क्या रोज एक चम्मच तिल खाने से शरीर को अंदरूनी मजबूती मिलती है और जोड़ों के दर्द में राहत मिलती है?
सारांश
Key Takeaways
- तिल हड्डियों के लिए प्राकृतिक मजबूती प्रदान करता है।
- रोजाना एक चम्मच तिल का सेवन करें।
- तिल जोड़ों के दर्द में राहत देता है।
- सर्दियों में इसका सेवन अधिक फायदेमंद होता है।
- तिल को विभिन्न तरीकों से खाया जा सकता है।
मुंबई, 4 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। डिजिटल युग में शारीरिक गतिविधियों की कमी का प्रभाव सबसे पहले हमारी हड्डियों और पेशियों पर दिखाई देता है। प्रारंभ में हल्की थकान, फिर जोड़ों में दर्द, पीठ में खिंचाव और शरीर में कमजोरी का अनुभव होता है। उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या और बढ़ जाती है। आयुर्वेद इसे वात दोष से जोड़ता है, जबकि विज्ञान इसे मिनरल्स की कमी का परिणाम मानता है। ऐसे में तिल एक प्राकृतिक उपाय के रूप में सामने आता है।
तिल चाहे काले हों या सफेद, दोनों ही स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माने जाते हैं। आयुर्वेद में तिल को बल्य यानी ताकत बढ़ाने वाला और स्निग्ध यानी पोषण देने वाला बताया गया है। विज्ञान के अनुसार, तिल कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे आवश्यक मिनरल्स से भरपूर होते हैं। ये तीनों तत्व मिलकर हड्डियों की नींव को मजबूत करते हैं और पेशियों को सहारा देते हैं।
केवल कैल्शियम ही हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए पर्याप्त नहीं होता। मैग्नीशियम कैल्शियम को सही स्थान पर पहुँचाने में मदद करता है और फॉस्फोरस हड्डियों की संरचना को संतुलित रखता है। तिल में ये तीनों तत्व प्राकृतिक रूप से पाए जाते हैं, इसलिए इनका प्रभाव धीरे-धीरे लेकिन लंबे समय तक रहता है। यही कारण है कि आयुर्वेद में तिल को रोज़मर्रा के भोजन का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है।
बढ़ती उम्र में हड्डियों का कमजोर होना एक सामान्य समस्या है, विशेषकर महिलाओं में। विज्ञान इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहते हैं। आयुर्वेद मानता है कि यदि समय पर शरीर को पोषण मिल जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। रोजाना थोड़ा सा तिल खाने से हड्डियों को अंदर से मजबूती मिलती है और उनके टूटने का खतरा कम होता है।
तिल सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं, जोड़ों के दर्द में भी सहायक सिद्ध होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर की सूजन को कम करने में मदद करते हैं। जिन लोगों को घुटनों में दर्द, गर्दन की जकड़न या गठिया जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए तिल एक सरल घरेलू उपाय के रूप में कार्य करता है। सर्दियों में इसका असर और भी बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को अंदर से गर्माहट भी प्रदान करता है।
आयुर्वेद और स्वास्थ्य विशेषज्ञ दोनों का मानना है कि तिल का सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए। रोजाना एक से दो चम्मच तिल पर्याप्त होते हैं। इसे खाने के कई सरल तरीके हैं। तिल को हल्का सा भूनकर खाया जा सकता है, सब्जी या सलाद में मिलाया जा सकता है, या फिर गुड़ के साथ लड्डू बनाकर भी खाया जाता है। पारंपरिक तिल-गुड़ के लड्डू न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी होते हैं।