क्या दिल्ली के मूर्तिकार विभिन्न मिट्टी के मिश्रण से मां सरस्वती की मूर्ति बना रहे हैं?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली में मां सरस्वती की मूर्तियाँ विभिन्न मिट्टी के मिश्रण से बनाई जा रही हैं।
- प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जा रहा है।
- मूर्तियों की कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ गई हैं।
- मूर्तिकार इको-फ्रेंडली प्रतिमाएँ बनाने पर ध्यान दे रहे हैं।
- बसंत पंचमी 23 जनवरी को मनाई जाएगी।
दिल्ली, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। माघ मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को हर वर्ष मां सरस्वती को समर्पित बसंत पंचमी का पर्व मनाया जाता है, और इस बार यह त्योहार 23 जनवरी को पूरे देश में मनाया जाएगा।
सरस्वती पूजन को लेकर दिल्ली में preparations आरंभ हो चुकी हैं, और यहाँ के मूर्तिकार देवी सरस्वती की प्रतिमाएँ अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ बना रहे हैं। बाजार में इन मूर्तियों की कीमत 2500 रुपए से लेकर 20,000 रुपए तक है।
दिल्ली के तुगलकाबाद बंगाली कॉलोनी के एक मूर्तिकार ने समाचार एजेंसी राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "हम मूर्तियाँ बनाने का कार्य पिछले 25 वर्षों से कर रहे हैं और इसके लिए हम पानी वाले पेंट का उपयोग करते हैं, क्योंकि इससे मूर्तियों पर निशान नहीं पड़ते।"
उन्होंने बताया कि प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया में मिट्टी, बांस, फट्टे, पराली और विभिन्न प्रकार की मिट्टी का प्रयोग किया जाता है। मां की प्रतिमा में केवल एक प्रकार की मिट्टी नहीं होती। मजबूती के लिए कई प्रकार की मिट्टी को मिलाया जाता है।
उन्होंने कहा कि अब तक वे 2 फीट से लेकर 10 फीट तक की मूर्तियाँ बना चुके हैं और अधिकांश मूर्तियों में प्राकृतिक रंग का उपयोग करने की कोशिश की जा रही है। बाजार में कई रंग मौजूद हैं, लेकिन हम अच्छे रंगों का चुनाव करते हैं। वहीं, मां सरस्वती की मूर्ति खरीदने आए एक भक्त ने बताया, "मैं सालों से मां की पूजा कर रहा हूँ। आज मूर्ति खरीदने आया हूँ, लेकिन इस बार कीमतें काफी बढ़ गई हैं।"
बसंत पंचमी का त्योहार नजदीक है और दिल्ली के बाजार मां सरस्वती के विभिन्न रूपों की प्रतिमाओं से भरे हुए हैं। मूर्तिकार शंख धारण किए और कमल पर विराजमान मां सरस्वती की प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं। हालांकि, कच्चे माल की कीमतें बढ़ने के कारण मूर्तियों की कीमतों में भारी उछाल आया है। पिछले वर्ष की तुलना में दिल्ली के बाजारों में प्रतिमाएँ महंगी हैं। छोटी मूर्तियों की कीमत 2000 रुपए से शुरू होकर 25,000 रुपए तक पहुँच गई है।
पर्यावरण के प्रति जागरूकता और ग्राहकों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए, मूर्तिकार इको-फ्रेंडली मूर्तियाँ बनाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।