संसद चलो मार्च हिंसा: NIA जांच की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली हाईकोर्ट ने 24 जुलाई 2026 को 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किस एजेंसी को जांच सौंपी जाए, यह तय करना इस स्तर पर न्यायालय का काम नहीं है।
अदालत का रुख
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा, 'याचिका में जांच की मांग की गई है, जबकि जांच की प्रक्रिया एफआईआर दर्ज होने के बाद ही शुरू होती है। किस एजेंसी को जांच सौंपी जाएगी, यह पूरी तरह संबंधित अधिकारियों के विवेकाधिकार का विषय है और फिलहाल न्यायालय इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा।' अदालत ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वे अपनी मांग संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष रख सकते हैं।
याचिकाकर्ता की दलीलें
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने तर्क दिया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए इसे NIA या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए। वकील ने यह भी कहा कि 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया, सड़कें जाम रहीं, कार्यालय प्रभावित हुए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। इसी आधार पर उन्होंने दिल्ली पुलिस से विस्तृत स्थिति रिपोर्ट (स्टेटस रिपोर्ट) तलब करने का अनुरोध भी किया।
स्टेटस रिपोर्ट की मांग भी ठुकराई
हाईकोर्ट ने स्टेटस रिपोर्ट की माँग को भी स्वीकार करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि मामले में दो-तीन दिन पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और कानून के अनुसार जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। जब जांच शुरू हो चुकी है तो इस स्तर पर स्थिति रिपोर्ट दाखिल कराने का कोई औचित्य नहीं बनता।
सीबीआई और अन्य एजेंसियों पर अदालत की टिप्पणी
हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि CBI जैसी एजेंसी को जांच सौंपने का निर्णय आमतौर पर प्राथमिक जांच एजेंसी की प्रगति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। अदालत ने कहा कि यदि भविष्य में परिस्थितियाँ ऐसी बनती हैं कि किसी अन्य एजेंसी की ज़रूरत महसूस हो, तो उस पर संबंधित प्राधिकारी निर्णय ले सकते हैं — फिलहाल वह स्थिति नहीं आई है।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट ने भरोसा जताया कि संबंधित एजेंसियाँ कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगी और मामले की जांच आगे बढ़ाएंगी। गौरतलब है कि 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई हिंसा को लेकर राजनीतिक और कानूनी विवाद जारी है, और यह मामला आने वाले दिनों में उच्च न्यायालय के समक्ष फिर आ सकता है।