उज्जायी प्राणायाम से होता है भीतरी उपचार: जानें इस योग तकनीक के 5 बड़े फायदे
सारांश
Key Takeaways
- उज्जायी प्राणायाम गले को हल्का संकुचित करते हुए गहरी, लयबद्ध श्वास लेने की एक प्राचीन योग तकनीक है।
- यह थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव डालता है — भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड विकार से पीड़ित हैं।
- पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और गैस, अपच जैसी समस्याओं में राहत देता है।
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है, रक्त संचार सुधारता है और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
- तनाव और चिंता को कम करता है; तंत्रिका तंत्र को शांत कर मानसिक एकाग्रता बढ़ाता है।
- प्रतिदिन 10 से 15 मिनट सुबह खाली पेट अभ्यास करना सर्वाधिक लाभकारी माना जाता है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उज्जायी प्राणायाम योग विज्ञान की एक अत्यंत प्रभावशाली श्वास तकनीक है, जो शरीर को भीतर से उपचारित करने की क्षमता रखती है। यह तकनीक न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है, बल्कि मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करती है। आधुनिक जीवनशैली की भागदौड़ में जहां तनाव और बीमारियां आम हो गई हैं, वहां उज्जायी प्राणायाम एक सरल लेकिन गहरे असर वाला समाधान बनकर उभरा है।
क्या है उज्जायी प्राणायाम और कैसे करें?
उज्जायी प्राणायाम में गले के पिछले हिस्से को हल्का सा संकुचित करते हुए धीरे-धीरे और गहराई से सांस ली और छोड़ी जाती है। इस प्रक्रिया में सांस के साथ एक हल्की सी समुद्री लहर जैसी आवाज उत्पन्न होती है, इसीलिए इसे 'ओशन ब्रीथ' भी कहा जाता है। शुरुआत में यह तकनीक थोड़ी अपरिचित लग सकती है, लेकिन नियमित अभ्यास से यह बेहद सहज और स्वाभाविक हो जाती है।
योग विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्राणायाम को सुखासन या पद्मासन में बैठकर सुबह के समय खाली पेट करना सबसे अधिक लाभकारी होता है। प्रतिदिन केवल 10 से 15 मिनट का अभ्यास भी उल्लेखनीय परिणाम दे सकता है।
पाचन तंत्र और थायरॉयड पर सकारात्मक प्रभाव
उज्जायी प्राणायाम पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गहरी और नियंत्रित श्वास से पेट के अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होती है, जिससे गैस, अपच और पेट की भारीपन जैसी आम समस्याओं में राहत मिलती है।
इसके साथ ही, गले पर पड़ने वाला हल्का दबाव थायरॉयड ग्रंथि को सक्रिय और संतुलित रखने में सहायक माना जाता है। थायरॉयड संबंधी विकारों से पीड़ित लोगों के लिए यह प्राणायाम विशेष रूप से उपयोगी है। भारत में अनुमानित 4.2 करोड़ लोग थायरॉयड की किसी न किसी समस्या से ग्रस्त हैं, और ऐसे में यह योग तकनीक एक प्राकृतिक सहायक उपाय के रूप में देखी जा रही है।
हृदय और फेफड़ों को मिलती है नई ऊर्जा
उज्जायी प्राणायाम हृदय और फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। धीमी और गहरी श्वास से फेफड़ों की कार्यक्षमता में वृद्धि होती है और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। इससे रक्त संचार बेहतर होता है और शरीर अधिक ऊर्जावान अनुभव करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित प्राणायाम अभ्यास रक्तचाप को नियंत्रित रखने और हृदय रोगों के जोखिम को कम करने में भी सहायक हो सकता है। यह उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो डेस्क जॉब करते हैं और शारीरिक गतिविधि कम होने के कारण श्वसन संबंधी समस्याओं का सामना करते हैं।
तनाव और चिंता से मुक्ति का प्राकृतिक मार्ग
उज्जायी प्राणायाम का सबसे महत्वपूर्ण लाभ मानसिक स्वास्थ्य पर इसका गहरा प्रभाव है। इसकी लयबद्ध और नियंत्रित श्वास तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को शांत करती है और मस्तिष्क में अल्फा तरंगों को सक्रिय करती है, जो विश्राम और एकाग्रता की अवस्था से जुड़ी होती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद से भारत में मानसिक तनाव और चिंता के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में उज्जायी प्राणायाम जैसी तकनीकें बिना किसी दुष्प्रभाव के मन को शांत करने का एक प्रभावी विकल्प प्रदान करती हैं।
सावधानियां और विशेषज्ञ की सलाह
यह प्राणायाम करते समय कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सांस को कभी जबरदस्ती नहीं खींचना चाहिए — श्वास स्वाभाविक और आरामदायक होनी चाहिए। यदि अभ्यास के दौरान चक्कर, सिरदर्द या किसी प्रकार की असहजता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं और सामान्य श्वास लें।
उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गंभीर श्वसन समस्याओं से पीड़ित व्यक्तियों को किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की देखरेख में ही इस प्राणायाम का अभ्यास करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी इसे अपनाने से पहले विशेषज्ञ परामर्श लेना चाहिए।
जैसे-जैसे भारत में योग और आयुर्वेद के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, उज्जायी प्राणायाम जैसी पारंपरिक तकनीकें वैश्विक स्तर पर भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर इस वर्ष भी देशभर में लाखों लोगों के इस तकनीक को अपनाने की उम्मीद है।