बंगाल चुनाव बाद हिंसा रोकने की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार, कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की सलाह

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
बंगाल चुनाव बाद हिंसा रोकने की याचिका: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार, कलकत्ता हाईकोर्ट जाने की सलाह

सारांश

सर्वोच्च न्यायालय ने बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद केंद्रीय बलों की तैनाती और निगरानी समिति गठन की माँग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। पीठ ने साफ कहा — पहले कलकत्ता हाईकोर्ट जाएँ। मुख्य याचिका 11 मई को सुनी जाएगी।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में केंद्रीय बल तैनाती की माँग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया।
याचिका सनातन संस्था ने दाखिल की थी; वरिष्ठ अधिवक्ता वी.
गिरि ने 2021 की चुनाव-पश्चात हिंसा का हवाला दिया।
पीठ ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी।
चुनाव आयोग ने कहा — मतगणना के बाद कानून-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि ऐसे निर्णय राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।
मुख्य याचिका पर विस्तृत सुनवाई 11 मई को निर्धारित है।

सर्वोच्च न्यायालय ने 4 मई 2026 को पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणामों के बाद संभावित हिंसा को रोकने के लिए केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिकाकर्ता को पहले कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह दी। यह याचिका सनातन संस्था की ओर से दाखिल की गई थी।

याचिका में क्या मांग की गई थी

सनातन संस्था की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरि ने पीठ के समक्ष दलील दी कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद पश्चिम बंगाल में व्यापक हिंसा हुई थी और इस बार भी चुनाव परिणामों के बाद वैसी ही स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है। इसी के मद्देनज़र पहले से केंद्रीय बलों की तैनाती और सुरक्षा व्यवस्था को मज़बूत करने की माँग की गई।

याचिकाकर्ता ने यह भी अनुरोध किया कि पूरे हालात पर निगाह रखने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के किसी पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित की जाए, ताकि किसी भी संभावित गड़बड़ी या हिंसा को समय रहते रोका जा सके।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

पीठ ने इस दलील से सहमति नहीं जताई। अदालत ने स्पष्ट कहा कि ऐसे मामलों में पहले संबंधित उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाना चाहिए, क्योंकि वही इस स्तर पर अधिक उपयुक्त मंच है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के मामलों में निर्णय राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका को लेना होता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार यह समझेगी कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी संवैधानिक ज़िम्मेदारी है। अदालत ने अंतरिम आवेदन के ज़रिए माँगी गई तत्काल राहत देने से इनकार करते हुए मामले को कलकत्ता उच्च न्यायालय भेज दिया।

चुनाव आयोग की दलील

सुनवाई के दौरान भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने तर्क दिया कि मतदान और मतगणना की प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है। उनके अनुसार, चुनाव पश्चात कानून-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी पूर्णतः राज्य सरकार पर आ जाती है।

आगे की सुनवाई कब

याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इस विषय पर मुख्य याचिका पहले से ही दाखिल है। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उक्त मुख्य याचिका 11 मई को सूचीबद्ध है और उसी दिन विस्तृत सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत ने किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि 11 मई की सुनवाई में पीठ राज्य सरकार और केंद्र से क्या जवाब माँगती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

संस्थागत जवाबदेही की एक बड़ी खाई को उजागर करता है। मुख्य याचिका पर 11 मई की सुनवाई यह तय करेगी कि न्यायपालिका इस खाई को पाटने में कोई भूमिका निभाने को तैयार है या नहीं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल में केंद्रीय बल तैनाती की याचिका पर सुनवाई क्यों नहीं की?
सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में पहले संबंधित उच्च न्यायालय का रुख करना उचित है। पीठ ने याचिकाकर्ता को कलकत्ता उच्च न्यायालय जाने की सलाह दी और तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया।
यह याचिका किसने और क्यों दाखिल की थी?
यह याचिका सनातन संस्था ने दाखिल की थी। संस्था की दलील थी कि 2021 के विधानसभा चुनावों के बाद बंगाल में हिंसा हुई थी और इस बार भी चुनाव परिणामों के बाद वैसी स्थिति बन सकती है, इसलिए पहले से केंद्रीय बलों की तैनाती ज़रूरी है।
चुनाव आयोग ने इस मामले में क्या कहा?
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्रि नायडू ने कहा कि मतदान और मतगणना प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोग की भूमिका समाप्त हो जाती है और चुनाव पश्चात कानून-व्यवस्था की ज़िम्मेदारी राज्य सरकार की होती है।
इस मामले में आगे की सुनवाई कब होगी?
सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मुख्य याचिका 11 मई को सूचीबद्ध है और उसी दिन विस्तृत सुनवाई होगी। फिलहाल अदालत ने किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने इस मामले में क्या टिप्पणी की?
जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि इस प्रकार के मामलों में निर्णय राज्य की राजनीतिक कार्यपालिका को लेना होता है, न कि न्यायालय को। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने उम्मीद जताई कि राज्य सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपनी ज़िम्मेदारी समझेगी।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 सप्ताह पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 5 महीने पहले