बुखार में ठंडे पानी से नहाना पड़ सकता है भारी — डॉक्टरों की सलाह जानें
सारांश
मुख्य बातें
मानसून सीजन में डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, वायरल बुखार और टाइफाइड जैसी बीमारियों के मामले तेज़ी से बढ़ जाते हैं, और इन सभी का सबसे सामान्य लक्षण बुखार होता है। नई दिल्ली सहित देशभर में 28 जुलाई 2026 तक स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह चेतावनी दे रहे हैं कि बुखार के दौरान नहाने को लेकर प्रचलित कई धारणाएँ गलत हैं — और इन गलतियों से मरीज़ की तकलीफ बढ़ सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, बुखार में ठंडे पानी से नहाना स्थिति को और बिगाड़ सकता है।
बुखार क्या होता है और शरीर में क्या होता है
चिकित्सकों के अनुसार, बुखार स्वयं में कोई बीमारी नहीं है — यह शरीर का एक प्राकृतिक रक्षा तंत्र है। जब कोई वायरस या बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश करता है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली संक्रमण से लड़ने के लिए शरीर का तापमान जानबूझकर बढ़ा देती है। इसका अर्थ यह है कि बुखार आना दरअसल इस बात का संकेत है कि शरीर संक्रमण के विरुद्ध सक्रिय रूप से लड़ रहा है। इसलिए केवल दवा देकर बुखार कम कर देना पर्याप्त नहीं है — बुखार की असली वजह का पता लगाना भी उतना ही ज़रूरी है।
ठंडे पानी से नहाना क्यों है खतरनाक
अक्सर यह भ्रम रहता है कि ठंडा पानी शरीर का तापमान जल्दी घटा देगा। डॉक्टरों के मुताबिक यह धारणा गलत है। जब ठंडा पानी शरीर पर पड़ता है, तो शरीर अपनी आंतरिक गर्मी बनाए रखने की कोशिश में और अधिक ऊर्जा खर्च करता है। इससे कपकपी शुरू हो जाती है और मरीज़ पहले से ज़्यादा कमज़ोर और बेचैन महसूस कर सकता है।
इसी प्रकार, बहुत गर्म पानी से नहाना भी उचित नहीं माना जाता, क्योंकि इससे शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और कमज़ोरी और बढ़ सकती है।
सही तरीका: गुनगुने पानी से नहाएँ
डॉक्टरों की सलाह है कि यदि बुखार में मरीज़ खुद खड़ा हो सकता है और बेहद कमज़ोर नहीं है, तो वह गुनगुने पानी से आराम से नहा सकता है। गुनगुना पानी शरीर को धीरे-धीरे राहत देता है — पसीना और गंदगी साफ होती है, शरीर हल्का महसूस होता है और कई बार नींद भी बेहतर आती है।
यदि मरीज़ इतना कमज़ोर हो कि नहाना संभव न हो, तो गुनगुने पानी में भीगा हुआ साफ कपड़ा लेकर पूरे शरीर को धीरे-धीरे पोंछना चाहिए। इससे शरीर साफ भी रहता है और आराम भी मिलता है।
आम जनता पर असर: हाइड्रेशन और खान-पान
बुखार के दौरान शरीर से पसीना अधिक निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बार-बार पानी पीना ज़रूरी है। इसके साथ ही नारियल पानी, ओआरएस, सूप, छाछ और अन्य तरल पदार्थ भी लाभदायक होते हैं। खाने में खिचड़ी और दलिया जैसे हल्के और सुपाच्य भोजन को प्राथमिकता देनी चाहिए।
डॉक्टर के पास कब जाएँ
यदि बुखार एक से दो दिन में ठीक नहीं होता या लगातार बढ़ रहा है, तो तुरंत चिकित्सक से जाँच करानी चाहिए। मानसून के मौसम में डेंगू और मलेरिया जैसे रोगों में देरी से इलाज गंभीर जटिलताएँ पैदा कर सकता है।