भारत-सऊदी अरब संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचेंगे, पश्चिम एशिया संकट में संपर्क अहम: नामित राजदूत विपुल
सारांश
मुख्य बातें
भारत के नामित राजदूत विपुल ने कहा है कि भारत और सऊदी अरब के बीच 'ऐतिहासिक, विशेष और रणनीतिक संबंध' हैं, और पश्चिम एशिया में जारी संकट के मद्देनज़र दोनों देशों का निरंतर संपर्क में बने रहना अत्यंत आवश्यक है। अरब न्यूज़ को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने यह बात सऊदी अरब में भारतीय दूतावास का कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व कही।
नियुक्ति और पृष्ठभूमि
विदेश मंत्रालय (MEA) ने 2 जून को विपुल को सऊदी अरब में भारत का राजदूत नियुक्त किया था। फिलहाल वे कतर में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत हैं और शीघ्र ही नया कार्यभार संभालेंगे। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी, इस पर उन्हें गर्व और सम्मान का अनुभव हो रहा है।
द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती
विपुल ने कहा, 'हमारा रिश्ता ऐतिहासिक है, खास है और निश्चित रूप से रणनीतिक भी है।' उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों देशों के हित कई मामलों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप काउंसिल के अंतर्गत नियमित मंत्रिस्तरीय बैठकें होती रहती हैं, और राजनीतिक स्तर पर भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया: 'आने वाले वर्षों में हमारे रिश्ते और आगे बढ़ेंगे और नई ऊंचाइयों को छुएंगे। पिछले एक दशक में हमारे संबंधों में काफी मजबूती आई है।'
पश्चिम एशिया संकट और भारत की भूमिका
नामित राजदूत ने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति 'पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय' है। ऐसे में भारत और सऊदी अरब का संपर्क में बने रहना बेहद महत्वपूर्ण है। क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने में दोनों देशों की साझा भूमिका पर उन्होंने कहा, 'हमारे देशों के नेताओं के बीच लगातार संपर्क बना हुआ है। क्षेत्र में स्थिरता होना बहुत जरूरी है और भारत के लिए विकास सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकता है।'
मोदी और क्राउन प्रिंस के बीच संवाद
28 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की थी। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा की और समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर सहमति जताई। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर लिखा था, 'हमने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा की। मैंने क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे पर हुए हमलों की भारत की ओर से निंदा दोहराई।' उन्होंने सऊदी अरब में रह रहे भारतीय समुदाय के कल्याण के लिए मिले सहयोग पर क्राउन प्रिंस का आभार भी व्यक्त किया।
संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह क्षेत्रीय तनाव 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद भड़का था। रिपोर्टों के अनुसार इन हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आई थीं। इसके जवाब में ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी और इजरायली ठिकानों, क्षेत्रीय राजधानियों और उनके सहयोगी बलों को निशाना बनाते हुए ड्रोन और मिसाइल हमले किए थे। यह ऐसे समय में आया है जब भारत की ऊर्जा सुरक्षा और प्रवासी कल्याण दोनों ही इस क्षेत्र की स्थिरता पर सीधे निर्भर हैं। आने वाले महीनों में नामित राजदूत विपुल की कूटनीतिक सक्रियता इस जटिल परिदृश्य में भारत की स्थिति को और स्पष्ट करेगी।