उज्जायी प्राणायाम से होता है भीतरी उपचार, जानें इस शक्तिशाली श्वास तकनीक के अद्भुत फायदे
सारांश
Key Takeaways
- उज्जायी प्राणायाम में गले को हल्का संकुचित कर धीमी, गहरी और सरसराहट भरी सांस ली जाती है।
- यह तकनीक थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक दबाव बनाकर उसके कार्य को बेहतर बनाती है।
- पाचन तंत्र में ऑक्सीजन की बेहतर आपूर्ति से गैस, अपच और भारीपन में राहत मिलती है।
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और रक्त संचार सुधरता है, जिससे शरीर अधिक ऊर्जावान रहता है।
- लयबद्ध श्वास से तंत्रिका तंत्र शांत होता है और तनाव, चिंता व अनिद्रा में कमी आती है।
- गर्भवती महिलाओं और हृदय रोगियों को इसे विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उज्जायी प्राणायाम योग की एक ऐसी श्वास तकनीक है जो शरीर के भीतर से उपचार करने की क्षमता रखती है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन केवल कुछ मिनट इस अभ्यास को दिनचर्या में शामिल करने से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर गहरा सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, पाचन समस्याओं और थायरॉयड विकारों के बीच यह प्राचीन योग तकनीक एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर रही है।
क्या है उज्जायी प्राणायाम और कैसे करें
उज्जायी प्राणायाम में गले के पिछले हिस्से को हल्का सा संकुचित करते हुए धीमी, गहरी और हल्की सरसराहट की आवाज के साथ सांस ली और छोड़ी जाती है। इस प्रक्रिया में सांस की लय नियंत्रित और स्थिर रहती है। प्रारंभ में यह तकनीक थोड़ी असामान्य लग सकती है, किंतु नियमित अभ्यास से यह अत्यंत सहज हो जाती है।
इसे किसी शांत स्थान पर सुखासन या पद्मासन में बैठकर किया जाता है। सांस को जबरदस्ती नहीं खींचना चाहिए — प्रवाह स्वाभाविक और आरामदायक रहना चाहिए। यदि अभ्यास के दौरान चक्कर या असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाना चाहिए।
पाचन तंत्र और थायरॉयड पर प्रभाव
उज्जायी प्राणायाम का नियमित अभ्यास पाचन तंत्र को सुदृढ़ बनाता है। गहरी और नियंत्रित श्वास से पेट के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होती है, जिससे गैस, अपच और भारीपन जैसी सामान्य समस्याओं में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
इसके साथ ही, गले के क्षेत्र में बनने वाला हल्का दबाव थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग हाइपोथायरॉयडिज्म या हाइपरथायरॉयडिज्म जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह प्राणायाम सहायक हो सकता है — हालांकि चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
हृदय और फेफड़ों को मिलता है विशेष लाभ
धीमी और गहरी श्वास क्रिया से फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है। हृदय को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है, जिससे रक्त संचार सुचारू होता है और शरीर ऊर्जावान बना रहता है। दीर्घकालिक अभ्यास से रक्तचाप को संतुलित रखने में भी सहायता मिल सकती है।
गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) भी श्वास-आधारित व्यायाम को हृदय स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानता है। इस संदर्भ में उज्जायी प्राणायाम की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है।
तनाव और मानसिक स्वास्थ्य पर असर
उज्जायी प्राणायाम का सर्वाधिक महत्वपूर्ण लाभ मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में देखा जाता है। इसकी लयबद्ध श्वास क्रिया तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को शांत करती है और कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में सहायक होती है।
आधुनिक शोधों में पाया गया है कि नियमित प्राणायाम अभ्यास चिंता, अवसाद और अनिद्रा जैसी समस्याओं में राहत दे सकता है। यह मन को एकाग्र करने और ध्यान की गहराई बढ़ाने में भी प्रभावी है।
किसे सावधानी बरतनी चाहिए
यद्यपि उज्जायी प्राणायाम अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, फिर भी गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के रोगियों और गंभीर हृदय रोगियों को इसे किसी प्रशिक्षित योग गुरु की देखरेख में ही करना चाहिए। सांस को कभी भी जबरदस्ती नहीं रोकना चाहिए।
आने वाले समय में जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) नजदीक आ रहा है, स्वास्थ्य विशेषज्ञ नागरिकों को उज्जायी प्राणायाम जैसी सरल किंतु प्रभावशाली तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।