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टॉक्सिक रिव्यू: यश की दोहरी भूमिका, गीतू मोहनदास का जादू — 4.5/5 रेटिंग

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टॉक्सिक रिव्यू: यश की दोहरी भूमिका, गीतू मोहनदास का जादू — 4.5/5 रेटिंग

सारांश

'टॉक्सिक' सिर्फ एक्शन फिल्म नहीं — यह रिश्तों, वफादारी और गैंगस्टर दुनिया की परतों में लिपटी एक महत्वाकांक्षी कहानी है। यश की दोहरी भूमिका और गीतू मोहनदास का अनूठा निर्देशन इसे बाकी एक्शन फिल्मों से अलग खड़ा करता है। 4.5/5 रेटिंग के साथ यह साल के बेहतरीन थिएटर अनुभवों में से एक है।

मुख्य बातें

यश फिल्म में राया और बेटे टिकट की दोहरी भूमिका में हैं — दोनों किरदार स्वभाव और अंदाज़ में बिल्कुल अलग।
फिल्म की अवधि 3 घंटे 14 मिनट ; राष्ट्र प्रेस रेटिंग 4.5/5 ।
निर्देशक गीतू मोहनदास ने एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा और भावनात्मक रिश्तों को एक साथ पर्दे पर उतारा।
रुक्मिणी वसंत (मेलिसा) फिल्म का सरप्राइज़ पैकेज — उनका अभिनय स्क्रीन पर गहरा असर छोड़ता है।
क्लाइमैक्स में अप्रत्याशित मोड़ — फिल्म खत्म होने के बाद भी कहानी दर्शक के ज़ेहन में बनी रहती है।
कियारा आडवाणी , नयनतारा और हुमा कुरैशी ने भावनात्मक गहराई और सशक्त उपस्थिति से कहानी को समृद्ध किया।

निर्देशक गीतू मोहनदास की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' को किसी एक जॉनर की सीमा में नहीं बाँधा जा सकता। यश, कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे दिग्गज कलाकारों से सजी यह 3 घंटे 14 मिनट की फिल्म एक्शन, गैंगस्टर ड्रामा, प्रेम और पारिवारिक रिश्तों को एक साथ बड़े पर्दे पर जीवंत करती है। राष्ट्र प्रेस इसे 4.5/5 की रेटिंग देता है।

कहानी और किरदारों की परतें

यश इस फिल्म में राया और उसके बेटे टिकट — दोनों की दोहरी भूमिका निभाते हैं। राया गैंगस्टर जगत का मुख्य स्तंभ है, जबकि टिकट कहानी में भावनात्मक गहराई का एक नया आयाम जोड़ता है। दोनों किरदारों का स्वभाव और अंदाज बिल्कुल जुदा है, और यश इनके बीच सहजता से आवाजाही करते नजर आते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, इन दो व्यक्तित्वों के बीच का फर्क और उनके रिश्ते की अहमियत और गहरी होती जाती है।

नयनतारा का किरदार गंगा और कियारा आडवाणी का किरदार नादिया कहानी को भावनात्मक ऊँचाई देते हैं। कियारा अपने किरदार में गर्मजोशी और कमज़ोरी दोनों को एक साथ उभारती हैं। हुमा कुरैशी की एलिजाबेथ पर्दे पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराती है।

सरप्राइज़ पैकेज और सहायक कलाकार

रुक्मिणी वसंत फिल्म में मेलिसा के किरदार में एक सुखद चौंकाने वाला अनुभव बनकर उभरती हैं — उनका अभिनय स्क्रीन पर गहरा असर छोड़ता है। तारा सुतारिया की रेबेका, अक्षय ओबेरॉय के टोनी, डैरेल डी'सिल्वा के साल्वाडोर और सुदेव नायर के करमाडी — हर किरदार की अपनी अलग यात्रा है, जो कहानी को और परतदार बनाती है।

पहला और दूसरा भाग — दो अलग अनुभव

फिल्म का पहला भाग मसालेदार और मनोरंजक है, जहाँ गीतू मोहनदास धीरे-धीरे ड्रामा, रिश्ते और गैंगस्टर की दुनिया को एक-एक परत में खोलती हैं। इंटरवल एक ऐसा मोड़ लेकर आता है जो दर्शकों को आगे की कहानी जानने के लिए बेचैन कर देता है।

दूसरे भाग में एक्शन का पैमाना कई गुना बड़ा हो जाता है — तेज़, हिंसक और विस्फोटक। लेकिन इस सबके बीच फिल्म अपने भावनात्मक धागे को नहीं छोड़ती। प्यार, परिवार, वफादारी और चाहत — ये सब एक्शन के साथ-साथ चलते रहते हैं और राया, टिकट, गंगा तथा नादिया के रिश्ते इसे निजी स्तर पर जोड़ते हैं।

क्लाइमैक्स और निर्देशन

फिल्म की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दर्शक को हर बात सीधे नहीं बताती — जब आपको लगता है कि कहानी की दिशा समझ में आ गई, तभी एक नया अप्रत्याशित मोड़ सामने आ जाता है। क्लाइमैक्स में यह अप्रत्याशितता अपने चरम पर पहुँचती है और फिल्म खत्म होने के बाद भी दर्शक के ज़ेहन में घूमती रहती है।

गीतू मोहनदास ने बड़े स्तर पर कहानी कहने का साहस दिखाया है। उन्होंने हर किरदार को उसकी अपनी कहानी दी है और दर्शकों को खुद जोड़ने और समझने की जगह दी है — यही इसे बाकी एक्शन फिल्मों से अलग करता है।

फैसला

'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' एक भव्य, महत्वाकांक्षी और यादगार सिनेमाई अनुभव है। यश का दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और दोहरा अभिनय, गीतू मोहनदास की अनूठी कहानी कहने की शैली और विजुअल भव्यता मिलकर इसे बड़े पर्दे का एक खास तजुर्बा बनाते हैं। यह फिल्म थिएटर में देखने के लिए बनी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि हर सहायक किरदार को उसकी अपनी कहानी देती हैं। हालाँकि 3 घंटे 14 मिनट की अवधि कुछ दर्शकों को भारी लग सकती है, लेकिन क्लाइमैक्स का अप्रत्याशित मोड़ इस लंबाई को उचित ठहराता है। यह फिल्म साबित करती है कि दक्षिण भारतीय सिनेमा की कहानी कहने की शैली अब सिर्फ स्पेक्टेकल नहीं, बल्कि भावनात्मक गहराई की भी वाहक बन रही है।
RashtraPress
26 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' किस बारे में है?
यह फिल्म गैंगस्टर दुनिया की पृष्ठभूमि में प्यार, परिवार और वफादारी की कहानी कहती है। यश दोहरी भूमिका में हैं — राया (गैंगस्टर) और उसका बेटा टिकट — और कहानी इन दोनों के रिश्ते और उनके अलग-अलग सफर पर केंद्रित है।
टॉक्सिक में यश की दोहरी भूमिका कैसी है?
यश ने राया और टिकट के रूप में दो बिल्कुल अलग किरदार निभाए हैं — दोनों का स्वभाव, अंदाज़ और भावनात्मक रंग जुदा है। फिल्म जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, इन दोनों किरदारों के बीच का फर्क और उनके रिश्ते की अहमियत और स्पष्ट होती जाती है, जिससे यश का प्रदर्शन और दिलचस्प बनता जाता है।
क्या टॉक्सिक का क्लाइमैक्स वाकई चौंकाने वाला है?
हाँ, फिल्म का क्लाइमैक्स एक अप्रत्याशित मोड़ लेता है जो दर्शकों को हैरान करता है। फिल्म पूरे समय दर्शकों को यह अनुमान नहीं लगाने देती कि आगे क्या होगा, और अंत में यह अनिश्चितता अपने चरम पर पहुँचती है।
टॉक्सिक में महिला कलाकारों की भूमिका कैसी है?
नयनतारा (गंगा), कियारा आडवाणी (नादिया), हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ) और रुक्मिणी वसंत (मेलिसा) — सभी ने अपने-अपने किरदारों में कहानी को भावनात्मक गहराई दी है। रुक्मिणी वसंत विशेष रूप से सरप्राइज़ पैकेज बनकर उभरती हैं।
क्या टॉक्सिक थिएटर में देखने लायक है?
हाँ, 4.5/5 रेटिंग के साथ यह फिल्म बड़े पर्दे का अनुभव माँगती है। इसके विजुअल्स, एक्शन सीक्वेंस और भावनात्मक गहराई मिलकर इसे एक यादगार थिएटर अनुभव बनाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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