उपासना सिंह का खुलासा: बेटे नानक की एक्टिंग देख भावुक हुईं, कहा- 'जन्मजात है यह कला'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री उपासना सिंह ने हाल ही में अपने बेटे नानक को गाने 'ओ जाना' में पर्दे पर देखा और एक माँ के रूप में अपनी भावनाएँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि नानक के अंदर बचपन से ही अभिनय के प्रति जो लगाव था, वह आज एक पेशेवर करियर का रूप ले चुका है। उनके अनुसार, यह प्रतिभा सिखाई नहीं गई — यह नानक के भीतर स्वाभाविक रूप से मौजूद थी।
पर्दे पर बेटे को देखकर भावुक हुईं उपासना
उपासना सिंह ने कहा, 'जब मैंने अपने बेटे नानक को पर्दे पर देखा तो वह पल मेरे लिए बेहद भावुक करने वाला था। एक माँ के लिए इससे बड़ी खुशी कोई नहीं हो सकती कि उसका बच्चा अपने सपनों की ओर बढ़े और उन्हें पूरा करने की कोशिश करे।' उन्होंने बताया कि जब नानक छोटा था, तभी से उसके अंदर अभिनय के प्रति रुचि दिखाई देती थी। 'उस समय मुझे लगता था कि यह बच्चों की सामान्य इच्छाओं में से एक है, लेकिन समय के साथ एहसास हुआ कि नानक का सपना सिर्फ एक शौक नहीं, बल्कि उसका जुनून है।'
कॉलेज से मिले सफलता के संकेत
अभिनेत्री ने बताया कि जैसे-जैसे नानक बड़ा हुआ, उसकी मेहनत और समर्पण साफ दिखाई देने लगा। 'कॉलेज के दिनों में उसने कई नाटकों में परफॉर्म किया और अपनी अभिनय क्षमता से लोगों का ध्यान खींचा। उसे कई पुरस्कार भी मिले।' उन्होंने आगे कहा कि किसी भी क्षेत्र में सफलता केवल सपने देखने से नहीं मिलती — उसके लिए निरंतर परिश्रम ज़रूरी है, और नानक ने यह बात बहुत कम उम्र में ही समझ ली थी।
पंजाबी फिल्मों से शुरू हुआ सफर
उपासना सिंह ने बताया कि नानक पहले ही पंजाबी फिल्मों में काम कर चुका है और अब धीरे-धीरे अपने करियर में आगे बढ़ रहा है। 'एक माँ के तौर पर जब मैं अपने बेटे को नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ते हुए देखती हूँ, तो सच में बेहद खुशी होती है। हर माँ चाहती है कि उसका बच्चा अपने सपनों को पूरा करे, और जब वह ऐसा करता है, तो उसकी खुशी शब्दों में बयाँ नहीं की जा सकती।'
नए कलाकारों को उपासना की सीख
नए कलाकारों को सलाह देते हुए उपासना सिंह ने कहा, 'सफलता पाने का कोई छोटा रास्ता नहीं होता। कलाकार को हर दिन कुछ नया सीखना चाहिए और अपने आसपास की दुनिया को बहुत ध्यान से देखना चाहिए। अभिनय केवल संवाद बोलने का नाम नहीं है — लोगों की भावनाओं, उनके व्यवहार और अभिव्यक्ति को समझना भी उतना ही ज़रूरी है।' उन्होंने कहा कि किसी का चलना, बोलना, हँसना या दुख व्यक्त करना भी एक कलाकार के लिए सीखने का माध्यम बन सकता है।
माँ ने कभी नहीं सिखाई एक्टिंग
उपासना ने स्पष्ट किया, 'मैंने कभी अपने बेटे को अभिनय सिखाने की कोशिश नहीं की। यह नानक के अंदर स्वाभाविक रूप से मौजूद है। कुछ लोगों के अंदर कला जन्मजात होती है, और नानक उन्हीं में से एक है।' उन्होंने यह भी कहा कि वह हमेशा नानक को यही सलाह देती हैं कि चाहे कितनी भी सफलता मिल जाए, सीखना कभी नहीं छोड़ना चाहिए। नानक का यह सफर अभी शुरुआती दौर में है, और आने वाले समय में वह और बड़े मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाएँगे।