बिहार: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन थावे मंदिर में भक्तों ने किया तंत्र और वैदिक साधना

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बिहार: चैत्र नवरात्रि के पहले दिन थावे मंदिर में भक्तों ने किया तंत्र और वैदिक साधना

सारांश

थावे मंदिर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। मंदिर में तंत्र और वैदिक साधना के अनुष्ठान हो रहे हैं, और श्रद्धालु मां दुर्गा के दर्शन के लिए उत्सुक हैं।

Key Takeaways

  • थावे मंदिर एक प्रमुख शक्तिपीठ है।
  • यहां भक्त तंत्र साधना और वैदिक साधना करते हैं।
  • चैत्र नवरात्रि में भक्तों की भारी भीड़ होती है।
  • मंदिर की स्थापना का इतिहास दिलचस्प है।
  • सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।

गोपालगंज, 19 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित थावे मंदिर एक प्रमुख और जागृत शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध है। यह मंदिर मां दुर्गा के 'थावे वाली माता' या 'सिंहासिनी देवी' रूप को समर्पित है, जहां श्रद्धालु नारियल, चुनरी और पेड़ा अर्पित कर मन्नतें मांगते हैं। यहां साल भर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्रि के दौरान विशेष रौनक देखने को मिलती है।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, गुरुवार को थावे दुर्गा मंदिर में मंगला आरती के बाद मां सिंहासन का दरबार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। सुबह से ही परिसर मां के जयकारों से गूंजने लगा। भक्तों की कतार मंगला आरती के समय से ही लग गई थी। भक्त माला-फूल, नारियल-चुनरी और प्रसाद के साथ सिंहासन मंदिर पहुंचे और श्रद्धाभाव से शीश झुकाते दिखे।

नेपाल, यूपी और बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों की आस्था को गर्मी भी प्रभावित नहीं कर सकी। भक्तों का कदम गर्भगृह की ओर दिनभर बढ़ता रहा।

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संजय पांडेय ने बताया कि मां के दर्शन मात्र से ही रोग, शोक और कष्ट का नाश होता है। सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। थावे दुर्गा मंदिर की स्थापना की कहानी भी दिलचस्प है। कहा जाता है कि चेरो वंश के राजा मनन सिंह के राज में अकाल पड़ा। भक्त रहषु लोगों को बाघ से दौनी कर चावल देना शुरू कर दिया। जब यह खबर राजा तक पहुंची, तो उन्होंने विश्वास नहीं किया। राजा ने रहषु का विरोध किया और उसे पाखंडी कहा।

रहषु ने राजा से कहा कि यदि माता यहां आईं तो वह राज्य का नाश कर देंगी। रहषु के आह्वान पर देवी मां कामरूप कामाख्या से चलकर पटना और सारण के आमी होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंचीं। माता ने रहषु का मस्तक चीरकर कंगन का दर्शन कराया, जिसके बाद जिद्दी राजा की सभी इमारतें ढह गईं और राजा की मृत्यु हो गई। इस मंदिर में भक्त रहषु की भी प्रतिमा है, जहां मां की पूजा के बाद पूजा करने जाते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, मां सिंहासिनी के दरबार में सतचंडी, सप्तशती और विभिन्न अनुष्ठानों की शुरुआत संकल्प के साथ हो गई है। सैकड़ों आचार्य और पुजारी वेद मंत्रों का उच्चारण कर रहे हैं। दूर-दूर से आए साधकों ने भी अपना अनुष्ठान आरंभ कर दिया है। यहां तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना तक की जा रही है। नवरात्रि के दौरान सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध भी किए गए हैं। थावे में मां सिंहासिनी के दर्शन के लिए रात दो बजे से ही भक्तों की कतार लग गई थी। मंदिर के पट खुलते ही प्रशासन के अधिकारियों ने भीड़ को नियंत्रित किया। सुरक्षित दंडाधिकारी के रूप में BDO अजय प्रकाश राय और थानाध्यक्ष विभा कुमारी मंदिर के प्रवेश द्वार पर मौजूद रहे।

Point of View

NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

थावे मंदिर कहाँ स्थित है?
थावे मंदिर बिहार के गोपालगंज जिले में स्थित है।
थावे वाली माता कौन हैं?
थावे वाली माता मां दुर्गा के एक रूप हैं, जिन्हें सिंहासिनी देवी भी कहा जाता है।
चैत्र नवरात्रि में थावे मंदिर में क्या विशेष होता है?
चैत्र नवरात्रि के दौरान यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है, और विशेष तंत्र एवं वैदिक साधना की जाती है।
क्या थावे मंदिर में सुरक्षा के प्रबंध किए गए हैं?
जी हां, नवरात्रि के दौरान सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं।
थावे मंदिर की स्थापना की कहानी क्या है?
थावे मंदिर की स्थापना की कहानी चेरो वंश के राजा मनन सिंह के समय की है, जब मां दुर्गा भक्त रहषु के आह्वान पर इस स्थान पर आईं।
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