क्या केले का छिलका सेहत के लिए वरदान है?
सारांश
Key Takeaways
- केले का छिलका कई पोषक तत्वों से भरा होता है।
- इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो शरीर को डिटॉक्स करते हैं।
- छिलका इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाता है।
- यह एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है।
- आप इसे विभिन्न व्यंजनों में इस्तेमाल कर सकते हैं।
नई दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। केला एक ऐसा फल है, जिसे हर घर में नियमित रूप से खाया जाता है। यह न केवल मीठा और पौष्टिक होता है, बल्कि त्वरित ऊर्जा भी देता है। हालांकि, अधिकांश लोग केले का सेवन करने के बाद उसका छिलका फेंक देते हैं। वैज्ञानिक अध्ययनों ने यह साबित किया है कि यह छिलका बेकार नहीं है, बल्कि स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी है।
केले के छिलके में भी कई प्राकृतिक यौगिक होते हैं, जो शरीर को स्वस्थ और मजबूत बनाते हैं। अमेरिकन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, केले के छिलके में एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुण होते हैं। ये गुण शरीर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं और कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं। इससे इम्यूनिटी में वृद्धि होती है और कई बीमारियों से बचाव होता है।
रिसर्च में यह भी पाया गया है कि छिलके में गैलोकैटेचिन नामक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट होता है, जो शरीर को डिटॉक्स करता है और रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है। दिलचस्प बात यह है कि छिलके में केले के गूदे से अधिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। इसके छिलके में फ्लेवोनोइड्स, टैनिन और सैपोनिन जैसे महत्वपूर्ण कंपाउंड्स होते हैं, जो फ्री रेडिकल्स से लड़ते हैं।
फ्री रेडिकल्स शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर कैंसर, दिल की बीमारियों और समय से पहले बुढ़ापे का कारण बन सकते हैं। इसके अलावा, छिलके में मजबूत एंटीबैक्टीरियल शक्ति होती है, जो ई. कोलाई, साल्मोनेला और स्टेफाइलोकोक्स जैसे खतरनाक बैक्टीरिया को नष्ट कर सकती है। ये बैक्टीरिया पेट दर्द, दस्त, बुखार और संक्रमण का कारण बनते हैं। साथ ही, यह दांतों और मसूड़ों के संक्रमण पैदा करने वाले बैक्टीरिया पर भी प्रभावी है।
छिलके में गैलिक एसिड, फेरुलिक एसिड और कैटेचिन जैसे तत्व फंगस से भी लड़ते हैं। कुछ अध्ययन बताते हैं कि छिलके से बने नेचुरल कलर में भी एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि छिलके को अच्छी तरह धोकर विभिन्न व्यंजनों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे स्मूदी, चाय, बेकिंग, या घरेलू फेस मास्क में। यदि किसी को एलर्जी हो, तो पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें।