क्या कांग्रेस ने वंचित बहुजन आघाड़ी के साथ समझौता निभाने में विफलता की है?: प्रकाश आंबेडकर
सारांश
Key Takeaways
- प्रकाश आंबेडकर ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- समझौता न निभाने का असर बीएमसी चुनाव पर पड़ा है।
- कांग्रेस के लिए मुस्लिम वोट का महत्व बढ़ता जा रहा है।
- भाजपा की घुसपैठ का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है।
- दलों के बीच राजनीतिक सहयोग की आवश्यकता है।
पुणे, 19 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव के बाद कांग्रेस पार्टी पर समझौता न निभाने का आरोप वंचित बहुजन आघाड़ी के अध्यक्ष प्रकाश आंबेडकर ने लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर मुंबई में समझौता निभाया जाता तो शायद परिणाम बेहतर होते।
वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने राष्ट्र प्रेस से चर्चा में कहा कि भाजपा का मुख्य एजेंडा अजित पवार की एनसीपी को समाप्त करना है। हमारे पास जानकारी है कि सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस ने स्थानीय निकाय चुनाव में लगभग 2,000 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके बावजूद, जो सफलता हमें मिली है, वह मतदाताओं की मेहनत और समर्थन की वजह से है। मैं सभी मतदाताओं का आभार व्यक्त करता हूं।
कांग्रेस पर तंज कसते हुए प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि औरंगाबाद में कांग्रेस केवल एक सीट जीत पाई। जहां हमारी फाइट थी, वहां उनकी स्थिति काफी खराब थी। अगर औरंगाबाद में कांग्रेस हमारे साथ आ जाती, तो मेरा मानना है कि करीब 40-42 सीटें जीती जा सकती थीं, जिनमें से 19-20 हमारी और बाकी कांग्रेस की होती।
बीएमसी चुनाव को लेकर आंबेडकर ने कहा कि हमने बार-बार कांग्रेस से कहा था कि मुसलमानों के वोट को अपनी जागीर मत समझिए। यह वोट आपसे टूट रहा है। चुनाव के बाद वही देखा गया, मुस्लिम वोट कांग्रेस से हट चुका है। हिंदू वोट तो पहले ही हट चुका था। जो कांग्रेस में आए, वे अपनी व्यक्तिगत छवि के दम पर जीते हैं।
प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि कांग्रेस का हमारे साथ समझौता था, लेकिन मुंबई में उन्होंने इसे नहीं निभाया।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिला परिषद और पंचायत समिति के 12 जिलों में चुनाव हो रहे हैं, और हम बड़े पैमाने पर चुनाव लड़ रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि कोई समझौता हो जाएगा और उसके अनुसार हम साथ मिलकर चुनाव लड़ेंगे। अभी भी भाजपा की घुसपैठ हो रही है। इसका अर्थ है कि भाजपा विभिन्न राजनीतिक पार्टियों में घुसपैठ कर रही है और इससे उन पार्टियों पर उनका प्रभाव और नियंत्रण बढ़ रहा है।