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भ्रामरी प्राणायाम: गुस्से और तनाव को शांत करने का प्राचीन श्वास अभ्यास, जानें सही तरीका

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भ्रामरी प्राणायाम: गुस्से और तनाव को शांत करने का प्राचीन श्वास अभ्यास, जानें सही तरीका

सारांश

भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी बातों पर उबलता गुस्सा अब एक आम समस्या बन चुका है। भ्रामरी प्राणायाम — जिसमें भौंरे जैसी गुनगुनाहट से सांस छोड़ी जाती है — मन को भीतर की ओर केंद्रित कर तनाव और क्रोध को शांत करने में सहायक माना जाता है। जानें इसकी सही विधि और सावधानियाँ।

मुख्य बातें

भ्रामरी प्राणायाम में सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी 'हम्म्...' की ध्वनि निकाली जाती है, जो मन को शांत करने में सहायक मानी जाती है।
काम का दबाव, नींद की कमी और मानसिक तनाव के कारण बार-बार गुस्सा आना इस अभ्यास के प्रमुख संकेत हैं।
अभ्यास के लिए सुखासन में बैठें, कान बंद करें और नाक से गहरी सांस लेकर गुनगुनाते हुए धीरे-धीरे छोड़ें।
नियमित अभ्यास से तनाव, चिंता में कमी और एकाग्रता में सुधार की संभावना बताई जाती है।
नाक या कान में संक्रमण होने पर यह अभ्यास न करें; किसी स्वास्थ्य समस्या में विशेषज्ञ की सलाह अनिवार्य है।

आधुनिक जीवन की भागदौड़, काम का बोझ, नींद की कमी और लगातार बढ़ता मानसिक दबाव अक्सर हमारे स्वभाव को प्रभावित करता है। भ्रामरी प्राणायाम एक पारंपरिक योग श्वास तकनीक है जो गुस्से और चिंता को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती है। इस अभ्यास में सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी गुनगुनाहट की ध्वनि निकाली जाती है, जिससे मन को भीतर की ओर केंद्रित करने में मदद मिलती है।

भ्रामरी प्राणायाम क्या है और इसका नाम कैसे पड़ा

संस्कृत में 'भ्रामरी' शब्द का अर्थ है भौंरा। इस प्राणायाम में जब सांस बाहर छोड़ी जाती है, तब 'हम्म्...' की एक गहरी गूंज उत्पन्न होती है जो भौंरे की आवाज से मिलती-जुलती है — इसी कारण इसे यह नाम दिया गया है। यह अभ्यास ध्यान और सांस दोनों को एक साथ साधता है, जिससे मन रोजमर्रा की परेशानियों से कुछ देर के लिए अलग हो जाता है।

गुस्से पर नियंत्रण में कैसे सहायक है यह अभ्यास

जब किसी छोटी बात पर भी अचानक तेज़ गुस्सा आ जाए, तो तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुककर भ्रामरी प्राणायाम का अभ्यास करना मन को स्थिर करने में सहायक हो सकता है। धीमी और नियंत्रित श्वास पर ध्यान केंद्रित करने से शरीर को रिलैक्स होने का संकेत मिलता है। यह व्यक्ति को अपनी भावनाओं पर ठहरकर सोचने का अवसर भी देता है।

भ्रामरी प्राणायाम करने का सही तरीका

किसी शांत और आरामदायक स्थान पर सुखासन की स्थिति में बैठें। कमर और गर्दन सीधी रखें। इसके बाद:

दोनों अंगूठों से कान बंद करें, पहली उंगली माथे पर और शेष उंगलियां आंखों पर हल्के से रखें। नाक से लंबा और गहरा श्वास लें। सांस छोड़ते समय 'हम्म्...' की गूंज करते हुए धीरे-धीरे श्वास बाहर निकालें। आवाज और सांस दोनों पर ध्यान बनाए रखें। इसे अपनी क्षमता के अनुसार कई बार दोहराया जा सकता है।

नियमित अभ्यास के संभावित लाभ

योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित योग दिनचर्या में भ्रामरी प्राणायाम को शामिल करने से तनाव और चिंता को कम करने, मन को शांत रखने तथा एकाग्रता और विचारों में स्पष्टता लाने में मदद मिल सकती है। कुछ अभ्यासकर्ता इसे मानसिक रूप से रिलैक्स करने वाला अनुभव भी बताते हैं। गौरतलब है कि यह प्राचीन तकनीक आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों के बीच तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है।

सावधानियाँ और विशेषज्ञ सलाह

इस अभ्यास के दौरान शरीर पर अनावश्यक जोर नहीं देना चाहिए। यदि नाक या कान में संक्रमण अथवा किसी प्रकार की परेशानी हो, तो भ्रामरी प्राणायाम न करें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में अथवा अभ्यास को लेकर असमंजस होने पर किसी योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना उचित रहेगा। यह अभ्यास पेशेवर चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बड़े पैमाने पर नैदानिक अध्ययनों की अभी भी कमी है — एक तथ्य जिसे मुख्यधारा की स्वास्थ्य कवरेज अक्सर नज़रअंदाज़ करती है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि योग-आधारित हस्तक्षेप पेशेवर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का विकल्प नहीं हैं, और गंभीर क्रोध या चिंता विकारों में चिकित्सकीय परामर्श अनिवार्य है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भ्रामरी प्राणायाम क्या है और यह कैसे काम करता है?
भ्रामरी प्राणायाम एक योग श्वास तकनीक है जिसमें सांस छोड़ते समय भौंरे जैसी 'हम्म्...' की गूंज निकाली जाती है। यह ध्वनि और धीमी श्वास मिलकर मन को बाहरी विचारों से हटाकर भीतर की ओर केंद्रित करती है, जिससे तनाव और क्रोध कम होने में मदद मिल सकती है।
भ्रामरी प्राणायाम करने का सही तरीका क्या है?
शांत जगह पर सुखासन में बैठें, कमर और गर्दन सीधी रखें। दोनों अंगूठों से कान बंद करें, पहली उंगली माथे पर और शेष उंगलियां आंखों पर रखें। नाक से गहरी सांस लें और 'हम्म्...' की गूंज करते हुए धीरे-धीरे सांस बाहर छोड़ें। इसे अपनी क्षमता के अनुसार कई बार दोहराएं।
क्या भ्रामरी प्राणायाम गुस्से को तुरंत शांत कर सकता है?
जब अचानक तेज़ गुस्सा आए, तो तत्काल प्रतिक्रिया देने के बजाय कुछ पल रुककर भ्रामरी का अभ्यास करना मन को स्थिर करने में सहायक हो सकता है। यह भावनाओं पर ठहरकर सोचने का अवसर देता है, हालाँकि परिणाम व्यक्ति-दर-व्यक्ति भिन्न हो सकते हैं।
भ्रामरी प्राणायाम किन लोगों को नहीं करना चाहिए?
नाक या कान में किसी प्रकार का संक्रमण या परेशानी होने पर भ्रामरी प्राणायाम नहीं करना चाहिए। किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में अथवा अभ्यास को लेकर असमंजस होने पर योग विशेषज्ञ या चिकित्सक की सलाह लेना आवश्यक है।
भ्रामरी प्राणायाम के नियमित अभ्यास से क्या फायदे हो सकते हैं?
नियमित अभ्यास से तनाव और चिंता कम करने, मन को शांत रखने तथा एकाग्रता और विचारों में स्पष्टता लाने में मदद मिल सकती है। कुछ अभ्यासकर्ता इसे मानसिक रूप से रिलैक्स करने वाला अनुभव भी बताते हैं, हालाँकि यह पेशेवर चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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