तमिलनाडु में डेंगू के 19,000 मामले: अस्पतालों में नए फीवर वार्ड, 26,300 स्वास्थ्यकर्मी तैनात
सारांश
मुख्य बातें
पूर्वोत्तर मानसून की दस्तक से पहले तमिलनाडु में डेंगू और अन्य वायरल संक्रमणों के मामलों में तेज़ उछाल आया है — राज्य में 28 सितंबर 2026 तक करीब 19,000 डेंगू मामले दर्ज किए जा चुके हैं और 9 लोगों की मौत हो चुकी है। बढ़ती भीड़ को सँभालने के लिए अस्पताल अतिरिक्त बेड और फीवर वार्ड तैयार कर रहे हैं, जबकि राज्यभर में 26,300 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी जमीनी निगरानी पर तैनात हैं।
अस्पतालों पर बढ़ता दबाव
चेन्नई के एग्मोर स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ एंड हॉस्पिटल फॉर चिल्ड्रेन में बुखार पीड़ित बच्चों के लिए 60 बेड का नया वार्ड शुरू किया जाना है, ताकि मौजूदा वार्डों पर दबाव कम हो सके। तूतीकोरिन के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वयस्कों और बच्चों के लिए अलग-अलग डेंगू वार्डों में 100 बेड आरक्षित किए गए हैं।
शहर के निजी अस्पतालों में श्वसन रोगों, इन्फ्लूएंजा और डेंगू के मामलों में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज हुई है। कुछ अस्पतालों में मरीजों को बेड मिलने के लिए 12 घंटे तक प्रतीक्षा करनी पड़ी है।
मुख्य प्रभावित जिले
चेन्नई, कोयंबटूर, सलेम, तिरुवल्लूर और चेंगलपट्टू वे जिले हैं जहाँ बुखार और डेंगू के सर्वाधिक मामले सामने आए हैं। चेन्नई में अकेले सितंबर के पहले 20 दिनों में बुखार के 3,000 से अधिक मामले दर्ज हुए, जिनमें 180 डेंगू के थे। इससे पहले अगस्त में शहर में बुखार के करीब 4,500 मामले सामने आए थे, जिनमें 160 डेंगू के थे। अड्यार, अन्ना नगर और वलसरवक्कम इलाकों में अपेक्षाकृत अधिक मामले दर्ज होने के बाद वहाँ निगरानी कड़ी की गई है।
सरकारी और नागरिक प्रतिक्रिया
राज्य में अब तक करीब 2.24 लाख डेंगू जाँचें की जा चुकी हैं। 5,818 सरकारी और निजी स्वास्थ्य केंद्रों के ज़रिए बुखार के मामलों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन ने अपने सभी 15 जोन में मच्छर रोकथाम अभियान तेज कर दिया है — टीमें घर-घर जाकर जमा पानी और मच्छरों के पनपने की जगहों को साफ कर रही हैं, और लार्वानाशक दवा का छिड़काव व फॉगिंग भी की जा रही है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि निजी अस्पतालों से बुखार के मामलों की नियमित रिपोर्ट ली जाए और मरीजों के घरों के आसपास मच्छर-पनपने के स्थानों की जाँच की जाए।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
डॉक्टरों के अनुसार, उनके पास आ रहे संक्रमण के अधिकांश मामले हल्के हैं, लेकिन मरीजों की बढ़ती संख्या अस्पताल संसाधनों पर दबाव बना रही है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डेंगू के मौजूदा मामले मौसम के अनुरूप आमतौर पर देखे जाने वाले पैटर्न से मेल खाते हैं और इसे असामान्य रूप से गंभीर प्रकोप नहीं माना जा रहा है।
आगे की तैयारी
पूर्वोत्तर मानसून नजदीक आने के साथ, राज्य के अन्य हिस्सों के सरकारी अस्पताल भी मरीजों की संख्या में और बढ़ोतरी की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त बेड, फीवर वार्ड, जाँच सुविधाएँ, दवाएँ और ज़रूरी उपकरण तैयार रख रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब हर साल मानसून के दौरान तमिलनाडु में वेक्टर-जनित रोगों का बोझ बढ़ता है — और इस बार प्रशासन ने पूर्व-तैयारी पर जोर दिया है।