क्या नाड़ी शोधन प्राणायाम तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है?

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क्या नाड़ी शोधन प्राणायाम तनाव और थकान को दूर करने में मदद करता है?

सारांश

तनाव और थकान से जूझ रहे हैं? जानें, कैसे 'नाड़ी शोधन प्राणायाम' आपके जीवन को बदल सकता है। यह प्राणायाम न केवल मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है, बल्कि शरीर को भी सक्रिय रखता है। आइए, इसके फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं।

Key Takeaways

  • नाड़ी शोधन प्राणायाम मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है।
  • यह तनाव और चिंता को कम करता है।
  • बच्चों और बड़ों के लिए फायदेमंद है।
  • रोजाना करने से शरीर सक्रिय रहता है।
  • शांत और गहरी सांसें लेने की विधि है।

नई दिल्ली, 30 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। वर्तमान समय में लोगों के जीवन में तनाव, बेचैनी, अव्यवस्थित जीवनशैली और मानसिक थकावट सामान्य हो गए हैं। बच्चे या बड़े, हर कोई किसी न किसी रूप में मानसिक दबाव का सामना कर रहा है। इस स्थिति में, योग और प्राणायाम शरीर और मन के बीच संतुलन बनाए रखने का एक प्रभावी उपाय है। प्राणायाम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है ‘नाड़ी शोधन प्राणायाम’, जिसे शरीर की ऊर्जा नाड़ियों को शुद्ध करने का अभ्यास माना जाता है।

शनिवार को, आयुष मंत्रालय ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल पर नाड़ी शोधन प्राणायाम के लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी साझा की। मंत्रालय ने इसे एक ऐसा साधन बताया है जो शरीर, मन और आत्मा को शांति प्रदान करता है और आपसी संतुलन स्थापित करता है।

इस प्राणायाम के दौरान एक नथुने से सांस ली जाती है और दूसरे से छोड़ी जाती है। यह अभ्यास बाएं और दाएं मस्तिष्क के बीच संतुलन बनाने में मदद करता है, जिससे व्यक्ति अधिक केंद्रित और शांत रहता है।

आयुष मंत्रालय ने अपने पोस्ट में उल्लेख किया कि नाड़ी शोधन प्राणायाम करने से शरीर की नाड़ियां साफ होती हैं, जिससे व्यक्ति दिनभर सक्रिय बना रहता है। बच्चों के लिए यह ऊर्जा पढ़ाई और खेल में ध्यान केंद्रित करने में सहायता करती है, जबकि बड़ों को कार्यालय या घरेलू कार्यों में बेहतर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

यह एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देता है। जब हम लगातार तेज सांस लेने के बजाय शांत और गहरी सांसें लेते हैं, तो हमारा मस्तिष्क अधिक ऑक्सीजन प्राप्त करता है। इससे सोचने और समझने की क्षमता में वृद्धि होती है। जो छात्र पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पाते हैं या जल्दी भूल जाते हैं, उनके लिए यह प्राणायाम एक प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है।

आयुष मंत्रालय ने बताया कि यह अभ्यास तनाव और चिंता को कम करने में भी अत्यंत लाभकारी है। जब हम धीरे-धीरे सांस लेते हैं और छोड़ते हैं, तो हमारे शरीर का नर्वस सिस्टम शांत हो जाता है। मस्तिष्क में चल रही घबराहट या ओवरथिंकिंग रुक जाती है। इससे मन हल्का लगता है और चिंता कम होती है। नींद न आने की समस्या से ग्रस्त लोगों को भी इससे काफी राहत मिलती है।

नाड़ी शोधन प्राणायाम सोचने और महसूस करने की क्षमता में संतुलन लाने का कार्य करता है। जो लोग भावनात्मक रूप से जल्दी परेशान हो जाते हैं या निर्णय लेने में उलझन महसूस करते हैं, उनके लिए यह प्राणायाम बहुत सहायता कर सकता है। बाएं मस्तिष्क से हम तर्क करते हैं, जबकि दाएं मस्तिष्क भावनाओं से संलग्न होता है। जब दोनों के बीच संतुलन होता है, तो व्यक्ति मानसिक रूप से स्थिर रहता है।

मंत्रालय ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इस प्राणायाम की शुरुआत कर रहा है, तो उसे सांस लेने और छोड़ने की समान अवधि से शुरुआत करनी चाहिए, जैसे 4 सेकंड में सांस लेना और 4 सेकंड में छोड़ना। धीरे-धीरे जब अभ्यास में सहजता आ जाए, तो समय बढ़ाया जा सकता है। रोजाना 10-15 मिनट का अभ्यास करने से मन शांत और शरीर स्वस्थ रहता है।

Point of View

यह कहना आवश्यक है कि नाड़ी शोधन प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक अद्भुत साधन है। आज के तनावपूर्ण जीवन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि मानसिक स्थिरता भी प्रदान करता है।
NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

क्या नाड़ी शोधन प्राणायाम सभी के लिए सुरक्षित है?
हाँ, यह प्राणायाम अधिकांश लोगों के लिए सुरक्षित है, लेकिन किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले चिकित्सक से परामर्श करना हमेशा बेहतर होता है।
क्या इसे रोजाना करना आवश्यक है?
जी हां, रोजाना 10-15 मिनट का अभ्यास करना अत्यधिक लाभकारी होता है।
क्या बच्चे भी इसे कर सकते हैं?
बिल्कुल! बच्चों के लिए भी यह एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता में वृद्धि करता है।
क्या यह तनाव को कम करता है?
हाँ, यह प्राणायाम तनाव और चिंता को कम करने में बहुत मदद करता है।
क्या इसे किसी विशेष समय पर करना चाहिए?
सुबह का समय सर्वोत्तम होता है, लेकिन आप इसे किसी भी समय कर सकते हैं।