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गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर: WHO के आंकड़े चौंकाने वाले, मां-बच्चे की जान बचाने को समय पर जांच ज़रूरी

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गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर: WHO के आंकड़े चौंकाने वाले, मां-बच्चे की जान बचाने को समय पर जांच ज़रूरी

सारांश

WHO के अनुसार दुनियाभर में 10–15% गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर से जटिलताएं आती हैं और हर साल 42 हज़ार महिलाओं की मौत होती है। प्री-एक्लेम्पसिया जैसी स्थिति चुपचाप बढ़ती है — इसीलिए नियमित जांच ही सबसे बड़ा बचाव है।

मुख्य बातें

WHO के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लगभग 42 हज़ार महिलाओं की मौत गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है।
वैश्विक स्तर पर 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या सामने आती है।
हर साल 5 लाख से अधिक मृत-जन्म और नवजात मृत्यु इन्हीं जटिलताओं से जुड़े हैं।
प्री-एक्लेम्पसिया आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद विकसित होता है और शुरुआत में लक्षण न दिखने से खतरा बढ़ता है।
WHO ने 2026 से 2035 तक की वैश्विक रणनीति पेश की है जिसमें बेहतर जांच, दवाएं और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं।
प्रसव के बाद भी हाई बीपी, हृदय रोग और किडनी की समस्याओं का खतरा बना रहता है — नियमित जांच ज़रूरी।

गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) को नज़रअंदाज़ करना मां और नवजात दोनों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल लगभग 42 हज़ार महिलाओं की मृत्यु गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से जुड़ी जटिलताओं के कारण होती है। ऐसे में विशेषज्ञ और स्वास्थ्य संगठन दोनों इस बात पर एकमत हैं कि नियमित जांच ही सबसे बड़ा बचाव है।

वैश्विक स्तर पर कितना बड़ा खतरा

WHO के आंकड़ों के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 10 से 15 प्रतिशत गर्भधारण में हाई ब्लड प्रेशर से जुड़ी समस्याएं सामने आती हैं। इनमें प्री-एक्लेम्पसिया जैसी गंभीर स्थिति भी शामिल है।

इन समस्याओं के चलते हर साल 5 लाख से अधिक मृत-जन्म और नवजात शिशुओं की मौत के मामले दर्ज होते हैं। गौरतलब है कि गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप मातृ मृत्यु की प्रमुख वजहों में से एक है — जो इसे केवल एक व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्या नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनाता है।

प्री-एक्लेम्पसिया: क्या है और कैसे पहचानें

प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था की एक गंभीर स्थिति है, जिसमें आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। इसके साथ किडनी या लिवर पर असर पड़ने के संकेत और कई बार यूरिन में प्रोटीन की उपस्थिति भी देखी जाती है।

इसके प्रमुख लक्षणों में तेज़ सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन या चमक, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, चेहरे और हाथों में अचानक सूजन तथा सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं। हालांकि, कई मामलों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते — यही कारण है कि नियमित जांच को टाला नहीं जा सकता।

डॉक्टर कैसे करते हैं निगरानी

गर्भावस्था की देखभाल के दौरान डॉक्टर नियमित रूप से ब्लड प्रेशर मापते हैं। ज़रूरत पड़ने पर यूरिन में प्रोटीन की जांच और अन्य परीक्षण भी कराए जाते हैं। स्थिति की गंभीरता के अनुसार दवाएं दी जाती हैं और मां व शिशु दोनों की करीबी निगरानी रखी जाती है।

यह ऐसे समय में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है जब निम्न और मध्यम आय वाले देशों में प्रसव-पूर्व देखभाल की पहुंच अभी भी सीमित है, जहां इन जटिलताओं का बोझ सबसे अधिक है।

WHO की वैश्विक रणनीति 2026–2035

WHO ने गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतों और जटिलताओं को कम करने के लिए 2026 से 2035 तक की एक विस्तृत वैश्विक रणनीति पेश की है। इस रणनीति का उद्देश्य बेहतर जांच सुविधाएं, ज़रूरी दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और समय पर आपातकालीन उपचार सुनिश्चित करना है।

प्रसव के बाद भी रहे सतर्क

विशेषज्ञों के अनुसार, गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर का प्रभाव डिलीवरी के बाद भी बना रह सकता है। ऐसी महिलाओं में आगे चलकर स्थायी उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रसव के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित ब्लड प्रेशर जांच कराना अनिवार्य है।

समय पर पहचान और उचित चिकित्सीय देखभाल से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है — यह संदेश आज के संदर्भ में हर गर्भवती महिला और उसके परिजनों तक पहुंचाना ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों की महिलाएं सबसे अधिक जोखिम में हैं। WHO की 2026–2035 रणनीति सही दिशा में कदम है, लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या इसे ज़मीनी स्तर पर लागू किया जाएगा — क्योंकि प्री-एक्लेम्पसिया की पहचान और उपचार के लिए जिस बुनियादी ढांचे की ज़रूरत है, वह अभी कई राज्यों में अपर्याप्त है।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गर्भावस्था में हाई ब्लड प्रेशर क्यों खतरनाक है?
गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप मातृ मृत्यु की प्रमुख वजहों में से एक है और मां के साथ-साथ नवजात को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। WHO के अनुसार इससे हर साल लगभग 42 हज़ार महिलाओं की मौत होती है और 5 लाख से अधिक मृत-जन्म या नवजात मृत्यु के मामले दर्ज होते हैं।
प्री-एक्लेम्पसिया क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
प्री-एक्लेम्पसिया गर्भावस्था की एक गंभीर स्थिति है जो आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद अचानक हाई ब्लड प्रेशर के रूप में सामने आती है। इसके लक्षणों में तेज़ सिरदर्द, आंखों के सामने धुंधलापन, पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द, हाथों-चेहरे पर सूजन और सांस लेने में कठिनाई शामिल हैं — हालांकि कई मामलों में शुरुआत में कोई लक्षण नहीं दिखता।
गर्भावस्था में कितने समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए?
डॉक्टर गर्भावस्था की हर नियमित जांच (प्रसव-पूर्व विज़िट) में ब्लड प्रेशर मापते हैं। यदि कोई जोखिम कारक हो तो यूरिन में प्रोटीन की जांच और अन्य परीक्षण भी किए जाते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी भी लक्षण के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
WHO की गर्भावस्था उच्च रक्तचाप रणनीति 2026–2035 में क्या है?
WHO ने 2026 से 2035 तक की एक वैश्विक रणनीति तैयार की है जिसका उद्देश्य बेहतर जांच सुविधाएं, ज़रूरी दवाओं की उपलब्धता, प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की तैनाती और समय पर आपातकालीन उपचार सुनिश्चित करना है ताकि मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम किया जा सके।
क्या डिलीवरी के बाद भी हाई बीपी का खतरा रहता है?
हां, जिन महिलाओं को गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप की समस्या रही हो, उनमें भविष्य में स्थायी हाई बीपी, हृदय रोग, स्ट्रोक और किडनी की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए प्रसव के बाद भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच जारी रखनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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