28 जुलाई 2026
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बुखार में ठंडे पानी से नहाना पड़ सकता है भारी — डॉक्टरों की सलाह जानें

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बुखार में ठंडे पानी से नहाना पड़ सकता है भारी — डॉक्टरों की सलाह जानें

सारांश

मानसून में बुखार होने पर ठंडे पानी से नहाना राहत नहीं, बल्कि कपकपी और कमज़ोरी बढ़ा सकता है। डॉक्टरों की सलाह है — गुनगुना पानी, पर्याप्त तरल और हल्का भोजन। एक-दो दिन में बुखार न उतरे तो तुरंत जाँच कराएँ।

मुख्य बातें

मानसून में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार और टाइफाइड के मामले बढ़ जाते हैं; बुखार इन सभी का प्रमुख लक्षण है।
बुखार शरीर का प्राकृतिक रक्षा तंत्र है — वायरस या बैक्टीरिया से लड़ने के लिए शरीर तापमान बढ़ाता है।
ठंडे पानी से नहाने पर शरीर गर्मी बनाए रखने की कोशिश करता है, जिससे कपकपी और बेचैनी बढ़ सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, बुखार में गुनगुने पानी से नहाना सुरक्षित और फायदेमंद है।
बहुत कमज़ोर होने पर गुनगुने पानी में भीगे कपड़े से शरीर पोंछना उचित विकल्प है।
बुखार एक-दो दिन में न उतरे या बढ़े तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।

मानसून सीजन में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ जाते हैं, और इन सभी का सबसे सामान्य लक्षण बुखार होता है। नई दिल्ली सहित देशभर में 28 जुलाई 2026 तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि बुखार के दौरान नहाने को लेकर प्रचलित कई धारणाएँ गलत हैं — और इन गलतियों से मरीज़ की तकलीफ बढ़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, बुखार में ठंडे पानी से नहाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

बुखार क्या होता है और शरीर में क्या होता है

चिकित्सकों के अनुसार, बुखार स्वयं में कोई बीमारी नहीं है — यह शरीर का एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र है। जब कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर का तापमान जानबूझकर बढ़ा देती है। इसका अर्थ यह है कि बुखार आना दरअसल इस बात का संकेत है कि शरीर संक्रमण के विरुद्ध सक्रिय रूप से लड़ रहा है। इसलिए केवल दवा देकर बुखार कम कर देना पर्याप्त नहीं है — बुखार की असली वजह का पता लगाना भी उतना ही ज़रूरी है।

ठंडे पानी से नहाना क्यों है खतरनाक

अक्सर यह भ्रम रहता है कि ठंडा पानी शरीर का तापमान जल्दी घटा देगा। डॉक्टरों के मुताबिक यह धारणा गलत है। जब ठंडा पानी शरीर पर पड़ता है, तो शरीर अपनी आंतरिक गर्मी बनाए रखने की कोशिश में और अधिक ऊर्जा खर्च करता है। इससे कपकपी शुरू हो जाती है और मरीज़ पहले से ज़्यादा कमज़ोर और बेचैन महसूस कर सकता है।

इसी प्रकार, बहुत गर्म पानी से नहाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कमज़ोरी और बढ़ सकती है।

सही तरीका: गुनगुने पानी से नहाएँ

डॉक्टरों की सलाह है कि यदि बुखार में मरीज़ खुद खड़ा हो सकता है और बेहद कमज़ोर नहीं है, तो वह गुनगुने पानी से आराम से नहा सकता है। गुनगुना पानी शरीर को धीरे-धीरे राहत देता है — पसीना और गंदगी साफ होती है, शरीर हल्का महसूस होता है और कई बार नींद भी बेहतर आती है।

यदि मरीज़ इतना कमज़ोर हो कि नहाना संभव न हो, तो गुनगुने पानी में भीगा हुआ साफ कपड़ा लेकर पूरे शरीर को धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। इससे शरीर साफ भी रहता है और आराम भी मिलता है।

आम जनता पर असर: हाइड्रेशन और खान-पान

बुखार के दौरान शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार पानी पीना ज़रूरी है। इसके साथ ही नारियल पानी, ओआरएस, सूप, छाछ और अन्य तरल पदार्थ भी लाभदायक होते हैं। खाने में खिचड़ी और दलिया जैसे हल्के और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।

डॉक्टर के पास कब जाएँ

यदि बुखार एक से दो दिन में ठीक नहीं होता या लगातार बढ़ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से जाँच करानी चाहिए। मानसून के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों में देरी से इलाज गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो स्थिति को बिगाड़ देते हैं। मानसून में हर साल डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ते हैं, लेकिन घरेलू देखभाल के सही तरीकों पर सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान अभी भी अपर्याप्त हैं। बुखार प्रबंधन की यह बुनियादी जानकारी स्कूल स्तर से दी जानी चाहिए — तभी अस्पतालों पर मानसून का अनावश्यक बोझ कम होगा।
RashtraPress
28 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बुखार में नहाना चाहिए?
हाँ, यदि मरीज़ खुद खड़ा हो सकता है और बेहद कमज़ोर नहीं है, तो गुनगुने पानी से नहाया जा सकता है। इससे शरीर हल्का महसूस होता है और नींद भी बेहतर आती है।
बुखार में ठंडे पानी से नहाना क्यों नुकसानदेह है?
ठंडा पानी शरीर पर पड़ने से शरीर अपनी आंतरिक गर्मी बनाए रखने की कोशिश करता है, जिससे कपकपी छूटती है और कमज़ोरी बढ़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार यह बुखार को कम नहीं करता, बल्कि तकलीफ और बढ़ा देता है।
बुखार होने पर क्या खाना-पीना चाहिए?
बुखार में शरीर से पसीना अधिक निकलता है, इसलिए बार-बार पानी पीना ज़रूरी है। नारियल पानी, ओआरएस, सूप और छाछ जैसे तरल पदार्थ फायदेमंद होते हैं, और खिचड़ी व दलिया जैसा हल्का भोजन लेना उचित माना जाता है।
बुखार असल में होता क्या है?
बुखार शरीर का एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र है, न कि कोई बीमारी। जब वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करते हैं, तो प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर का तापमान बढ़ा देती है।
बुखार में डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए?
यदि बुखार एक से दो दिन में ठीक नहीं होता या लगातार बढ़ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से जाँच करानी चाहिए। मानसून में डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों में देरी से इलाज गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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