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नागालैंड में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का प्रकोप: सुअर, मांस उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध, पालकों को भारी नुकसान की आशंका

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नागालैंड में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का प्रकोप: सुअर, मांस उत्पादों पर कड़े प्रतिबंध, पालकों को भारी नुकसान की आशंका

सारांश

नागालैंड में अफ्रीकन स्वाइन फीवर का प्रकोप मिजोरम के बाद पूर्वोत्तर में और गहरा हो गया है। सुअरों व मांस उत्पादों पर प्रतिबंध लागू, AHVS ने पाँच सूत्रीय सलाह जारी की। यह बीमारी मनुष्यों को नहीं फैलती, लेकिन सुअर पालकों की आजीविका पर गंभीर संकट मंडरा रहा है।

मुख्य बातें

नागालैंड सरकार ने 23 मई को अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के प्रकोप के मद्देनजर सुअरों और सुअर के मांस उत्पादों के आयात, परिवहन व बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाए।
पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग (AHVS) ने पाँच सूत्रीय सलाह जारी कर पालकों, व्यापारियों और ग्राम परिषदों से सहयोग माँगा।
ASF केवल सुअरों को प्रभावित करती है — यह मनुष्यों में नहीं फैलती और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं है।
पड़ोसी राज्य मिजोरम में भी ASF का प्रकोप जारी है; पूर्वोत्तर में अंतर-राज्यीय प्रसार की आशंका बनी हुई है।
मृत सुअरों को नदियों या खुले स्थानों में फेंकने पर चेतावनी; अनुचित निपटान से प्रकोप और बढ़ सकता है।

नागालैंड सरकार ने राज्य के कई जिलों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) के तेज़ी से फैलते प्रकोप के मद्देनजर सुअरों और सुअर के मांस उत्पादों के आयात, परिवहन एवं बिक्री पर तत्काल प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग (AHVS) ने शनिवार, 23 मई को यह जानकारी देते हुए कहा कि प्रभावित क्षेत्रों के जिला प्रशासन ने रोकथाम के लिए कड़े कदम उठाए हैं। पड़ोसी राज्य मिजोरम में पहले से जारी ASF संकट के बाद नागालैंड में यह कार्रवाई और भी अहम हो जाती है।

मुख्य घटनाक्रम

AHVS निदेशालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जिला पशु चिकित्सा अधिकारियों और फील्ड स्टाफ को निगरानी, नमूना संग्रह, रोकथाम अभियान और जैव-सुरक्षा उपायों के क्रियान्वयन में सक्रिय रूप से लगाया गया है। प्रभावित क्षेत्रों में सुअरों की अनधिकृत आवाजाही पर पूर्ण रोक लगाई गई है।

विभाग ने पाँच सूत्रीय सलाह भी जारी की है, जिसमें सुअर पालकों, व्यापारियों, परिवहनकर्ताओं, ग्राम परिषदों और कॉलोनी अधिकारियों से पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ पूर्ण सहयोग करने की अपील की गई है।

ASF क्या है और इसका खतरा क्यों है

अफ्रीकन स्वाइन फीवर एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो केवल सुअरों को प्रभावित करती है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह बीमारी मनुष्यों में नहीं फैलती और इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरा नहीं माना जाता। हालाँकि, यह सुअर पालकों को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुँचाती है — संक्रमण की स्थिति में पशुओं की मृत्यु दर अत्यधिक उच्च हो सकती है और कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है।

गौरतलब है कि नागालैंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुअर पालन एक महत्वपूर्ण आजीविका का स्रोत है। ASF का प्रकोप न केवल पशुधन को नष्ट करता है, बल्कि बाज़ार में माँग को भी प्रभावित करता है, जिससे पालकों की आय पर दोहरी मार पड़ती है।

विभाग की पाँच सूत्रीय सलाह

AHVS ने आम जनता और सुअर पालकों से निम्नलिखित निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है:

पहला — सुअरों में अचानक बीमारी या मृत्यु होने पर तुरंत निकटतम पशु चिकित्सा संस्थान को सूचित करें। दूसरा — प्रभावित क्षेत्रों से सुअरों और सुअर के मांस उत्पादों की अनधिकृत आवाजाही से बचें। तीसरा — फार्म स्वच्छता और जैव-सुरक्षा के सख्त नियमों का पालन करें। चौथा — मृत सुअरों को नदियों, नालों, जंगलों या खुले सार्वजनिक स्थानों में न फेंकें, क्योंकि इससे प्रकोप और बढ़ सकता है। पाँचवाँ — पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ सक्रिय सहयोग बनाए रखें।

मिजोरम से नागालैंड तक: क्षेत्रीय संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब मिजोरम भी ASF प्रकोप से जूझ रहा है। पूर्वोत्तर भारत के इन दोनों राज्यों में सुअर पालन सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतर-राज्यीय सीमाओं पर पशुओं की आवाजाही पर प्रभावी निगरानी के बिना इस बीमारी को फैलने से रोकना कठिन हो सकता है।

गौरतलब है कि ASF पहली बार भारत में 2020 में पूर्वोत्तर राज्यों में दर्ज किया गया था और तब से यह क्षेत्र में बार-बार उभरता रहा है। नागालैंड सरकार की त्वरित कार्रवाई इस बार नुकसान को सीमित रखने की कोशिश का संकेत है।

आगे क्या होगा

AHVS निदेशालय ने संकेत दिया है कि जिला स्तर पर निगरानी और नमूना संग्रह जारी रहेगा। प्रतिबंधों की समीक्षा स्थिति के आधार पर की जाएगी। सुअर पालकों और व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी संदिग्ध लक्षण की तुरंत सूचना दें ताकि समय पर हस्तक्षेप संभव हो सके।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन पूर्वोत्तर में ASF की बार-बार वापसी यह सवाल उठाती है कि क्या केवल प्रतिक्रियात्मक प्रतिबंध पर्याप्त हैं। 2020 से इस क्षेत्र में ASF के कई दौर आ चुके हैं, फिर भी एक स्थायी क्षेत्रीय निगरानी तंत्र और मुआवज़ा ढाँचा अब तक नहीं बन पाया है। सुअर पालन पूर्वोत्तर की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — बिना त्वरित मुआवज़े और दीर्घकालिक जैव-सुरक्षा निवेश के, ये प्रतिबंध पालकों को बीमारी से नहीं, सरकारी नीति से बर्बाद होने पर मजबूर कर देते हैं।
RashtraPress
8 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अफ्रीकन स्वाइन फीवर (ASF) क्या है और क्या यह इंसानों को भी हो सकती है?
ASF एक अत्यधिक संक्रामक वायरल बीमारी है जो केवल सुअरों को प्रभावित करती है। अधिकारियों के अनुसार यह मनुष्यों में नहीं फैलती और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए कोई खतरा नहीं है, लेकिन सुअर पालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुँचाती है।
नागालैंड में ASF के कारण कौन-से प्रतिबंध लगाए गए हैं?
प्रभावित क्षेत्रों में सुअरों और सुअर के मांस उत्पादों के आयात, परिवहन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। जिला प्रशासन ने अनधिकृत आवाजाही रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं।
AHVS की पाँच सूत्रीय सलाह में क्या कहा गया है?
विभाग ने सुअरों में अचानक बीमारी या मृत्यु होने पर तुरंत पशु चिकित्सा संस्थान को सूचित करने, अनधिकृत आवाजाही से बचने, फार्म स्वच्छता बनाए रखने, मृत सुअरों को खुले स्थानों में न फेंकने और पशु चिकित्सा अधिकारियों से सहयोग करने की अपील की है।
नागालैंड के सुअर पालकों पर ASF का क्या असर होगा?
ASF में सुअरों की मृत्यु दर अत्यधिक उच्च होती है और इसका कोई प्रभावी टीका उपलब्ध नहीं है। प्रतिबंधों के कारण बाज़ार बंद होने से पालकों की आय पर दोहरी मार पड़ती है — पशुधन की हानि और बिक्री का ठप होना।
क्या पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी ASF का प्रकोप है?
हाँ, मिजोरम में भी ASF का प्रकोप जारी है। नागालैंड में यह कार्रवाई मिजोरम के बाद की गई है और विशेषज्ञ अंतर-राज्यीय प्रसार की आशंका जता रहे हैं। 2020 से पूर्वोत्तर भारत में ASF बार-बार उभरता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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