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क्या उज्जायी प्राणायाम कफ-वात को संतुलित करने और पाचन अग्नि जाग्रत करने में सहायक है?

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क्या उज्जायी प्राणायाम कफ-वात को संतुलित करने और पाचन अग्नि जाग्रत करने में सहायक है?

सारांश

उज्जायी प्राणायाम एक अद्भुत श्वास तकनीक है, जो कफ और वात को संतुलित करने में मदद करती है। इसके नियमित अभ्यास से पाचन अग्नि जाग्रत होती है और मानसिक शांति प्राप्त होती है। जानें कैसे यह प्राणायाम आपके स्वास्थ्य को लाभ पहुंचा सकता है!

मुख्य बातें

उज्जायी प्राणायाम कफ और वात को संतुलित करता है।
यह पाचन अग्नि को जाग्रत करता है।
मानसिक तनाव को कम करने में सहायक है।
गले और थायराइड क्षेत्र को सक्रिय रखता है।
नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास में सुधार होता है।

नई दिल्ली, 1 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अक्सर हम योग और प्राणायाम को मात्र शारीरिक व्यायाम मान लेते हैं, लेकिन कुछ विशेष श्वास तकनीकें होती हैं जो शरीर के भीतर गहराई से प्रभाव डालती हैं। उज्जायी प्राणायाम भी उनमें से एक है। इसे करते समय गले से निकलने वाली हल्की समुद्र जैसी आवाज इसकी विशेष पहचान है। यही वजह है कि इसे ओशन ब्रीथ भी कहा जाता है।

आयुर्वेद के अनुसार, उज्जायी केवल सांस लेने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह कफ और वात को संतुलित करने और पाचन अग्नि को जाग्रत करने वाला एक प्रभावी प्राणायाम माना जाता है।

आयुर्वेद में स्वास्थ्य की मूल आधार पाचन को माना गया है। यदि जठराग्नि सही है, तो शरीर कई रोगों से अपने आप को बचा सकता है। उज्जायी प्राणायाम श्वास को धीमा, गहरा और नियंत्रित बनाता है, जिससे शरीर के भीतर हल्की गर्मी उत्पन्न होती है। यही आंतरिक गर्मी पाचन अग्नि को सक्रिय करती है। जो लोग बार-बार अपच, गैस, भारीपन या भूख कम लगने की समस्या से ग्रस्त हैं, उनके लिए उज्जायी प्राणायाम बहुत सहायक हो सकता है।

कफ और वात दोष आज की जीवनशैली में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। कफ बढ़ने पर आलस्य, जकड़न, बलगम और सर्दी-जुकाम जैसी समस्याएं होती हैं, जबकि वात बिगड़ने पर गैस, बेचैनी, अनिद्रा और घबराहट बढ़ जाती है। उज्जायी प्राणायाम श्वास-प्रश्वास को संतुलित कर इन दोनों दोषों को संतुलित करने में मदद करता है। गले और छाती के क्षेत्र में हल्का घर्षण कफ को ढीला करता है और वात को स्थिर करता है।

इस प्राणायाम का प्रभाव केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन पर भी गहरा असर डालता है। उज्जायी करते समय ध्यान अपने आप सांस की आवाज पर केंद्रित हो जाता है। इससे मन भटकता नहीं और तनाव में धीरे-धीरे कमी आने लगती है। जो लोग जल्दी घबरा जाते हैं या नींद की समस्या का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह प्राणायाम अत्यधिक लाभकारी माना जाता है। यह तंत्रिका तंत्र को शांत करता है और शरीर को विश्राम की अवस्था में ले जाता है।

उज्जायी का एक महत्वपूर्ण लाभ गले और थायराइड क्षेत्र पर भी देखा जाता है। गले से होकर नियंत्रित सांस का आना-जाना इस हिस्से को सक्रिय रखता है। आयुर्वेद और योग में इसे विशुद्धि चक्र से जोड़ा गया है, जो अभिव्यक्ति, संतुलन और शुद्धता का केंद्र माना जाता है। नियमित अभ्यास से आवाज में स्पष्टता और आत्मविश्वास में सुधार देखने को मिलता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि मानसिक तनाव को भी कम करता है। आज के तनावपूर्ण जीवन में, इस प्राणायाम को अपनाने से न केवल व्यक्तित्व में निखार आता है, बल्कि यह समग्र स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद सिद्ध होता है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उज्जायी प्राणायाम क्या है?
उज्जायी प्राणायाम एक विशेष श्वास तकनीक है, जिसमें गले से हल्की ध्वनि के साथ श्वास ली जाती है। यह कफ और वात को संतुलित करने में मदद करती है।
क्या उज्जायी प्राणायाम से पाचन में सुधार होता है?
हाँ, उज्जायी प्राणायाम पाचन अग्नि को जाग्रत करता है और अपच जैसी समस्याओं को कम करने में सहायक होता है।
क्या यह प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है?
जी हाँ, यह प्राणायाम तनाव को कम करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
उज्जायी प्राणायाम करने का सही समय क्या है?
सुबह का समय या ध्यान के समय इसे करना सबसे फायदेमंद होता है।
क्या सभी लोग इसे कर सकते हैं?
हाँ, यह प्राणायाम सभी उम्र के लोग कर सकते हैं, लेकिन यदि आपको कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो पहले डॉक्टर से परामर्श लें।
राष्ट्र प्रेस
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