21 जुलाई 2026
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'चलो संसद' प्रदर्शन में 12 वर्षीय बच्ची के घायल होने के दावे पर NHRC सक्रिय, दिल्ली पुलिस और सरकार को नोटिस

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'चलो संसद' प्रदर्शन में 12 वर्षीय बच्ची के घायल होने के दावे पर NHRC सक्रिय, दिल्ली पुलिस और सरकार को नोटिस

सारांश

'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान 12 वर्षीय बच्ची के कथित घायल होने की शिकायत पर NHRC ने दिल्ली पुलिस, राज्य सरकार और IT मंत्रालय को नोटिस जारी किए। साथ ही सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाने के आरोपों की जांच और कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

मुख्य बातें

NHRC ने 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान 12 वर्षीय बच्ची के कथित घायल होने पर 20 जुलाई 2026 को स्वतः संज्ञान लिया।
दिल्ली पुलिस आयुक्त , दिल्ली सरकार के WCD सचिव और केंद्रीय IT मंत्रालय के सचिव को 2 सप्ताह में ATR सौंपने का निर्देश।
अधिकारियों को बच्ची को तुरंत सुरक्षित कर बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत करने और किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई का आदेश।
पत्रकार सौरव दास द्वारा एक्स पर साझा जानकारी गलत पाई जाने पर उनके व प्लेटफॉर्म के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के निर्देश।
दिल्ली पुलिस ने एक्स पर फैक्ट-चेक पोस्ट जारी कर बच्ची के घायल होने और 40-50 अन्य लोगों के घायल होने के दावों को गलत बताया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने नई दिल्ली में हुए 'चलो संसद' विरोध प्रदर्शन के दौरान एक 12 वर्षीय बच्ची के कथित रूप से घायल होने की शिकायत पर 20 जुलाई 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर 'की गई कार्रवाई की रिपोर्ट' (ATR) सौंपने का निर्देश दिया है।

मुख्य घटनाक्रम

आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने तीन प्रमुख अधिकारियों को नोटिस जारी किए — दिल्ली सरकार के समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, और दिल्ली पुलिस आयुक्त। यह कार्रवाई मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत शुरू की गई है।

शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोमवार को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों को खतरे में डाला गया और 12 वर्षीय एक लड़की के सिर में गंभीर चोट लगी। आयोग ने पाया कि ये आरोप प्रथम दृष्टया बच्चे के मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े प्रतीत होते हैं।

NHRC के निर्देश

आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे तुरंत बच्ची को सुरक्षित करें, आवश्यक चिकित्सा सुनिश्चित करें और उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत करें। साथ ही, बच्ची को प्रदर्शन स्थल पर लाने वाले व्यक्ति की पहचान कर किशोर न्याय अधिनियम के तहत उचित कार्रवाई करने को कहा गया।

यदि किसी अधिकारी द्वारा बच्ची के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आता है, तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

गलत सूचना पर कार्रवाई के निर्देश

शिकायत में पत्रकार सौरव दास द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा की गई जानकारी को भी चुनौती दी गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि यह जानकारी गलत या भ्रामक हो सकती है। NHRC ने निर्देश दिया कि यदि जांच में यह जानकारी गलत पाई जाती है, तो सौरव दास और संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विरुद्ध तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए।

इस बीच, दिल्ली पुलिस ने एक्स पर एक फैक्ट-चेक पोस्ट जारी कर स्पष्ट किया: "यह जानकारी गलत है। पोस्ट में किए जा रहे दावे सच नहीं हैं। कृपया गलत या गुमराह करने वाली जानकारी न फैलाएं और न ही उसे आगे बढ़ाएं।" पुलिस ने यह भी खारिज किया कि प्रदर्शन के दौरान 40 से 50 अन्य लोगों के सिर में चोटें आई थीं।

NHRC सदस्य का बयान

प्रियंक कानूनगो ने इस मामले पर कहा, "हमें एक शिकायत मिली कि सौरव दास नाम के व्यक्ति ने अपने एक्स हैंडल के जरिए दावा किया कि 12 साल की एक लड़की को पीटा गया, उसके बाल पकड़कर घसीटा गया और उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। यह घटना गंभीर लगती है और हमने इस मामले का तुरंत संज्ञान लिया है।"

उन्होंने आगे कहा, "12 साल की बच्ची को विरोध प्रदर्शन में कौन लाया? पहला कदम उसकी पहचान करना और उसे सुरक्षित बाहर निकालना होना चाहिए।" कानूनगो ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सौरव दास गलत जानकारी फैलाकर अशांति पैदा करने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं, तो उनके विरुद्ध तुरंत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

किशोर न्याय अधिनियम का पहलू

कानूनगो ने यह भी रेखांकित किया कि नाबालिग को विरोध प्रदर्शन में लाना किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 और 75 का उल्लंघन है। उन्होंने कहा, "अगर कोई व्यक्ति इस तरह से किसी नाबालिग को विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर लाता है, तो उसे गंभीर कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और जेल भी जाना पड़ सकता है।"

गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सोशल मीडिया पर प्रदर्शनों से जुड़ी सूचनाओं की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय बहस तेज है। आयोग की दो सप्ताह की समयसीमा में आने वाली ATR यह तय करेगी कि आगे की कार्रवाई किस दिशा में जाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह तभी प्रभावी होगा जब ATR में ठोस तथ्य सामने आएँ। दिल्ली पुलिस का फैक्ट-चेक और शिकायतकर्ता के दावे परस्पर विरोधी हैं; जब तक स्वतंत्र जांच नहीं होती, दोनों पक्षों की विश्वसनीयता अधर में है। किशोर न्याय अधिनियम के उल्लंघन का पहलू महत्वपूर्ण है — यह पहली बार नहीं है जब प्रदर्शनों में बच्चों की भागीदारी पर सवाल उठे हैं, पर जवाबदेही शायद ही कभी तय हुई है।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'चलो संसद' प्रदर्शन में बच्ची के घायल होने पर NHRC ने क्या कदम उठाए?
NHRC ने 20 जुलाई 2026 को स्वतः संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त, दिल्ली सरकार के WCD सचिव और केंद्रीय IT मंत्रालय के सचिव को नोटिस जारी किए। आयोग ने दो सप्ताह के भीतर ATR माँगी है और बच्ची को तुरंत सुरक्षित कर CWC के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है।
दिल्ली पुलिस ने बच्ची के घायल होने के दावों पर क्या कहा?
दिल्ली पुलिस ने एक्स पर फैक्ट-चेक पोस्ट जारी कर स्पष्ट किया कि 12 वर्षीय बच्ची के घायल होने और 40-50 अन्य लोगों के सिर में चोट लगने के दावे गलत हैं। पुलिस ने नागरिकों से भ्रामक जानकारी न फैलाने की अपील की।
सौरव दास के खिलाफ NHRC ने क्या निर्देश दिए?
NHRC ने निर्देश दिया कि यदि पत्रकार सौरव दास द्वारा एक्स पर साझा की गई जानकारी जांच में गलत या भ्रामक पाई जाती है, तो उनके और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के विरुद्ध तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए। यह निर्देश दो सप्ताह की ATR समयसीमा के साथ जुड़ा है।
किशोर न्याय अधिनियम के तहत प्रदर्शन में नाबालिग को लाना क्यों अपराध है?
किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 और 75 के तहत किसी नाबालिग को ऐसे स्थान पर ले जाना जहाँ उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती हो, दंडनीय अपराध है। NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो के अनुसार, इस उल्लंघन में दोषी व्यक्ति को गंभीर कानूनी परिणाम और जेल तक का सामना करना पड़ सकता है।
NHRC ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम की किस धारा के तहत कार्रवाई की?
NHRC ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत कार्रवाई शुरू की है, जो आयोग को मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन की स्वतंत्र जांच करने का अधिकार देती है। आयोग ने पाया कि आरोप प्रथम दृष्टया बच्चे के मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित हैं।
राष्ट्र प्रेस
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