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सुनील शेट्टी का एक्शन हीरो बनने का राज: '75% मेहनत, 25% किस्मत — हर हड्डी टूटी, तब बनी पहचान'

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सुनील शेट्टी का एक्शन हीरो बनने का राज: '75% मेहनत, 25% किस्मत — हर हड्डी टूटी, तब बनी पहचान'

सारांश

सुनील शेट्टी ने एक पुराने इंटरव्यू में बताया था कि एक्शन हीरो की छवि बनाने के लिए उन्होंने जानलेवा स्टंट किए, हड्डियाँ तुड़वाईं — और सफलता का फॉर्मूला बताया: 75% मेहनत, 25% किस्मत। यह सिर्फ एक कलाकार की कहानी नहीं, बल्कि एक पीढ़ी के सिनेमा की नींव है।

मुख्य बातें

सुनील शेट्टी ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि सफलता में 75% मेहनत और 25% किस्मत का योगदान होता है।
एक्शन हीरो की छवि बनाने के लिए उन्होंने जानलेवा स्टंट किए और शरीर की हर हड्डी टूटने तक दर्द सहा।
शेट्टी ने आलोचनाओं को खुले दिल से स्वीकार कर अपनी कमज़ोरियाँ सुधारने पर ज़ोर दिया।
उन्होंने 1992 में 'बलवान' से बॉलीवुड में कदम रखा और 'हेरा फेरी' , 'बॉर्डर' , 'धड़कन' समेत दर्जनों हिट फिल्में दीं।
उनका लक्ष्य था कि दर्शक उनके एक्शन को वास्तविक मानें — महज स्टंट नहीं, बल्कि एक विश्वसनीय छवि।

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता सुनील शेट्टी ने एक पुराने इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उनकी एक्शन हीरो की छवि रातोंरात नहीं बनी — इसके पीछे दशकों की कठिन मेहनत, शारीरिक जोखिम और आत्म-सुधार की अटूट इच्छाशक्ति है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि किसी भी कलाकार की सफलता में 75 प्रतिशत मेहनत और 25 प्रतिशत किस्मत का योगदान होता है।

मेहनत और किस्मत का समीकरण

शेट्टी ने उस इंटरव्यू में कहा था, '75 प्रतिशत मेहनत, 25 प्रतिशत किस्मत जरूर है, लेकिन मैंने बहुत मेहनत की है। हमेशा सीखने की कोशिश की। आलोचनाओं को खुले दिल से स्वीकार किया है और यह समझने की कोशिश की है कि सामने वाला क्या कहना चाहता है। अपनी कमियों को दूर करने और अपनी खूबियों पर काम करने की कोशिश की।'

यह दृष्टिकोण उनके करियर की नींव रहा। 90 के दशक में जब बॉलीवुड में एक्शन फिल्मों का बोलबाला था, तब शेट्टी ने न केवल एक्शन, बल्कि रोमांस, कॉमेडी और गंभीर भूमिकाओं में भी अपनी अलग छाप छोड़ी।

एक्शन हीरो बनने का कठिन सफर

शेट्टी ने बताया था कि पर्दे पर एक विश्वसनीय एक्शन हीरो की छवि गढ़ना उनके लिए शारीरिक रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। उन्होंने कहा था, 'एक्शन इमेज बनाने के लिए मैंने ऐसे एक्शन और स्टंट किए, जिनसे मेरी जान जा सकती थी, जिनसे मुझे चोट लगी और मेरे शरीर की हर हड्डी टूट गई। ये सब आसान नहीं था।'

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य महज स्टंट करना नहीं था। उनके अपने शब्दों में, 'मेरा मकसद सिर्फ स्टंट करना नहीं था, बल्कि पर्दे पर एक ऐसे एक्शन हीरो की छवि बनाना था, जिसे देखकर दर्शकों को यकीन हो कि वह किसी भी मुश्किल का सामना कर सकता है। मैं चाहता था कि दर्शक मेरे एक्शन को सच मानें।'

कमज़ोरियों को ताकत में बदलने की कला

शेट्टी ने अपने अभिनय दर्शन को साझा करते हुए कहा था, 'एक अभिनेता के तौर पर मैं समझता हूं कि हर कलाकार में कुछ कमज़ोरियाँ और कुछ मज़बूत पक्ष होते हैं। इसलिए मेरा ध्यान अपनी कमियों को धीरे-धीरे सुधारने और अपनी मज़बूत बातों को दर्शकों के सामने बेहतर तरीके से पेश करने पर रहा।'

यह आत्म-विश्लेषण की क्षमता ही थी जिसने उन्हें उस दौर के अन्य एक्शन अभिनेताओं से अलग किया। गौरतलब है कि 90 के दशक की एक्शन फिल्मों में कलाकारों के लिए स्टंट बेहद जोखिम भरे होते थे और सुरक्षा मानक आज की तुलना में काफी सीमित थे।

करियर की प्रमुख फिल्में

सुनील शेट्टी ने 1992 में फिल्म 'बलवान' से बॉलीवुड में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने 'मोहरा', 'बॉर्डर', 'धड़कन', 'हेरा फेरी', 'मैं हूँ ना', 'फिर हेरा फेरी' और 'आवारा पागल दीवाना' जैसी सफल फिल्मों में यादगार भूमिकाएँ निभाईं।

इन फिल्मों की विविधता यह बताती है कि शेट्टी ने खुद को सिर्फ एक्शन तक सीमित नहीं रखा — हालाँकि एक्शन हीरो की उनकी छवि आज भी दर्शकों के दिलों में सबसे गहरी जगह बनाए हुए है। उनकी यह विरासत आने वाली पीढ़ी के अभिनेताओं के लिए प्रेरणा बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि असली शारीरिक जोखिम से बनती थी। आज की पीढ़ी जब OTT और CGI के युग में 'एक्शन' देखती है, तो शेट्टी जैसे अभिनेताओं का बलिदान अदृश्य हो जाता है। उनका '75-25' फॉर्मूला एक ऐसे उद्योग में आत्म-जवाबदेही की दुर्लभ आवाज़ है जहाँ सफलता को अक्सर 'स्टारडम' या 'नेपोटिज्म' के चश्मे से देखा जाता है। यह बयान एक अनुस्मारक है कि असली करियर — चाहे किसी भी क्षेत्र में हो — पसीने और आत्म-सुधार की नींव पर टिका होता है।
RashtraPress
9 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनील शेट्टी ने एक्शन हीरो बनने का राज क्या बताया था?
सुनील शेट्टी ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि एक्शन हीरो बनने के लिए उन्होंने जानलेवा स्टंट किए और शरीर की हर हड्डी टूटने तक दर्द सहा। उनके अनुसार सफलता का फॉर्मूला है — 75% मेहनत और 25% किस्मत।
सुनील शेट्टी ने बॉलीवुड में पहली फिल्म कब की थी?
सुनील शेट्टी ने 1992 में फिल्म 'बलवान' से बॉलीवुड में पदार्पण किया था। इसके बाद उन्होंने 'मोहरा', 'बॉर्डर', 'हेरा फेरी' और 'धड़कन' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया।
सुनील शेट्टी का अभिनय दर्शन क्या है?
शेट्टी का मानना है कि हर कलाकार में कुछ कमज़ोरियाँ और कुछ मज़बूत पक्ष होते हैं। उन्होंने हमेशा अपनी कमियों को सुधारने और आलोचनाओं को खुले दिल से स्वीकार करने पर ज़ोर दिया।
90 के दशक में एक्शन फिल्मों में स्टंट करना कितना खतरनाक था?
सुनील शेट्टी के अनुसार उस दौर की एक्शन फिल्मों में कलाकारों के लिए स्टंट बेहद मुश्किल और जानलेवा होते थे। उन्होंने खुद ऐसे स्टंट किए जिनसे चोट लगी और शरीर की हड्डियाँ तक प्रभावित हुईं।
सुनील शेट्टी की सबसे यादगार फिल्में कौन सी हैं?
'बलवान' (1992) से करियर शुरू करने वाले शेट्टी की सबसे यादगार फिल्मों में 'मोहरा', 'बॉर्डर', 'धड़कन', 'हेरा फेरी', 'मैं हूँ ना', 'फिर हेरा फेरी' और 'आवारा पागल दीवाना' शामिल हैं। इन फिल्मों ने उन्हें 90 के दशक का सबसे बहुमुखी एक्शन अभिनेता बनाया।
राष्ट्र प्रेस
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