क्या आप ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या दिल की समस्याओं से परेशान हैं? जानें इस पेड़ की छाल के बारे में
सारांश
Key Takeaways
- अर्जुन की छाल हृदय को ताकत देती है।
- यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करती है।
- कोलेस्ट्रॉल का स्तर संतुलित रखती है।
- हड्डियों और घावों के लिए भी फायदेमंद है।
- सेवन करने के आसान तरीके मौजूद हैं।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। क्या आप ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल या दिल से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं? तो आपको जानकर खुशी होगी कि आयुर्वेद में एक प्राकृतिक उपाय है, जो कई लोगों के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। यह है अर्जुन का पेड़, जिसकी छाल को 'हृदय-बल्य' यानी हृदय को शक्ति देने वाली औषधि कहा जाता है।
अर्जुन का पेड़ भारत में लगभग हर जगह पाया जाता है, खासकर नदियों, तालाबों और जल स्रोतों के पास। इसकी छाल में ऐसे शक्तिशाली गुण हैं जो हृदय की मांसपेशियों को मज़बूत बनाते हैं, रक्त प्रवाह को संतुलित करते हैं और धड़कन को नियमित रखने में मदद करते हैं।
अर्जुन की छाल ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में सहायक है। इसके नियमित सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी संतुलित रहता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है। आयुर्वेद में इसे हृदय की शक्ति बढ़ाने और हृदय रोगों से सुरक्षा करने वाली सबसे प्रभावी औषधियों में से एक माना गया है। इसके अलावा, यह छाल एंटीऑक्सीडेंट और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती है, जो विषैले तत्वों को बाहर निकालने और रक्त को साफ करने में मदद करती है।
केवल दिल ही नहीं, अर्जुन की छाल हड्डियों और घावों के लिए भी लाभकारी है। इसका लेप हड्डियों के फ्रैक्चर, सूजन या घावों पर लगाने से राहत देता है। इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण सूजन और दर्द को कम करने में सहायक होते हैं। दस्त, पेचिश और मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं में भी इसका काढ़ा उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा, खांसी, अस्थमा और सांस की तकलीफ जैसी समस्याओं में भी अर्जुन की छाल का काढ़ा या चूर्ण राहत प्रदान करता है।
अर्जुन का सेवन करना बहुत आसान है। इसकी छाल का काढ़ा, दूध में उबालकर पीना या चूर्ण का उपयोग करना - ये सभी तरीके हृदय और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं। सुबह और शाम इसका सेवन करने से दिल मजबूत होता है और शरीर स्वस्थ रहता है। हालांकि, सावधानी बरतना आवश्यक है। ज्यादा मात्रा में सेवन करने से ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे चिकित्सक की सलाह से ही लेना चाहिए।