क्या शारीरिक गतिविधि की कमी बीमारियों का खतरा बढ़ाती है? आज ही जीवनशैली में बदलाव लाएं
सारांश
Key Takeaways
- कम शारीरिक गतिविधि से स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- आयुर्वेद में शारीरिक गतिविधि का महत्व बताया गया है।
- नियमित व्यायाम से इम्युनिटी बढ़ती है।
- मोटापा और मधुमेह जैसी बीमारियों से बचने के लिए चलना आवश्यक है।
- शारीरिक गतिविधि से दिल की बीमारियाँ कम होती हैं।
नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। सर्दियों में आलस्य के कारण रजाई से बाहर निकलना कठिन हो जाता है और इस कमी को ऑफिस में घंटों तक कुर्सी पर बैठकर उंगुलियों से काम करके पूरा किया जाता है।
आजकल की जीवनशैली में मस्तिष्क का प्रयोग ज्यादा बढ़ गया है जबकि शारीरिक गतिविधियां कम होती जा रही हैं। यह सुनने में साधारण लग सकता है, लेकिन कम शारीरिक गतिविधि शरीर के लिए खतरनाक हो सकती है। आयुर्वेद इसे शरीर के लिए चेतावनी मानता है।
आयुर्वेद में कहा गया है, “अतियोग, हीनयोग और मिथ्या योग, ये सभी रोगों के मुख्य कारण हैं।” आयुर्वेद के अनुसार, शरीर को कर्मयोग का माध्यम माना गया है। यदि शरीर चलना बंद कर दे, तो वात और कफ दोनों असंतुलित हो जाते हैं। कम गतिविधि से शरीर असंतुलित हो जाता है, जिससे कफ दोष बढ़ता है, वात दोष बिगड़ता है, पित्त दोष भी प्रभावित होता है और सबसे महत्वपूर्ण, इम्युनिटी में कमी आती है। यह सब मिलकर शरीर को गंभीर बीमारियों की चपेट में ला सकता है।
चरक संहिता के अनुसार, “व्यायाम से स्वास्थ्य, लंबी आयु, शक्ति और सुख मिलता है।” लेकिन अगर शरीर कम गतिविधि करता है, तो कई बीमारियों का सामना करना पड़ सकता है, जैसे कि मोटापा और मधुमेह। लंबे समय तक बैठे रहने से शरीर में वसा का जमाव बढ़ता है और मेटाबॉलिज्म कमजोर होता है, जिससे मोटापा और मधुमेह की संभावना बढ़ जाती है।
दूसरी ओर, गठिया और जोड़ों के दर्द का खतरा भी बढ़ता है। एक ही पॉश्चर में लंबे समय तक रहने से हड्डियों और मांसपेशियों में जकड़न होती है और जोड़ों का दर्द भी बढ़ता है।
तीसरा, उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है और दिल से संबंधित बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। चलने से रक्त का संचार तेज होता है और ऑक्सीजन शरीर के प्रत्येक हिस्से तक पहुंचती है। लेकिन ऐसा न होने पर रक्त और ऑक्सीजन की कमी से उच्च रक्तचाप की समस्या उत्पन्न हो सकती है, जिससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अतिरिक्त, डिप्रेशन और चिंता, पाचन संबंधी विकार और रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी आ जाती है।