गीतू मोहनदास स्कूल में बार-बार फेल हुईं, पिता के एक सवाल ने बदली पूरी सोच
सारांश
मुख्य बातें
फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' की निर्देशक गीतू मोहनदास ने 25 अगस्त 2026 को चेन्नई में आयोजित फिल्म के प्री-रिलीज कार्यक्रम में अपने संघर्षपूर्ण बचपन की एक अनसुनी दास्तान साझा की। उन्होंने बताया कि स्कूल में लगातार फेल होने और खुद को 'फेलियर' मानने के दौर में उनके पिता के एक सरल सवाल ने उनकी पूरी जिंदगी की दिशा बदल दी। अभिनेता यश की मुख्य भूमिका वाली यह फिल्म जल्द रिलीज होने वाली है।
बचपन से सिनेमा से जुड़ाव
गीतू ने बताया कि उनका सिनेमा से नाता बेहद कम उम्र में ही शुरू हो गया था। उन्होंने कहा, 'करीब साढ़े चार साल की उम्र में फिल्मों की दुनिया से जुड़ गई थी। जिंदगी में बहुत लंबा रास्ता तय किया है।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय सिनेमा में महिला निर्देशकों की संख्या अभी भी पुरुषों की तुलना में काफी कम है, और गीतू जैसी यात्राएँ उद्योग के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती हैं।
स्कूल में फेल होने का दौर
गीतू ने बेबाकी से स्वीकार किया कि वह पढ़ाई में कमज़ोर थीं और स्कूल में लगातार फेल होती रहीं। उन्होंने कहा, 'स्कूल में होने वाली कई गतिविधियों में भी मुझे चुना नहीं जाता था — चाहे बास्केटबॉल हो या कोई दूसरी चीज़, मैं अक्सर पीछे ही रहती थी। एक समय ऐसा भी था जब मैं खुद को फेलियर मानने लगी थी।' गौरतलब है कि यह वही दौर था जब उन्हें सबसे ज़्यादा भरोसे की ज़रूरत थी।
पिता का वह सवाल जो बन गया जीवन का आधार
इसी मुश्किल समय में गीतू के पिता ने उनसे एक ऐसा सवाल किया जो आज भी उनकी सोच का हिस्सा है। उन्होंने बताया, 'मेरे पिता ने कहा — अगर पढ़ाई में परेशानी हो रही है तो बताओ कि आखिर जिंदगी में क्या करना चाहती हो, बड़ी होकर क्या बनना चाहती हो।' गीतू ने उन्हें जवाब दिया कि वह बेकर बनना चाहती हैं। इस पर उनके पिता ने शांति से कहा, 'अगर बेकर बनना चाहती हो तो अपने शहर की सबसे अच्छी बेकर बनने की कोशिश करो।'
सलाह का असर और जीवन की सीख
पिता की इस बात ने गीतू के मन में एक स्थायी विचार बो दिया — जो भी करो, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ दो। उन्होंने कहा, 'मैं अपने लक्ष्य की तरफ ऐसे बढ़ती रही जैसे आँखों की साइड पर पट्टी बाँधकर चलने वाला घोड़ा सिर्फ अपने सामने के रास्ते पर ध्यान देता है। लोगों की आलोचनाओं से खुद को भटकने नहीं दिया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी काम में सफल होने से पहले खुद पर भरोसा करना ज़रूरी है।
यश का विश्वास: एक अहम साझेदारी
कार्यक्रम में गीतू ने अभिनेता यश का विशेष आभार जताया। उन्होंने कहा, 'मेरे पूरे सफर में यश उन लोगों में से रहे जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया — खासकर उस समय जब शायद दूसरे लोग ऐसा नहीं कर रहे थे। उनका विश्वास मेरे लिए बहुत मायने रखता है।' 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' जल्द ही सिनेमाघरों में दस्तक देगी, और इस फिल्म के साथ गीतू मोहनदास का यह व्यक्तिगत सफर और भी प्रासंगिक हो उठता है।