वाशु भगनानी का खंडन: 'कैमरे के सामने बोलने से सच नहीं बदलता', रमेश तौरानी के सुलह के दावे को नकारा
सारांश
मुख्य बातें
निर्माता वाशु भगनानी ने 23 मई 2026 को एक ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में टिप्स इंडस्ट्रीज के मालिक रमेश तौरानी के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें तौरानी ने फिल्म 'है जवानी तो इश्क होना है' को लेकर चल रहे विवाद के सुलझने का ऐलान किया था। भगनानी ने स्पष्ट किया कि मामला अभी भी अदालत में विचाराधीन है और उनके साथ अब तक कुछ भी तय नहीं हुआ है।
ट्रेलर लॉन्च पर क्या हुआ
इससे पहले शनिवार को फिल्म के ट्रेलर लॉन्च के दौरान रमेश तौरानी ने मीडिया के सामने कहा था कि उनके और वाशु भगनानी के बीच जो भी मतभेद थे, वे अब सुलझ चुके हैं और कोई समस्या नहीं है। इस बयान के कुछ ही घंटों बाद भगनानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस दावे का सीधा खंडन किया।
वाशु भगनानी का कड़ा जवाब
भगनानी ने कहा, ‘‘सिर्फ कैमरों के सामने यह कह देने से कि सब सुलझ गया है, सच नहीं बदल जाता। मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और कानूनी प्रक्रिया जारी है। जब कोई मामला अदालत में हो, तब सार्वजनिक मंच से यह कहना कि सब सुलझ गया है, अपने आप में गलत संदेश देता है।’’
उन्होंने आगे कहा, ‘‘मैंने इतने साल तक सिर्फ रिश्तों की इज्जत की वजह से चुप्पी बनाए रखी। मैं नहीं चाहता था कि बात मीडिया तक पहुंचे या विवाद बढ़े, लेकिन अब मुझे लग रहा है कि अगर मैं अपनी बात नहीं रखूंगा तो मेरी मेहनत और राइट्स को नजरअंदाज किया जाएगा। मैं अब अपने अधिकारों के लिए खुलकर आवाज उठाऊंगा और उन सभी निर्माताओं के लिए भी बोलूंगा, जिन्हें अक्सर हल्के में लिया जाता है।’’
विवाद की जड़: रचनात्मक अधिकारों का मामला
यह विवाद तब सार्वजनिक हुआ जब वाशु भगनानी ने टिप्स इंडस्ट्रीज और उससे जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ अदालत में मामला दायर किया। उनका आरोप है कि उनकी फिल्मों से जुड़े रचनात्मक अधिकारों का इस्तेमाल बिना अनुमति के किया गया। इस विवाद में उनकी चर्चित फिल्म 'बीवी नंबर 1' का नाम भी सामने आया है।
भगनानी का कहना है कि किसी भी निर्माता की रचना और मेहनत उसकी पहचान होती है और उसका उपयोग बिना इजाजत नहीं किया जाना चाहिए।
सिद्धांत और नैतिकता का सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में वाशु भगनानी ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला पैसे से ज्यादा सिद्धांतों और नैतिकता का है। उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री रिश्तों और भरोसे पर चलती है, लेकिन जब भरोसा टूटता है तो दुख ज्यादा होता है। एक निर्माता अपनी फिल्म में सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि अपनी भावनाएं और वर्षों की मेहनत भी लगाता है।
आगे क्या होगा
फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है और दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं। वाशु भगनानी ने संकेत दिया है कि वे कानूनी लड़ाई जारी रखेंगे और इंडस्ट्री में निर्माताओं के अधिकारों की आवाज उठाते रहेंगे। यह देखना बाकी है कि अदालत इस मामले में क्या फैसला सुनाती है।