फ्लू में ये गलतियां पड़ सकती हैं भारी: एंटीबायोटिक से लेकर खानपान तक, जानें सही तरीका
सारांश
मुख्य बातें
मौसम परिवर्तन के साथ इन्फ्लुएंजा (फ्लू) का खतरा बढ़ जाता है — यह एक वायरसजनित श्वसन संक्रमण है जो नाक, गले और फेफड़ों को प्रभावित करता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, फ्लू के लक्षण अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लगते हैं, जिसके चलते लोग बिना चिकित्सीय सलाह के दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। यही लापरवाही बीमारी को गंभीर रूप दे सकती है।
फ्लू के लक्षण और कब हो जाएं सतर्क
फ्लू में अचानक तेज बुखार, खांसी, गले में दर्द, सिरदर्द, शरीर में दर्द और अत्यधिक थकान हो सकती है। कुछ मरीजों में भूख भी कम हो जाती है। अधिकांश मामलों में घर पर आराम से राहत मिल जाती है, लेकिन यदि बुखार अत्यधिक हो, सांस लेने में कठिनाई हो, सीने में दर्द हो या तबीयत लगातार बिगड़ती जाए, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को फ्लू के दौरान विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इन वर्गों में जटिलताओं का जोखिम अधिक होता है।
पानी और तरल पदार्थों की अनदेखी न करें
फ्लू के दौरान बुखार और पसीने के कारण शरीर में जल की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें। सूप, नारियल पानी और अन्य तरल पदार्थ भी उपयोगी हैं।
यदि उल्टी या दस्त भी हों, तो शरीर में पानी और नमक की कमी और तेजी से हो सकती है — ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श अनिवार्य है। चाय और कॉफी को पानी का विकल्प न मानें; शरीर को सर्वाधिक आवश्यकता सादे पानी और उचित तरल पदार्थों की होती है।
आराम और संक्रमण से बचाव
फ्लू के दौरान शरीर वायरस से लड़ रहा होता है, इसलिए अत्यधिक शारीरिक श्रम से थकान और बढ़ सकती है। पर्याप्त नींद शरीर को स्वयं को ठीक करने का अवसर देती है। साथ ही, फ्लू एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, इसलिए खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और हाथों को साफ रखना जरूरी है।
खानपान में बरतें सावधानी
बीमारी में भूख कम लगना स्वाभाविक है, लेकिन लंबे समय तक खाना न खाना उचित नहीं। शरीर को संक्रमण से लड़ने के लिए पोषण की आवश्यकता होती है। एक साथ भारी भोजन के बजाय थोड़ा-थोड़ा और बार-बार खाएं।
दाल, अंडा, दूध, दही और पनीर जैसे प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों के साथ फल और हरी सब्जियां भी आहार में शामिल करें। खिचड़ी और दलिया जैसा हल्का भोजन भी उपयुक्त रहता है। हालांकि, किसी एक विटामिन की अधिक मात्रा लेने से फ्लू तुरंत ठीक नहीं होता — यह भ्रांति आम है।
बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक न लें
फ्लू एक वायरसजनित बीमारी है, इसलिए हर मरीज को एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरियल संक्रमण में कारगर होती हैं, वायरस पर इनका सीधा प्रभाव नहीं पड़ता। फिर भी बिना चिकित्सीय परामर्श के एंटीबायोटिक लेना न केवल अप्रभावी है, बल्कि यह एंटीबायोटिक प्रतिरोध जैसी गंभीर समस्या को भी बढ़ावा दे सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि दवा हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लें।