'कुली नंबर 1' की सफलता पर वाशु भगनानी ने दी थीं डेविड धवन-गोविंदा को कारें, रमेश तौरानी ने किया था मना
सारांश
मुख्य बातें
निर्माता वाशु भगनानी ने हाल ही में एक विस्तृत बयान जारी कर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े अपने पुराने अनुभव सार्वजनिक किए हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब भगनानी और टिप्स इंडस्ट्रीज के प्रमुख रमेश तौरानी के बीच चल रहे कानूनी विवाद को लेकर फिल्म जगत में चर्चाएँ तेज़ हैं। भगनानी ने अपने करियर, डेविड धवन और गोविंदा के साथ पेशेवर संबंधों, तथा तौरानी परिवार से रिश्तों पर खुलकर बात की।
कुली नंबर 1 का किस्सा
भगनानी ने बताया कि फिल्म 'कुली नंबर 1' उनके करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक रही। उन्होंने कहा, 'यह फिल्म मेरे करियर की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक थी। फिल्म में निर्देशक डेविड धवन और अभिनेता गोविंदा ने शानदार काम किया, जिसके चलते मैंने दोनों को सम्मान देने के लिए एक-एक कार उपहार में देने का फैसला किया।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उस समय टिप्स कंपनी की फिल्म में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, इसलिए उनका सुझाव था कि यह उपहार दोनों मिलकर दें।
तौरानी ने दिखाई अनिच्छा
भगनानी के अनुसार, जब उन्होंने संयुक्त रूप से डेविड धवन और गोविंदा को कार देने का प्रस्ताव रखा, तो रमेश तौरानी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। भगनानी ने कहा, 'जब मैंने संयुक्त रूप से डेविड धवन और गोविंदा को कार देने की बात कही तो रमेश तौरानी ने रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद मैंने अकेले ही यह जिम्मेदारी उठाई और दोनों कलाकारों को कार गिफ्ट की।' उनका मानना है कि सफलता का श्रेय केवल निर्माता या निवेशक तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन कलाकारों तक भी पहुँचना चाहिए जिन्होंने अपनी मेहनत से फिल्म को सफल बनाया।
तौरानी परिवार से पुराने रिश्ते
भगनानी ने बताया कि फिल्मों में कदम रखने से पहले उनका ऑडियो कैसेट का कारोबार था और उसी दौरान तौरानी परिवार से उनकी मुलाकात हुई। उन्होंने कहा, 'म्यूजिक बिजनेस के जरिए हमारे परिवारों के बीच अच्छे संबंध बने।' बाद में उन्होंने पूजा फिल्म्स और पूजा एंटरटेनमेंट के बैनर तले फिल्म निर्माण की दुनिया में प्रवेश किया।
डेविड धवन के साथ लंबा सफर
भगनानी ने कहा कि करियर की शुरुआत से ही डेविड धवन उनके साथ जुड़े रहे और दोनों ने मिलकर कई सफल फिल्में दीं। उन्होंने एक तुलनात्मक टिप्पणी भी की — 'रमेश तौरानी को डेविड धवन के साथ अपने पहले निर्देशन प्रोजेक्ट पर काम करने में 31 साल लग गए।' यह टिप्पणी मौजूदा विवाद के संदर्भ में उनके दीर्घकालिक पेशेवर रिश्ते को रेखांकित करने के लिए की गई।
चुप्पी तोड़ने का फैसला
भगनानी ने स्वीकार किया कि समय के साथ कुछ ऐसी घटनाएँ हुईं जिन्होंने उन्हें गहरी निराशा दी। उन्होंने कहा, 'जिन लोगों को मैं कभी अपना विश्वासपात्र मानता था, उन्होंने विश्वासघात जैसा महसूस कराया।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि लंबे समय तक चुप रहने को लोग स्वीकृति मान लेते हैं, इसलिए उन्होंने अब अपना पक्ष सामने रखने का निर्णय किया है। यह विवाद आगे किस दिशा में जाता है, यह देखना बाकी है।