क्या आप भी 'फैट वॉलेट सिंड्रोम' के शिकार हैं? जानिए इसकी गंभीरता!

सारांश
Key Takeaways
- वॉलेट को हमेशा हल्का और पतला रखें।
- आगे की जेब या बैग का उपयोग करें।
- समय-समय पर अपनी स्थिति बदलें।
- स्ट्रेचिंग करें ताकि मांसपेशियों में खिंचाव न हो।
- इस समस्या को गंभीरता से लें और चिकित्सक से सलाह लें।
नई दिल्ली, 24 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। अधिकांश लोग अपनी पैंट की पिछली जेब में वॉलेट रखना पसंद करते हैं। यह एक साधारण आदत है, लेकिन यह आपकी सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। अक्सर हम बिना सोचे-समझे इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि हमारी दैनिक छोटी-छोटी आदतें हमारे स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं। इस संबंध में वैज्ञानिकों ने कई अध्ययन किए हैं, जिनमें से एक अध्ययन में पाया गया है कि पैंट की पिछली जेब में वॉलेट रखना हमारे शरीर के संतुलन को बिगाड़ सकता है।
नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जब हम पीछे वाली जेब में वॉलेट डालकर बैठते हैं, तो एक कूल्हा थोड़ा ऊंचा हो जाता है। यह लग सकता है कि यह एक छोटी सी बात है, लेकिन इसका प्रभाव हमारी रीढ़ पर गहरा होता है। असमान बैठने की स्थिति के कारण रीढ़ धीरे-धीरे एक तरफ झुकने लगती है, जो समय के साथ रीढ़ की सही संरचना को बिगाड़ सकती है। जब शरीर का वजन ठीक से बंटता नहीं है, तो कूल्हे, कमर और रीढ़ पर दबाव बढ़ जाता है। यह असंतुलन केवल बैठने के समय ही नहीं, बल्कि चलने-फिरने और खड़े होने की स्थिति को भी प्रभावित करता है।
इसी कारण से, लंबे समय तक इस आदत को बनाए रखने वालों को पीठ और कमर के दर्द की अधिक शिकायतें होती हैं। इसके साथ ही, मांसपेशियों में खिंचाव और नसों के दबाव के कारण साइटिका जैसे गंभीर दर्द भी हो सकते हैं। इसे चिकित्सा भाषा में 'फैट वॉलेट सिंड्रोम' कहा जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। जितना मोटा और भारी आपका वॉलेट होगा, उतना ही अधिक दबाव शरीर पर पड़ेगा, जिससे समस्या और बढ़ सकती है।
इसके अतिरिक्त, जब रीढ़ और पेल्विस सही तरीके से संतुलित नहीं होते, तो यह आपके पूरे शरीर की मुद्रा और चलने-फिरने की आदतों को प्रभावित कर सकता है। कमर का दर्द और मांसपेशियों की समस्याएं धीरे-धीरे आपकी दैनिक जिंदगी को कठिन बना देती हैं। युवा हों या वृद्ध, सभी इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं, विशेषकर वे लोग जो ऑफिस में घंटों तक एक जगह बैठे रहते हैं।
इस आदत से बचना बेहद आवश्यक है। आप वॉलेट को आगे की जेब में रख सकते हैं या किसी बैग या पर्स का उपयोग कर सकते हैं ताकि आपकी पीठ और कमर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। अगर आप नियमित रूप से अपनी स्थिति बदलते रहें और समय-समय पर स्ट्रेचिंग करें, तो आप इस समस्या से बच सकते हैं। डॉक्टरों की सलाह है कि वॉलेट को हमेशा हल्का और पतला रखें ताकि वह आपकी पीठ और कूल्हे पर अधिक दबाव न डाले।