क्या कड़वे नीम के मीठे गुण आपको बीमारियों से बचा सकते हैं?
सारांश
Key Takeaways
- नीम का रस पेट की समस्याओं में सहायक है।
- यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है।
- डायबिटीज के नियंत्रण के लिए अत्यधिक फायदेमंद है।
- सीमित मात्रा में सेवन आवश्यक है।
- गर्भवती महिलाओं को इसे नहीं लेना चाहिए.
नई दिल्ली, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जब भी नीम का नाम आता है, तो मुंह में कड़वापन और कसैलापन महसूस होता है। इसके पत्तों को चबाना और निगलना कई लोगों के लिए कठिनाई भरा होता है, लेकिन थोड़े पानी के साथ नीम के पत्तों का रस शरीर को विभिन्न बीमारियों से मुक्ति दिला सकता है।
नीम का स्वाद भले ही कड़वा हो, लेकिन इसके गुण मीठे हैं। इसमें मौजूद एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-फंगल और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने तथा रक्त को शुद्ध करने में सहायक होते हैं। नीम का रस पेट से संबंधित समस्याओं, जैसे कि कब्ज़, गैस, पेट फूलना और अल्सर, को नियंत्रित करने में मदद करता है और आंतों को साफ करता है।
यदि मौसम में बदलाव से संक्रमण का खतरा बढ़ता है, तो यह संकेत है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो गई है। ऐसे में नीम का रस संक्रमण से लड़ने की ताकत प्रदान करता है। सूजन की स्थिति में भी नीम का रस प्रभावी साबित होता है।
नीम के रस में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण घाव भरने में मदद करते हैं। यदि मुंह या पेट के छालों के कारण खाने-पीने में कठिनाई होती है, तो यह रस एक प्राकृतिक उपचार का काम करेगा। सदियों से नीम के पत्तों का पेस्ट बाहरी और आंतरिक घावों के इलाज में प्रयोग किया जाता रहा है।
आजकल की जीवनशैली में डायबिटीज आम हो गया है, और नीम इसे नियंत्रित करने में सहायक है। यदि लोग नीम के रस का नियमित सेवन करें, तो यह स्थिति को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है। नीम का रस शर्करा को रक्त में बढ़ने से रोकता है, जिससे डायबिटीज पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
हालांकि, नीम के पत्तों का रस बहुत कड़वा होता है, इसलिए इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को भी नीम के सेवन से बचना चाहिए। इसके साथ ही, यदि आप किसी दवा का सेवन कर रहे हैं, तो डॉक्टर की सलाह के बिना इसका सेवन न करें।