उत्पल दत्त की पुण्यतिथि: जैकी श्रॉफ ने किया हिंदी-बंगाली रंगमंच के महानायक को याद
सारांश
मुख्य बातें
हिंदी और बंगाली सिनेमा के साथ-साथ भारतीय रंगमंच को नई ऊँचाइयाँ देने वाले बहुआयामी अभिनेता, निर्देशक और नाटककार उत्पल दत्त की 19 अगस्त 2026 को पुण्यतिथि पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उत्पल दत्त का निधन 19 अगस्त 1993 को हुआ था — उनकी विरासत आज भी भारतीय रंगमंच और सिनेमा में अमिट है।
श्रद्धांजलि का क्षण
अभिनेता जैकी श्रॉफ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर उत्पल दत्त की तस्वीर साझा करते हुए लिखा, 'उत्पल दत्त की पुण्यतिथि पर हम सभी उनको याद करते हैं। (29 मार्च 1929 – 19 अगस्त 1993)।' यह भावभीनी याद उस कलाकार को समर्पित है जिसने मंच से लेकर परदे तक अपनी अमिट छाप छोड़ी।
जन्म और प्रारंभिक जीवन
उत्पल दत्त का जन्म 29 मार्च 1929 को ब्रिटिश भारत की बंगाल प्रेसीडेंसी के बारीसाल (अब बांग्लादेश) में हुआ था। उन्होंने कोलकाता के प्रतिष्ठित सेंट जेवियर्स कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की डिग्री हासिल की। कॉलेज के दिनों से ही अंग्रेजी और बंगाली थिएटर से उनका गहरा नाता बन गया था।
लिटिल थिएटर ग्रुप और रंगमंच की क्रांति
स्नातक के बाद उत्पल दत्त ने रंगमंच को अपना जीवन समर्पित कर दिया और अपनी खुद की थिएटर मंडली की स्थापना की। 1949 में इस मंडली को 'लिटिल थिएटर ग्रुप' नाम दिया गया। प्रारंभ में यह समूह मुख्यतः शहरी और शिक्षित वर्ग के लिए अंग्रेजी में नाटक प्रस्तुत करता था।
बाद में आम जनता और मेहनतकश वर्ग तक पहुँचने की चाहत में ग्रुप ने बंगाली भाषा को अपना माध्यम बना लिया। दत्त ने शेक्सपियर, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ, मैक्सिम गोर्की, हेनरिक इब्सन जैसे विश्व-साहित्य के दिग्गजों के साथ-साथ रवींद्रनाथ टैगोर और माइकल मधुसूदन दत्त जैसे बंगाली रचनाकारों की कृतियों को मंच पर जीवंत किया।
उनके नाटक राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते थे, जिसके कारण 1965 में उन्हें कई महीनों तक कारावास भी भोगना पड़ा। रंगमंच के प्रति आजीवन समर्पण के लिए उन्हें 1990 में प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी फेलोशिप से सम्मानित किया गया।
सिनेमा में योगदान
उत्पल दत्त ने फिल्म 'भुवन शोम' (1969) में अपनी बेमिसाल अदाकारी के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। हालाँकि, दर्शकों के दिलों में वे ऋषिकेश मुखर्जी की कालजयी फिल्म 'गोलमाल' (1979) में निभाए गए सख्त और हास्यपूर्ण किरदार 'भवानी शंकर' के रूप में सबसे अधिक बसे हैं। गंभीर भूमिकाओं से लेकर कॉमेडी तक — उनकी बहुमुखी प्रतिभा भारतीय सिनेमा में दुर्लभ है।
विरासत और स्मरण
उत्पल दत्त की पुण्यतिथि हर वर्ष उन्हें याद करने का अवसर बनती है — एक ऐसे कलाकार को, जिन्होंने कला को जन-आंदोलन का हथियार बनाया। यह ऐसे समय में और भी प्रासंगिक है जब भारतीय रंगमंच अपनी जड़ों की तलाश में है। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।