विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2026: 140/90 से ऊपर BP है 'साइलेंट किलर', प्रदूषण और तनाव भी बनते हैं कारण
सारांश
मुख्य बातें
विश्व उच्च रक्तचाप दिवस हर वर्ष 17 मई को मनाया जाता है, और इस वर्ष यह 21वाँ संस्करण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का रक्तचाप लगातार 140/90 mmHg या उससे अधिक बना रहता है, तो वह उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) का शिकार माना जाता है। भारत में प्रतिवर्ष लगभग 11 लाख लोग अनियंत्रित उच्च रक्तचाप के कारण जान गँवाते हैं — एक ऐसी स्थिति जिसे चिकित्सक 'साइलेंट किलर' कहते हैं क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण प्रायः नज़र नहीं आते।
उच्च रक्तचाप दिवस का इतिहास और इस वर्ष की थीम
इस दिवस की स्थापना सर्वप्रथम 17 मई 2006 को वर्ल्ड हाइपरटेंशन लीग (WHL) द्वारा की गई थी। वर्ष 2026 की वैश्विक थीम 'एक साथ उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करें' है, जो यह संदेश देती है कि इस बीमारी से लड़ाई केवल चिकित्सकों की नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
इस वर्ष मई माह को 'मई मापन माह' (May Measurement Month — MMM) के रूप में मनाया जा रहा है, जिसके अंतर्गत व्यापक स्तर पर रक्तचाप जाँच अभियान चलाए जा रहे हैं।
वैश्विक और भारतीय स्थिति: चिंताजनक आँकड़े
WHO की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, विश्वभर में लगभग 140 करोड़ वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। इनमें से करीब 44 प्रतिशत — यानी लगभग 60 करोड़ लोग — इस बात से बिल्कुल अनजान हैं कि उन्हें यह बीमारी है। जब तक उन्हें पता चलता है, तब तक हृदयाघात (हार्ट अटैक), मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक) या किडनी फेलियर जैसी गंभीर जटिलताएँ उत्पन्न हो चुकी होती हैं।
गौरतलब है कि यह केवल बुज़ुर्गों की बीमारी नहीं रही — शहरी युवाओं में भी इसके मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं, जो बदलती जीवनशैली और बढ़ते मानसिक दबाव का परिणाम है।
क्या बढ़ाता है रक्तचाप: नमक, तनाव और प्रदूषण
WHO की सिफारिश है कि दिनभर में 5 ग्राम (एक चम्मच) से अधिक नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। हालाँकि पैकेटबंद स्नैक्स और मसालेदार भोजन के ज़रिये शरीर में सोडियम की मात्रा इस सीमा को अक्सर पार कर जाती है, जिससे रक्तचाप बढ़ता है।
घंटों एक ही स्थान पर बैठे रहने और लगातार मानसिक तनाव के कारण शरीर में कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो रक्तचाप को प्रभावित करता है। हालिया शोधों के अनुसार, वायु प्रदूषण में मौजूद PM2.5 के सूक्ष्म कण भी रक्त वाहिकाओं को संकुचित कर रक्तचाप बढ़ाने में भूमिका निभाते हैं — यह तथ्य इस बीमारी के पर्यावरणीय आयाम को उजागर करता है।
सरकारी पहल और दिल्ली-NCR में जागरूकता अभियान
केंद्र सरकार की भारतीय उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल (IHCI) के अंतर्गत देश के 100 से अधिक जिलों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर एम्लोडिपिन जैसी दवाएँ पात्र मरीज़ों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
दिल्ली-NCR में इस अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता की विशेष मुहिम चल रही है। दिल्ली मेट्रो के विभिन्न स्टेशनों पर लगाए गए विशेष कियोस्क पर यात्री निःशुल्क रक्तचाप जाँच करा सकते हैं। इसके अतिरिक्त AIIMS, सफदरजंग अस्पताल, मैक्स और सर्वोदय जैसे प्रमुख अस्पताल मेगा स्क्रीनिंग शिविर आयोजित कर रहे हैं, जहाँ जीवनशैली सुधार के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए जा रहे हैं।
बचाव और नियंत्रण: क्या करें
विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च रक्तचाप लाइलाज नहीं है — इसे जीवनशैली में बदलाव और नियमित दवाओं से प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है। परिवार के स्तर पर नमक की मात्रा घटाना, नियमित टहलना, तनाव प्रबंधन और डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का पालन — ये चार कदम मिलकर इस 'मूक महामारी' को रोकने में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। आने वाले वर्षों में IHCI के विस्तार और MMM जैसे अभियानों की सफलता यह तय करेगी कि भारत इस चुनौती से कितनी प्रभावी तरह से निपट पाता है।