क्या डबल चिन चेहरे की खूबसूरती को प्रभावित कर रही है? जानें योग से कैसे पा सकते हैं छुटकारा

सारांश
Key Takeaways
- सिंहासन और उष्ट्रासन चेहरे को टोन करने में मदद करते हैं।
- जालंधर बंध ठुड्डी की एक्सरसाइज के लिए उत्तम है।
- योग से डबल चिन को कम किया जा सकता है।
- थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करने वाले आसन वजन नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।
- नियमित योगाभ्यास से समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है।
नई दिल्ली, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान में, बहुत से लोग अपने बढ़ते वजन के साथ-साथ डबल चिन की समस्या से परेशान हैं। यह न केवल आपकी खूबसूरती को प्रभावित करती है, बल्कि आपकी सेहत और जीवनशैली का भी प्रतिबिंब होती है। बदलती जीवनशैली, लगातार एक ही स्थिति में बैठना, मोटापा और उम्र का बढ़ना... ये सभी डबल चिन के मुख्य कारण बनते जा रहे हैं। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर आप थोड़ी मेहनत करें और नियमित रूप से कुछ विशेष योगासन अपनाएं, तो इस समस्या से आसानी से मुक्त हो सकते हैं।
सिंहासन: इसे चेहरे के लिए सबसे लाभकारी योगासन माना जाता है। इस आसन में जब आप मुंह खोलकर जीभ बाहर निकालते हैं, तो चेहरे, जबड़े और गले की मांसपेशियों में गहरा खिंचाव आता है। यह खिंचाव डबल चिन के नीचे जमे फैट को तोड़ने में मदद करता है। साथ ही, इससे गले के आसपास का रक्त संचार तेज होता है, जिससे उस हिस्से की कोशिकाएं अधिक सक्रिय होती हैं और चर्बी पिघलने लगती है। नियमित अभ्यास से यह न केवल डबल चिन को कम करता है, बल्कि पूरे चेहरे को टोन करने में भी मदद करता है।
उष्ट्रासन: इस आसन में शरीर की मुद्रा ऊंट के समान होती है, जिसमें शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है। यह विशेष रूप से गले और छाती पर प्रभाव डालता है। जब आप पीछे की ओर झुकते हैं और गर्दन को ढीला छोड़ते हैं, तब ठुड्डी और गले में खिंचाव आता है, जो उस हिस्से की चर्बी को कम करने में बहुत प्रभावी होता है। यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को भी सक्रिय करता है, जिससे मेटाबॉलिज्म तेज होता है और फैट बर्न होने लगता है।
जालंधर बंध: यह हठ योग की एक क्रिया है। इस क्रिया के दौरान जब आप ठुड्डी को छाती से मिलाते हैं और सांस को कुछ समय के लिए रोकते हैं, तब गले के नीचे की मांसपेशियों पर दबाव बनता है। यह दबाव वहां की मांसपेशियों को मजबूत करता है और चर्बी को गलाने का कार्य करता है। यह दरअसल ठुड्डी की एक्सरसाइज होती है, जो डबल चिन को कम करने में मदद करती है।
सर्वांगासन: इसे योग का राजा माना जाता है। इसमें शरीर को उल्टा किया जाता है और पूरा भार कंधों पर होता है। इस आसन में ठुड्डी को छाती से सटाकर रखा जाता है, जिससे गले की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। साथ ही, यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को उत्तेजित करता है, जिससे हार्मोन संतुलित होते हैं और वजन तेजी से नियंत्रित होता है। जब वजन घटता है, तो इसका सीधा असर चेहरे और ठुड्डी पर भी पड़ता है।
मत्स्यासन: इस आसन में शरीर की स्थिति एक मछली के समान होती है, जिसमें छाती ऊपर और सिर पीछे होता है। इस स्थिति में गले और ठुड्डी के आसपास की मांसपेशियां पूरी तरह फैलती हैं। यह फैलाव डबल चिन के नीचे जमी चर्बी को गलाने में सहायक होता है। इसके अलावा, यह आसन थायरॉयड ग्रंथि को भी उत्तेजित करता है, जिससे पूरे शरीर की चयापचय क्रिया में सुधार होता है।