उज्जायी प्राणायाम के 5 चमत्कारी फायदे: थायरॉयड से लेकर तनाव तक, अंदर से होता है उपचार
सारांश
Key Takeaways
- उज्जायी प्राणायाम में गले को हल्का संकुचित कर नाक से धीमी, गहरी और सांस की हल्की ध्वनि के साथ श्वास ली जाती है।
- यह तकनीक थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक दबाव डालती है और उसके कार्य को संतुलित करने में सहायक है।
- पाचन तंत्र में ऑक्सीजन की बेहतर आपूर्ति से गैस, अपच और भारीपन जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- फेफड़ों की क्षमता और रक्त संचार में सुधार होता है, जिससे हृदय को भी लाभ मिलता है।
- नर्वस सिस्टम को शांत कर तनाव, चिंता और मानसिक अशांति को कम करने में यह प्राणायाम प्रभावी है।
- प्रतिदिन केवल ५ से १० मिनट के अभ्यास से कुछ ही सप्ताहों में स्वास्थ्य में स्पष्ट सुधार महसूस किया जा सकता है।
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। उज्जायी प्राणायाम योग की एक अत्यंत प्रभावशाली श्वास तकनीक है, जो न केवल शरीर को भीतर से उपचारित करती है, बल्कि मन को भी स्थिर और शांत बनाती है। शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में यह प्राणायाम उन लोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो प्रतिदिन केवल कुछ मिनट योग अभ्यास के लिए निकाल सकते हैं।
उज्जायी प्राणायाम क्या है और इसे कैसे करें
उज्जायी प्राणायाम में गले के पिछले हिस्से को हल्का सा संकुचित करते हुए धीमी, गहरी और हल्की ध्वनि के साथ सांस ली और छोड़ी जाती है। इस प्रक्रिया में उत्पन्न होने वाली हल्की सरसराहट की आवाज़ इसे अन्य प्राणायामों से अलग बनाती है। शुरुआती अभ्यासियों को यह थोड़ा असामान्य लग सकता है, परंतु नियमित अभ्यास से यह क्रिया पूरी तरह सहज हो जाती है।
इस तकनीक में सांस हमेशा नाक के माध्यम से लेनी और छोड़नी होती है। सांस को जबरदस्ती नहीं खींचना चाहिए — यह स्वाभाविक, लयबद्ध और आरामदायक होनी चाहिए। यदि अभ्यास के दौरान चक्कर या किसी प्रकार की असहजता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाना चाहिए।
पाचन तंत्र और थायरॉयड पर सकारात्मक प्रभाव
उज्जायी प्राणायाम का नियमित अभ्यास पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है। गहरी और नियंत्रित श्वास क्रिया से पेट के आंतरिक अंगों तक ऑक्सीजन की आपूर्ति बेहतर होती है, जिससे गैस, अपच और पेट में भारीपन जैसी सामान्य समस्याओं में उल्लेखनीय राहत मिलती है।
इसके साथ ही, यह प्राणायाम गले और थायरॉयड ग्रंथि पर भी सीधा प्रभाव डालता है। गले के क्षेत्र में उत्पन्न होने वाला हल्का दबाव थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करता है और उसके कार्य को संतुलित करने में सहायक माना जाता है। थायरॉयड की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह प्राणायाम विशेष रूप से लाभकारी बताया जाता है।
हृदय और फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि
उज्जायी प्राणायाम हृदय और फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। धीमी और गहरी श्वास प्रक्रिया से फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ती है और हृदय को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है। इससे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और व्यक्ति अधिक ऊर्जावान अनुभव करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग हृदय संबंधी हल्की समस्याओं से ग्रस्त हैं, उनके लिए चिकित्सक की सलाह से इस प्राणायाम का अभ्यास करना दीर्घकालिक लाभ दे सकता है।
तनाव और चिंता से मुक्ति
आधुनिक जीवनशैली में तनाव और मानसिक चिंता एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। उज्जायी प्राणायाम की लयबद्ध श्वास क्रिया नर्वस सिस्टम को शांत करती है और मस्तिष्क में शांति का संचार करती है। यह प्राणायाम मन को एकाग्र करने में सहायक है और ध्यान के अभ्यास के साथ इसे करने पर इसका प्रभाव और अधिक गहरा होता है।
अध्ययनों से संकेत मिलता है कि नियमित प्राणायाम अभ्यास कोर्टिसोल (तनाव हार्मोन) के स्तर को कम करने में सहायक हो सकता है, जिससे नींद की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
किन बातों का रखें ध्यान
उज्जायी प्राणायाम का अभ्यास हमेशा खाली पेट या भोजन के कम से कम दो से तीन घंटे बाद करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं, उच्च रक्तचाप के रोगियों और गंभीर हृदय रोग से पीड़ित लोगों को इसे किसी योग विशेषज्ञ की देखरेख में ही करना चाहिए।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रतिदिन केवल ५ से १० मिनट भी इस प्राणायाम का अभ्यास किया जाए, तो कुछ ही सप्ताहों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में स्पष्ट बदलाव महसूस होने लगता है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) से पहले इस तकनीक को अपनी दिनचर्या में शामिल करना एक सार्थक पहल हो सकती है।