क्या राजस्थान की रेत में सेब की खेती संभव है? सीकर की बेटी को राष्ट्रपति भवन में मिल रहा सम्मान!
सारांश
Key Takeaways
- महिला किसान संतोष देवी ने सेब की खेती में सफलता पाई।
- राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस समारोह के लिए आमंत्रण प्राप्त किया।
- उन्होंने रसायनों के बिना खेती की है।
- संतोष देवी ने अपनी मेहनत से आर्थिक स्वतंत्रता हासिल की है।
- उनका सफर महिला सशक्तीकरण का प्रतीक है।
सीकर, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। राजस्थान के सीकर जिले के बेरी गांव की प्रगतिशील महिला किसान संतोष देवी को गणतंत्र दिवस समारोह में शामिल होने के लिए राष्ट्रपति भवन से विशेष आमंत्रण प्राप्त हुआ है। यह निमंत्रण दिल्ली आने के लिए भेजा गया है, जिससे न केवल बेरी गांव बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी खुशी और गर्व का माहौल है।
यह आमंत्रण डाक के माध्यम से प्राप्त हुआ, जिसकी खबर मिलते ही पूरे इलाके में इसकी चर्चा शुरू हो गई। राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस के विशेष कार्यक्रम में देशभर से ऐसे विशिष्ट लोगों को आमंत्रित किया जाता है, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय और प्रेरणादायक कार्य किए हों।
बेरी गांव की निवासी संतोष देवी ने खेती के क्षेत्र में नवाचार और कड़ी मेहनत के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई है। विशेष रूप से अनार की खेती में किए गए उनके प्रयोगों ने उन्हें जिले ही नहीं, बल्कि प्रदेश स्तर पर भी पहचान दिलाई है। उनके चयन को महिला सशक्तीकरण और किसानों के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।
गांववासियों और परिजनों ने संतोष देवी को इस उपलब्धि पर बधाई दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सम्मान पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है और इससे अन्य महिला किसानों को भी आगे बढ़ने और कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी।
प्रगतिशील महिला किसान संतोष देवी ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत में अपनी खुशी साझा करते हुए बताया कि तीन दिन पहले राष्ट्रपति भवन से आमंत्रण मिला, जिसके बाद से वह बेहद उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हो रहा है कि 17 साल की मेहनत और संघर्ष का आज फल मिला है। यह आमंत्रण सिर्फ उनका नहीं, बल्कि उन सभी भाई-बहनों का सम्मान है, जिन्होंने उनके सफर में साथ दिया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। संतोष देवी ने बताया कि उन्होंने अनार, सेब और अमरूद सहित विभिन्न फलों की खेती में नवाचार किए हैं और पूरी तरह से बिना रसायन के खेती की है।
उन्होंने बताया कि उनके द्वारा उगाए गए अनार का वजन करीब 800 ग्राम तक और सेब का वजन लगभग 200 ग्राम तक पहुंचता है। आमतौर पर यह माना जाता है कि राजस्थान में सेब की खेती संभव नहीं है, लेकिन उन्होंने इसे कर दिखाया।
संतोष देवी का मानना है कि महिलाओं को केवल चूल्हा-चौका तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें बाहर निकलकर आत्मनिर्भर बनना चाहिए। उनके प्रयासों से हजारों महिलाएं बागवानी के जरिए आमदनी कर रही हैं। इसके साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सक्रिय रहती हैं और हर साल किसानों की मदद से करीब 80 हजार पौधे लगवाती हैं।
संतोष देवी ने रसायनों के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि आज के दौर में किसान खेती में रसायनों का प्रयोग कर जहर डालने जैसा काम कर रहे हैं, जिसका फसलों और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ता है। अक्सर किसान नहीं चाहते कि उनके बच्चे खेती करें, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को एग्रीकल्चर में बीएससी करवाया है, ताकि वह भविष्य में उनके साथ मिलकर खेती को आगे बढ़ा सके।
उन्होंने कहा कि खेती को घाटे का सौदा बताने वालों को उन्होंने अपने काम से गलत साबित किया है। उनके अनुसार, उनके पति की कभी आमदनी मात्र तीन हजार रुपए थी, जबकि आज वे खुद इसी खेती से करीब 40 हजार रुपए की कमाई कर रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2016-17 में उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया गया था और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।