वात दोष वाले लोगों के लिए यह आहार है औषधि, सूखेपन और कमजोरी से मिलेगा राहत
सारांश
Key Takeaways
- साबुत अनाज का सेवन करें।
- घी और दूध का उपयोग करें।
- ताजे फलों का सेवन करें।
- बासी भोजन से दूर रहें।
- सूखे मेवे का प्रयोग करें।
नई दिल्ली, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर तीन दोषों और सात धातुओं से मिलकर बना है।
तीन दोषों में कफ, पित्त और वात शामिल हैं। एक स्वस्थ शरीर के लिए इन तीनों दोषों का संतुलित होना आवश्यक है, लेकिन आज हम वात दोष की चर्चा करेंगे। वात दोष आकाश और वायु से उत्पन्न होता है और इस प्रवृत्ति के व्यक्ति आमतौर पर पतले-दुबले, कमजोर और रुखेपन का अनुभव करते हैं, जिसका मुख्य कारण उनका आहार है।
शरीर की प्रवृत्ति के अनुसार भोजन आवश्यक है, जिससे सही आहार और गुण मिलकर शरीर को स्वस्थ बनाए रखें। लेकिन आज के आधुनिक युग में बहुत कम लोग अपने शरीर की प्रवृत्तियों को समझते हैं और स्वाद के अनुसार भोजन करते हैं। आज हम आयुर्वेद के अनुसार वात दोष वाले लोगों के लिए उचित आहार की जानकारी साझा करेंगे।
वात दोष वाले लोगों को अपने आहार में साबुत अनाज शामिल करना चाहिए, क्योंकि यह भारी और चिकना होता है। वात दोष वाले व्यक्तियों में थकान और रुखापन दोनों होते हैं, और साबुत अनाज इन दोनों समस्याओं का समाधान प्रदान करते हैं, जिससे शरीर का रुखापन कम होता है। इसके साथ ही, घी और दूध का सेवन भी आवश्यक है।
दूध और घी पोषण और चिकनाई के उत्कृष्ट स्रोत हैं। ये वात और पित्त को बढ़ने से रोकते हैं और शरीर को सूखेपन से बचाते हैं। घी त्वचा को गहराई से पोषण देने में सहायक है। वात दोष वाले लोग सूखे मेवे और मगज के बीज का भी सेवन कर सकते हैं।
इनमें तेल, गर्माहट और पोषण मिलता है, जिससे शरीर को ऊर्जा और ओज प्राप्त होता है। इसके अलावा, ऐसे लोगों को बासी भोजन से दूर रहना चाहिए और हमेशा ताजा एवं पका हुआ भोजन ही करना चाहिए। बासी भोजन शरीर में वात और कफ को असंतुलित करता है। वात दोष वाले व्यक्तियों को रोजाना मीठे और रसीले फलों का सेवन करना चाहिए। आहार में आम, केला, पपीता, अंगूर और सेब को शामिल किया जा सकता है।