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वीरेंद्र सहवाग का खुलासा: 'हमेशा आक्रामक नहीं था, परिस्थिति के अनुसार बदलती थी बल्लेबाज़ी'

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वीरेंद्र सहवाग का खुलासा: 'हमेशा आक्रामक नहीं था, परिस्थिति के अनुसार बदलती थी बल्लेबाज़ी'

सारांश

वीरेंद्र सहवाग ने एक आम मिथक तोड़ा — वे सिर्फ़ 'नजफगढ़ के नवाब' नहीं थे जो हर गेंद पर टूट पड़ते थे। मुंबई में 'राइज एंड फॉल' के प्रमोशन के दौरान उन्होंने बताया कि ज़रूरत पड़ने पर रक्षात्मक क्रिकेट भी उनके शस्त्रागार में था — और अब यही समझदारी रियलिटी शो की होस्टिंग में काम आएगी।

मुख्य बातें

वीरेंद्र सहवाग ने कहा कि वे हमेशा आक्रामक नहीं खेलते थे; परिस्थिति के अनुसार रक्षात्मक बल्लेबाज़ी भी करते थे।
'राइज एंड फॉल' सीज़न 2 में सहवाग ने होस्ट की भूमिका निभाई है; पहले सीज़न में अशनीर ग्रोवर होस्ट थे।
शो में 15 प्रतियोगी 42 दिनों तक सत्ता और रणनीति पर आधारित खेल में भाग लेते हैं।
प्रतियोगियों को 'रूलर्स' और 'वर्कर्स' में बाँटा गया है; दर्शकों को भी यह तय करने की शक्ति मिली है।
सहवाग ने क्रिकेट करियर के अनुभव को प्रतियोगियों को संभालने में मददगार बताया।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग ने 29 सितंबर 2026 को मुंबई के एक पाँच सितारा होटल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान अपनी बल्लेबाज़ी शैली को लेकर फैली एक आम ग़लतफ़हमी को दूर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह हमेशा आक्रामक तरीके से नहीं खेलते थे, बल्कि मैच की ज़रूरत और परिस्थितियों को देखकर अपनी बल्लेबाज़ी शैली में बदलाव करते थे।

क्या कहा सहवाग ने

स्ट्रीमिंग रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल' के प्रमोशन के दौरान सहवाग ने कहा, 'ऐसा नहीं है कि मैंने खेल में हमेशा आक्रामक तरीके से खेला। मैंने रक्षात्मक तरीके से भी खेला है। मैंने नकारात्मक माहौल में भी खेला है।' यह वक्तव्य उन लाखों क्रिकेट प्रशंसकों के लिए एक नई दृष्टि प्रस्तुत करता है, जो सहवाग को केवल उनके विस्फोटक शॉट्स के लिए जानते हैं।

गौरतलब है कि सहवाग और सचिन तेंदुलकर की सलामी जोड़ी अपने दौर में दुनिया की सबसे विस्फोटक ओपनिंग पार्टनरशिप में से एक मानी जाती थी। दोनों ने अनेक अवसरों पर टीम इंडिया को तूफ़ानी शुरुआत दिलाकर जीत की नींव रखी।

'राइज एंड फॉल' में सहवाग की भूमिका

वीरेंद्र सहवाग ने रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल' के दूसरे सीज़न में होस्ट की ज़िम्मेदारी संभाली है। पहले सीज़न में यह भूमिका अशनीर ग्रोवर ने निभाई थी। शो में 15 प्रतियोगी कुल 42 दिनों तक चलने वाले खेल में भाग लेते हैं, जो सत्ता, रणनीति, गठजोड़ और बदलते समीकरणों पर आधारित है।

इस शो में प्रतियोगियों को 'रूलर्स' और 'वर्कर्स' में विभाजित किया गया है — 'रूलर्स' टावर से खेल को नियंत्रित करते हैं, जबकि 'वर्कर्स' बेसमेंट में रहकर ऊपर पहुँचने और अपनी स्थिति मज़बूत करने के अवसर तलाशते हैं।

अलग-अलग स्वभाव वाले लोगों को संभालने का अनुभव

शो में विभिन्न स्वभाव के प्रतियोगियों को संभालने की चुनौती पर सहवाग ने कहा कि उनका क्रिकेट करियर इसमें काम आएगा। उन्होंने कहा, 'मेरे पास इसका थोड़ा अनुभव है, क्योंकि मैंने विरोधी टीमों में अनुशासनहीन खिलाड़ियों से निपटा है। लेकिन लोगों का अनुभव यह है कि हम रोज़ किसी न किसी से मिलते हैं — कोई आक्रामक होता है, कोई विनम्र होता है और कोई गुस्से में बात करता है।'

सहवाग ने यह भी बताया कि वह सभी प्रतियोगियों के साथ एक ही तरह से पेश आने के बजाय उनकी प्रकृति को पहले समझने की कोशिश करेंगे — किसी को प्यार से, किसी को डाँटकर और किसी के साथ सख़्ती से भी बात करनी पड़ सकती है।

दर्शकों को मिली नई ताक़त

दूसरे सीज़न में एक नया और रोचक पहलू जोड़ा गया है — दर्शकों को यह तय करने की शक्ति दी गई है कि कौन-सा प्रतियोगी 'रूलर' बनेगा और कौन 'वर्कर'। यह बदलाव शो को पहले सीज़न की तुलना में अधिक इंटरेक्टिव बनाता है।

सहवाग ने चुनौती को सकारात्मक नज़रिये से लेते हुए कहा, 'मैं पहचानने की कोशिश करूंगा कि मैं इन्हें किस तरह संभाल सकता हूँ। यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण है। लेकिन अगर ज़िंदगी में कोई चुनौती नहीं है, तो फिर इसमें मज़ा भी नहीं है।' यह टिप्पणी सहवाग के उस जीवन-दर्शन को उजागर करती है जो उनके खेल में भी झलकता था।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनका यह कहना कि वे 'नकारात्मक माहौल में भी खेले हैं' उस मानसिक परिपक्वता को उजागर करता है जिसे अक्सर उनकी चमकदार पारियों की आँधी में भुला दिया जाता है। मनोरंजन जगत में उनका यह कदम एक बड़ी प्रवृत्ति का हिस्सा है — जहाँ खेल की दिग्गज हस्तियाँ रियलिटी टेलीविज़न पर अपनी एक नई पहचान बना रही हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या 'नजफगढ़ के नवाब' की पहचान 'राइज एंड फॉल' के मंच पर एक नया अध्याय लिख पाती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वीरेंद्र सहवाग ने अपनी बल्लेबाज़ी शैली के बारे में क्या कहा?
सहवाग ने स्पष्ट किया कि वे हमेशा आक्रामक नहीं खेलते थे — उन्होंने रक्षात्मक और नकारात्मक माहौल में भी बल्लेबाज़ी की है। उनका कहना है कि मैच की परिस्थितियों और ज़रूरत के अनुसार वे अपनी शैली बदलते थे।
'राइज एंड फॉल' सीज़न 2 में सहवाग की क्या भूमिका है?
वीरेंद्र सहवाग 'राइज एंड फॉल' के दूसरे सीज़न में होस्ट हैं। पहले सीज़न में अशनीर ग्रोवर ने यह ज़िम्मेदारी निभाई थी।
'राइज एंड फॉल' रियलिटी शो का फॉर्मेट क्या है?
इस शो में 15 प्रतियोगी 42 दिनों तक सत्ता, रणनीति और गठजोड़ पर आधारित खेल में भाग लेते हैं। प्रतियोगियों को 'रूलर्स' और 'वर्कर्स' में बाँटा जाता है, और दूसरे सीज़न में दर्शकों को भी यह तय करने की शक्ति दी गई है कि कौन 'रूलर' बनेगा।
सहवाग ने शो के प्रतियोगियों को संभालने के बारे में क्या कहा?
सहवाग ने कहा कि उनके क्रिकेट करियर का अनुभव उन्हें अलग-अलग स्वभाव के लोगों को समझने में मदद करेगा। उन्होंने बताया कि किसी को प्यार से, किसी को डाँटकर और किसी के साथ सख़्ती से भी पेश आना पड़ सकता है।
सहवाग-तेंदुलकर की सलामी जोड़ी को क्यों याद किया जाता है?
सहवाग और सचिन तेंदुलकर अपने दौर की सबसे विस्फोटक सलामी जोड़ियों में गिने जाते थे। दोनों ने मिलकर टीम इंडिया को कई बार शानदार शुरुआत दिलाई और जीत की नींव रखी।
राष्ट्र प्रेस
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