क्या रोजाना भर पेट चावल खाने के बाद भी वजन नियंत्रित रह सकता है?
सारांश
Key Takeaways
- चावल भारतीय आहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
- ब्राउन राइस वजन को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- रेड राइस में एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो मेटाबॉलिज्म बढ़ाते हैं।
- ब्लैक राइस को फॉरबिडन राइस कहा जाता है।
- बासमती राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है।
नई दिल्ली, 8 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। भारत में चावल हमारी संस्कृति और दैनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सुबह की खिचड़ी से लेकर दोपहर के सादे भात तक, चावल सभी आयु वर्ग के लोगों के आहार में शामिल रहता है। लेकिन जब वजन बढ़ने की बात आती है, तो सबसे पहले लोग चावल को अपनी थाली से हटा देते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, चावल को सात्विक आहार माना जाता है। यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है और मन को शांत रखता है।
प्राचीन समय में चावल का सेवन रोज किया जाता था, लेकिन उस समय चावल कम प्रोसेस्ड होते थे। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, चावल में फाइबर और प्राकृतिक तत्व होते हैं, जो वजन को नियंत्रित करने में सहायक होते हैं।
ब्राउन राइस: ब्राउन राइस में चावल की ऊपरी परत बनी रहती है, जिसमें फाइबर, विटामिन बी, और मिनरल्स प्रचुर मात्रा में होते हैं। जब हम ब्राउन राइस का सेवन करते हैं, तो यह धीरे-धीरे पचता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती। इसे लो ग्लाइसेमिक लोड कहा जाता है। यह रक्त शर्करा को नहीं बढ़ाता और शरीर में वसा के रूप में जमा नहीं होता। यह ऊर्जा को बढ़ाता है।
रेड राइस: रेड राइस वजन नियंत्रण में सहायक माना जाता है। इसका लाल रंग इसमें मौजूद प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट्स के कारण होता है। ये तत्व शरीर में सूजन को कम करते हैं और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाते हैं। जब मेटाबॉलिज्म तेज होता है, तो शरीर जमा वसा को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने लगता है। आयुर्वेद में, रेड राइस रक्त को शुद्ध करने और शरीर की गर्मी को संतुलित रखने में मददगार है, जिससे वजन बढ़ने की संभावना कम होती है।
ब्लैक राइस: आयुर्वेद और विज्ञान दोनों दृष्टिकोण से ब्लैक राइस को विशेष माना जाता है। इसे फॉरबिडन राइस भी कहा जाता है, क्योंकि प्राचीन समय में यह केवल विशेष लोगों के लिए आरक्षित था। ब्लैक राइस में फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट की भरपूर मात्रा होती है, जो पेट को भरा रखते हैं। इससे कैलोरी कम होती है और वजन घटाने की प्रक्रिया तेज होती है।
बासमती राइस: बासमती के दाने लंबे होते हैं और इसमें सामान्य सफेद चावल की तुलना में ग्लाइसेमिक इंडेक्स थोड़ा कम होता है। यह शरीर में शुगर को धीरे-धीरे रिलीज करता है। आयुर्वेद का मानना है कि सही मात्रा में खाया गया सफेद चावल वजन नहीं बढ़ाता, लेकिन इसे दाल, सब्जी और सलाद के साथ लिया जाना चाहिए।