क्या भूख का न लगना स्वास्थ्य बिगड़ने का संकेत है? जानिए आयुर्वेद की दृष्टि
सारांश
Key Takeaways
- भूख का न लगना स्वास्थ्य बिगड़ने का संकेत हो सकता है।
- यह पाचन शक्ति के कमजोर होने का संकेत है।
- तनाव और चिंता का असर भूख पर पड़ता है।
- आयुर्वेद में भूख को स्वास्थ्य का आधार माना जाता है।
- भोजन से पहले अदरक और नींबू का प्रयोग लाभकारी हो सकता है।
नई दिल्ली, १ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अक्सर हम अपनी दैनिक दिनचर्या में यह कहकर टाल देते हैं कि आज भूख नहीं है, बाद में खा लेंगे। कभी-कभी चाय पीकर काम चला लेते हैं, कभी भोजन छोड़ देते हैं और कभी भूख के बिना ही मजबूरी में खा लेते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार, भूख का न लगना कोई साधारण समस्या नहीं है।
यह शरीर का प्रारंभिक अलार्म होता है, जो संकेत देता है कि भीतर कहीं न कहीं संतुलन बिगड़ रहा है। यदि समय पर इस संकेत को समझ लिया जाए, तो बड़ी समस्याओं से बचा जा सकता है।
आयुर्वेद में भूख को केवल खाने की इच्छा नहीं माना गया है। यह पाचन शक्ति का सीधा संकेत है। जब अग्नि सही होती है, तो समय पर भूख लगती है, भोजन ठीक से पचता है और शरीर को सही ऊर्जा मिलती है। जब भूख कम हो जाती है या बिल्कुल खत्म हो जाती है, तो इसका मतलब है कि पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। यह स्थिति आगे चलकर अपच, गैस, भारीपन और थकान जैसी समस्याओं को जन्म देती है।
आज की अनियमित जीवनशैली भूख के बिगड़ने का सबसे बड़ा कारण बन गई है। कभी देर से खाना, कभी बार-बार कुछ न कुछ खाते रहना, देर रात भारी भोजन करना और तनाव या चिंता में खाना – ये सभी आदतें धीरे-धीरे पाचन को नुकसान पहुंचाती हैं। जब पाचन ठीक से काम नहीं करता, तो भोजन अधपचा रह जाता है। आयुर्वेद इसे 'आम' कहता है, जो शरीर में जमा होकर कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है।
भूख न लगने पर सबसे बड़ी गलती हम यह करते हैं कि जबरदस्ती खाना शुरू कर देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, बिना भूख के खाया गया भोजन शरीर के लिए लाभकारी नहीं होता। ऐसा भोजन न तो सही तरीके से पचता है और न ही शरीर को पूरा पोषण देता है। इसके विपरीत, इससे पेट में भारीपन, सुस्ती और बेचैनी बढ़ जाती है, जिससे भूख और भी दब जाती है।
भूख और मन का भी गहरा संबंध है। लगातार तनाव, डर, चिंता या उदासी में रहने से भूख अपने-आप कम हो जाती है। वहीं, भूख न लगने से मन और ज्यादा अस्थिर हो जाता है। इस तरह मन और शरीर एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं और समस्या बढ़ती जाती है। इसलिए आयुर्वेद सिर्फ भोजन ही नहीं, बल्कि मन की शांति को भी आवश्यक मानता है।
आयुर्वेद में कहा गया है कि यदि भूख सही है, तो आधा स्वास्थ्य सही है। इसी कारण भूख को लौटाना इलाज की पहली सीढ़ी मानी जाती है। पाचन को जगाने के लिए सरल उपाय भी सुझाए गए हैं, जैसे भोजन से कुछ समय पहले अदरक, नींबू और सेंधा नमक का हल्का प्रयोग। यह पाचन को सक्रिय करने में सहायक होता है, हालाँकि इसे इलाज का विकल्प नहीं समझना चाहिए।