क्या ब्रेन फॉग दिल की बीमारी का संकेत है? जानें वैज्ञानिक कारण
सारांश
Key Takeaways
- ब्रेन फॉग दिमाग की थकान की स्थिति है।
- दिल और दिमाग के बीच गहरा संबंध है।
- दिल की कमजोरी दिमाग की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।
- समय पर जांच कराना आवश्यक है।
- छोटे बदलाव आपके दिल की सेहत में बड़ा फर्क ला सकते हैं।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। आज की तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी में, लोग अक्सर थकान, तनाव और भूलने की आदत को सामान्य समस्याएँ मान लेते हैं। लेकिन, कभी-कभी यह सिर्फ मानसिक थकान नहीं होती, बल्कि यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है। कई चिकित्सक मानते हैं कि बार-बार ध्यान भटकना, नाम भूलना या दिमाग का भारी लगना केवल दिमाग की कमजोरी नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है।
हार्ट डिजीज हमेशा सीने में दर्द या सांस फूलने के लक्षणों के माध्यम से नहीं आती। कई बार यह धीरे-धीरे दिमाग के लक्षणों के जरिए प्रकट होती है।
ब्रेन फॉग उस स्थिति को कहते हैं जब आपको चीजें याद नहीं रहतीं, सोचने में कठिनाई होती है, और आप खुद को थोड़ा सुस्त महसूस करते हैं। लोग इसे अक्सर उम्र बढ़ने या तनाव का प्रभाव मानकर नज़रअंदाज कर देते हैं।
दिमाग और दिल के बीच गहरा संबंध है। जब दिल सही ढंग से काम करता है, तो दिमाग भी सही तरीके से कार्य करता है और जब दिल कमजोर होता है, तो दिमाग भी थक जाता है। यही कारण है कि ब्रेन फॉग केवल दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। इसे पहचानना, जांच कराना और समय पर इलाज शुरू करना अत्यंत आवश्यक है।
चिकित्सकों का कहना है कि यह केवल सतही कमजोरी नहीं होती, बल्कि कई मामलों में दिमाग तक पहुँचने वाले ब्लड सर्कुलेशन में कमी का कारण बन सकती है। जब दिल ठीक से रक्त पंप नहीं करता, तो दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषण नहीं मिल पाता, जिससे मेमोरी, फोकस, और सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है।
जनरल ऑफ सेरेब्रल ब्लड फ्लो एंड मेटाबॉलिज्म में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, दिल की हल्की कमजोरी भी दिमाग तक रक्त प्रवाह को कम कर सकती है। इसका प्रभाव सीधे याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। यदि आप अक्सर भूलते हैं, ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते या सोचने में सुस्ती महसूस करते हैं, तो यह केवल दिमाग की समस्या नहीं, बल्कि दिल की चेतावनी भी हो सकती है।
ऐसे में अपने दिल की जांच कराएँ। छोटे-छोटे बदलाव जैसे ब्लड प्रेशर, हार्ट रेट या ब्लड फ्लो का निरीक्षण करना आपके लिए बड़े लाभ ला सकता है।