिससे वह क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को नष्ट करने और प्राकृतिक संसाधनों पर अपने कब्जे को छिपा सके।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यदि ईरान और अरब देशों के बीच पूर्ण युद्ध छिड़ता है, तो पाकिस्तान में शिया समुदाय की सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ सकती है। ऐसे में, गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासियों के लिए “टू-नेशन थ्योरी” से मुक्त होकर भारत के साथ जुड़ना एक सम्मानजनक विकल्प हो सकता है।

यह रिपोर्ट इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि कराकोरम हाईवे पर इस वर्ष यातायात में रुकावटें केवल बर्फबारी या भूस्खलन के कारण नहीं होंगी, बल्कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का भी प्रभाव पड़ेगा। हालात उस समय और बिगड़ गए जब अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद गिलगित और स्कर्दू में हिंसा भड़क उठी।

जानकारी के अनुसार, 1 मार्च को पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें 18 लोगों की जान गई, जिनमें 8 बच्चे भी शामिल थे। इसके बाद स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कर्फ्यू लगाया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने दो सैनिकों की हत्या की और सेना से जुड़े कई ढांचों को आग लगा दी।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पाकिस्तान की कानून-व्यवस्था एजेंसियां गिलगित-बाल्टिस्तान में दर्जनों लोगों की तलाश और गिरफ्तारी में लगी हुई हैं, जिन पर “ईरान समर्थित” धार्मिक नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है।

पुलिस रात में लोगों के घरों पर छापे मार रही है और रमजान के दौरान भी हिरासत में लिए गए व्यक्तियों को गुप्त हिरासत केंद्रों में रखा जा रहा है। जो भी व्यक्ति सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है या लोगों को संगठित करने की क्षमता रखता है, वह निशाने पर है।

गिरफ्तार किए गए लोगों में राजनीतिक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता जैसे एडवोकेट एहसान अली, इंजीनियर महबूब, एडवोकेट नफीस, फिदा इसार, तारुफ अब्बास, शेख यूसुफ, नजर काज़मी और शब्बीर मयार शामिल हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान के ये कदम बढ़ते आंतरिक असंतोष को नियंत्रित करने के लिए उठाए जा रहे हैं, जबकि अमेरिका और सऊदी अरब की उम्मीद है कि पाकिस्तानी सेना ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य अभियानों में मदद करेगी।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पाकिस्तानी सेना अपने पश्चिमी और अरब सहयोगियों को खुफिया और विश्लेषणात्मक समर्थन प्रदान कर रही है, साथ ही मीडिया के माध्यम से जनमत को प्रभावित कर ईरान के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रही है।

मीडिया पर आरोप है कि वह भारत-ईरान संबंधों को लेकर ईरान को खलनायक के रूप में प्रस्तुत कर रहा है और घरेलू स्तर पर हिंदू विरोधी भावनाओं का उपयोग कर रहा है, ताकि अपने रणनीतिक हितों को साधा जा सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि शिया समुदाय की सुरक्षा को भी खतरे में डाल सकता है। यह आवश्यक है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस स्थिति पर ध्यान दे और पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराए।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या पाकिस्तान गिलगित-बाल्टिस्तान में धर्म का उपयोग कर रहा है?
हाँ, पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में अपने खतरनाक एजेंडे को छिपाने के लिए धर्म का सहारा लिया है।
इस रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान धर्म का इस्तेमाल अपने सांस्कृतिक हानि को छिपाने के लिए कर रहा है।
गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात कैसे हैं?
गिलगित-बाल्टिस्तान में हालात तनावपूर्ण हैं, विशेषकर हालिया हिंसा के बाद।
क्या शिया समुदाय की सुरक्षा खतरे में है?
हाँ, रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि ईरान और अरब देशों के बीच युद्ध होता है, तो शिया समुदाय की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पाकिस्तान की सेना क्या कर रही है?
पाकिस्तान की सेना प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और कई लोगों की गिरफ्तारी कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 महीने पहले
  2. 5 महीने पहले
  3. 7 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 11 महीने पहले
  8. 1 साल पहले