बोगनवेलिया: न केवल सुंदरता, बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर पौधा
सारांश
Key Takeaways
- बोगनवेलिया एक औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है।
- इसके फूल, पत्ते और तने सभी स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।
- यह पौधा कम देखभाल में उगाया जा सकता है।
नई दिल्ली, २५ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब बोगनवेलिया का नाम सुनते हैं, तो ज्यादातर लोगों के मन में नारंगी, सफेद और गुलाबी रंग के खूबसूरत फूलों वाला पौधा आता है। यह न सिर्फ देखने में मनमोहक होता है, बल्कि इसमें कई औषधीय गुण भी मौजूद हैं।
आयुर्वेद में बोगनवेलिया को विशेष महत्व दिया गया है। इसके फूलों के साथ-साथ जड़ और तने के हर भाग का उपयोग विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान में किया जाता है।
बिहार सरकार के पर्यावरण एवं वन विभाग के अनुसार, यह पौधा केवल सजावट के लिए नहीं, बल्कि औषधीय उपयोग के लिए भी महत्वपूर्ण है। इसके फूल, पत्तियां और तना पारंपरिक और आयुर्वेदिक चिकित्सा में लाभकारी साबित होते हैं। बोगनवेलिया निक्टैजिनेसी परिवार का हिस्सा है और यह भारत के साथ-साथ दक्षिण अमेरिका में भी बाग-बगीचों, घरों और सड़कों के किनारे पाया जाता है। इसके चमकीले फूल लाल, गुलाबी, बैंगनी, नारंगी, सफेद और पीले रंग में खिलते हैं, जो इसे और भी आकर्षक बनाते हैं।
पर्यावरण एवं वन विभाग ने बताया कि बोगनवेलिया के विभिन्न हिस्सों का उपयोग पारंपरिक चिकित्सा में सदियों से किया जाता रहा है। इसके फूलों में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं। इनका काढ़ा या चाय बनाकर पीने से खांसी, सर्दी-जुकाम और गले की खराश में राहत मिलती है। पत्तियों का रस या काढ़ा पाचन तंत्र को मजबूत करने और कब्ज दूर करने में सहायक माना जाता है।
तने और छाल का भी उपयोग होता है। तने से निकलने वाला रस या काढ़ा ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में सहायक होता है। आयुर्वेदिक ग्रंथों और लोक चिकित्सा में बोगनवेलिया को सूजन, बुखार और त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए भी उपयोगी बताया गया है।
एक खास बात यह है कि बोगनवेलिया एक ऐसा पौधा है जो आसानी से उगता है, कम पानी की आवश्यकता होती है और इसकी देखभाल भी आसान है। यह धूप में अच्छी तरह विकसित होता है और सूखे की स्थिति में भी खिलता रहता है।