बिहार के विपुल बनेंगे सऊदी अरब में भारत के अगले राजदूत, सुहैल एजाज खान की लेंगे जगह
सारांश
मुख्य बातें
कतर में भारत के मौजूदा राजदूत विपुल को सऊदी अरब में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया गया है। 1998 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी विपुल, मौजूदा राजदूत डॉ. सुहैल एजाज खान का स्थान लेंगे, जो 2023 से रियाद में सेवारत हैं और कार्यकाल पूरा होने के बाद जल्द ही भारत लौटेंगे।
विपुल का राजनयिक करियर
बिहार मूल के विपुल ने अपनी राजनयिक सेवा के दौरान काहिरा, कोलंबो, जिनेवा और दुबई स्थित भारतीय मिशनों में अहम भूमिकाएँ निभाई हैं। राजनीति, व्यापार, विकास, निरस्त्रीकरण, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और मीडिया जैसे क्षेत्रों में उनके अनुभव को विदेश मंत्रालय में महत्वपूर्ण माना जाता है।
विदेश मंत्रालय में उन्होंने 2014 से 2017 तक निदेशक/संयुक्त सचिव और 2017 से 2020 तक दुबई में भारत के महावाणिज्यदूत के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद 2020 से 2023 तक वे विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (खाड़ी क्षेत्र) के पद पर रहे — यानी सऊदी अरब और खाड़ी देशों से जुड़े मामलों का उन्हें सीधा अनुभव है।
कतर से रियाद तक का सफर
विपुल ने 17 अगस्त 2023 को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के समक्ष भारतीय राजदूत के रूप में अपना परिचय पत्र प्रस्तुत किया था। शैक्षणिक रूप से उन्होंने 1994 में IIT दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि ली और बाद में इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB), हैदराबाद से एमबीए किया।
सुहैल एजाज खान का कार्यकाल
मध्य प्रदेश मूल के डॉ. सुहैल एजाज खान 2023 से रियाद में भारत के राजदूत के रूप में कार्यरत हैं। उनके कार्यकाल में भारत-सऊदी रिश्तों में ऊर्जा, निवेश और रणनीतिक संवाद के स्तर पर कई अहम पड़ाव देखे गए।
भारत-सऊदी संबंधों का रणनीतिक महत्व
भारत और सऊदी अरब के संबंध ऐतिहासिक, रणनीतिक और बहुआयामी हैं। ऊर्जा, व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, प्रौद्योगिकी और लोगों के आपसी संपर्क इन रिश्तों के मुख्य स्तंभ हैं। सऊदी अरब भारत के प्रमुख ऊर्जा साझेदारों में से एक है, और भारत अपनी तेल व गैस आवश्यकताओं का एक बड़ा हिस्सा वहाँ से आयात करता है।
गौरतलब है कि दोनों देशों के बीच रिश्तों को 2010 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिला, और बाद में 'स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप काउंसिल' की स्थापना से द्विपक्षीय सहयोग को संस्थागत स्वरूप मिला। हाल के वर्षों में निवेश, बुनियादी ढाँचा, नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा तेज़ी से बढ़ा है।
आगे क्या
विपुल की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब भारत और सऊदी अरब के बीच निवेश और ऊर्जा सुरक्षा पर बातचीत निर्णायक चरण में है। खाड़ी क्षेत्र में उनके पूर्व अनुभव को देखते हुए कूटनीतिक हलकों में उम्मीद है कि रियाद में उनका कार्यकाल द्विपक्षीय एजेंडे को और गति देगा।