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सूरज की घड़ी: आयुर्वेद के अनुसार भोजन का सही समय

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सूरज की घड़ी: आयुर्वेद के अनुसार भोजन का सही समय

सारांश

क्या आप जानते हैं कि आयुर्वेद के अनुसार भोजन का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूरज के चक्र से निर्धारित होता है? जानें कैसे सही समय पर खाना खाने से आप स्वस्थ रह सकते हैं।

मुख्य बातें

खाना सूरज के साथ खाएं सुबह हल्का और पौष्टिक भोजन करें दोपहर का भोजन सबसे भव्य होना चाहिए रात का खाना हल्का होना चाहिए भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है

नई दिल्ली, 21 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। यह अक्सर माना जाता है कि जब भी भूख लगे, खाना खा लेना चाहिए, लेकिन आयुर्वेद इसे सही नहीं मानता। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद के अनुसार, हमारा शरीर कोई मशीन नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का एक हिस्सा है। इसे स्वस्थ रखने के लिए दवाइयों या कठोर आहार के बजाय सूरज के रिदम का पालन करना चाहिए। वास्तव में, शरीर सूरज की घड़ी के अनुसार चलता है।

आयुर्वेद का यह सिद्धांत सदियों से चला आ रहा है कि भोजन का समय घड़ी से नहीं, बल्कि सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ निर्धारित होना चाहिए। जब हम सूरज के साथ भोजन करते हैं, तो पाचन तंत्र मजबूत होता है और शरीर आंतरिक रूप से स्वस्थ होने लगता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल हम घड़ी के अनुसार जीते हैं, लेकिन हमारे शरीर को सूरज के चक्र के अनुसार चलना चाहिए। जब हम सूरज ढलने के बाद भी भारी भोजन करते हैं, तो यह पाचन तंत्र पर दबाव डालता है और कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। आयुर्वेद का मूल मंत्र है– जब सूरज तेज हो, तब खाएं; और जब सूरज डूब जाए, तब आराम करें। इस सरल नियम को अपनाकर लोग बिना सख्त आहार के स्वस्थ रह सकते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार, दिन के तीन महत्वपूर्ण समय होते हैं और हर समय के लिए भोजन अलग होना चाहिए। सुबह को हल्की और साधारण चीजों से शुरुआत करें। सूरज उगते ही पाचन की आग धीरे-धीरे जलने लगती है, इसलिए भारी या तला-भुना भोजन न करें। इसके बजाय, हल्दी वाला दूध, पोहा, उपमा, इडली, फल या हल्का दलिया जैसे खाद्य पदार्थ लें। ये पेट को सुकून देते हैं, ऊर्जा बढ़ाते हैं और दिनभर ताजगी बनाए रखते हैं।

दोपहर का समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। जब सूरज अपने उच्चतम बिंदु पर होता है, तब पाचन की अग्नि सबसे तेज होती है। आयुर्वेद में कहा गया है कि दोपहर का भोजन सबसे पौष्टिक और भरपूर होना चाहिए। इस समय दाल-चावल, रोटी-सब्जी, सांभर-चावल, घी वाली खिचड़ी का सेवन करें। भारी और पोषक भोजन केवल दोपहर में ही पचता है, क्योंकि अग्नि मजबूत होती है।

शाम को जैसे ही सूरज ढलता है, शरीर की गति धीमी हो जाती है। पाचन की आग कमजोर हो जाती है, इसलिए रात का खाना हल्का और जल्दी पचने वाला होना चाहिए। सूप, खिचड़ी, मूंग दाल, नरम सब्जियां, दही-चावल या हल्की रोटी-सब्जी अच्छे विकल्प हैं। भारी, तला-भुना, मसालेदार या अधिक मीठा खाना रात में समस्याएं उत्पन्न करता है जैसे अपच, भारीपन और नींद में परेशानियां।

आयुर्वेद में यह भी कहा गया है कि 'जब भी भूख लगे, खाओ' जैसी सामान्य सलाह गलत है। भूख का समय सूरज के साथ जुड़ा होता है। सुबह हल्की भूख, दोपहर में तेज भूख और शाम को कम भूख का अनुभव होना चाहिए। अगर शाम को अधिक भूख लग रही है, तो इसका मतलब है कि दिन के खान-पान में गड़बड़ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ाएगा।
RashtraPress
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आयुर्वेद में खाने का सही समय क्या है?
आयुर्वेद के अनुसार, सुबह सूर्योदय के समय हल्का भोजन करें, दोपहर में पौष्टिक भोजन और शाम को हल्का भोजन करना चाहिए।
क्या सूरज के अनुसार खाना खाने से स्वास्थ्य में सुधार होता है?
हां, जब हम सूरज के साथ खाते हैं, तो यह पाचन को मजबूत बनाता है और शरीर को आंतरिक रूप से स्वस्थ रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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