जर्मनी में पेट्रोल की कीमतों पर नियंत्रण के लिए अनोखा उपाय
सारांश
Key Takeaways
- जर्मनी में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
- संसद ने अनोखा 'हाई नून रूल' अपनाने का निर्णय लिया है।
- कीमतें केवल दोपहर 12 बजे बढ़ाई जा सकेंगी।
- नियम का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना होगा।
- उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।
बर्लिन, १९ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम एशिया में हाल के संकट के कारण तेल के बाजार में जो तेज उछाल आया है, उसका प्रभाव अब यूरोप में साफ नजर आ रहा है। जर्मनी में बढ़ती ईंधन कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए संसद ने एक अनोखा कदम उठाने की योजना बनाई है।
जर्मनी के 'बुंडेस्टैग' में आज एक प्रस्तावित कानून को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिसके अनुसार पेट्रोल पंप केवल एक बार—दोपहर १२ बजे—कीमतें बढ़ा सकेंगे। हालांकि, कीमतें किसी भी समय घटाई जा सकती हैं। इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर १ लाख यूरो तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इस नियम के लागू होने पर पेट्रोल पंपों पर दोपहर से ठीक पहले लंबी कतारें देखी जा सकती हैं, क्योंकि उपभोक्ता बढ़ती कीमतों से बचने के लिए पहले से ईंधन भरवाने का प्रयास करेंगे।
अमेरिका-इजराइल सैन्य कार्रवाई के बाद, जर्मनी उन यूरोपीय देशों में से एक है जहाँ ईंधन की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि हुई है। यूरोपीय आयोग के आंकड़ों के अनुसार, कार्रवाई से पहले के सप्ताह की तुलना में पेट्रोल की कीमतों में २७ सेंट प्रति लीटर और डीजल में ४२ सेंट प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि यूरोपीय औसत—पेट्रोल के लिए २० सेंट और डीजल के लिए ३६ सेंट प्रति लीटर—से कहीं अधिक है।
जर्मनी सरकार को सलाह देने वाली स्वतंत्र आर्थिक संस्था 'मोनोपॉलकोमिशन' द्वारा संकलित आंकड़ों से स्पष्ट है कि देश के उपभोक्ता इस वैश्विक तेल संकट का सबसे अधिक बोझ उठा रहे हैं।
सोशल डेमोक्रेट्स पार्लियामेंट्री ग्रुप के डिप्टी चेयर आर्मंड जोर्न ने उद्योग पर लाभ कमाने का आरोप लगाया है। उन्होंने बिल्ड अखबार को बताया, "जर्मनी में हमें सप्लाई की समस्या नहीं है, लेकिन मूल्य निर्धारण में स्पष्ट समस्या है।" जोर्न ने कहा कि शायद ही किसी अन्य यूरोपीय देश में संकट के दौरान उपभोक्ताओं की कीमतों पर इतना बड़ा लाभ कमाया गया हो।
'हाई नून रूल' (१२ बजे वाला नियम) (बुंडेसरात यानी ऊपरी सदन से पास होने के बाद लागू होगा) के संबंध में लोगों की राय विभाजित है। फेडरेशन ऑफ जर्मन इंडस्ट्रीज (बीडीआई) ने एंटी-ट्रस्ट कानून को सख्त बनाने की आलोचना की है।