वैक्सीन से पहले ही इम्यून रिस्पॉन्स का अनुमान संभव? एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी की नई स्टडी में बड़ा खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (ASU) के नेतृत्व में हुए एक नए अध्ययन के अनुसार, वैक्सीन लगने से पहले ही रक्त में मौजूद विशेष एंटीबॉडी संकेतों के आधार पर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि किसी व्यक्ति का शरीर टीके को कितनी मजबूती से जवाब देगा। 22 अगस्त 2026 को सामने आई इस रिसर्च में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की सहायता से 4,089 लोगों के 8,687 ब्लड सैंपल का विश्लेषण किया गया, जो वैक्सीन विज्ञान के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय कदम माना जा रहा है।
अध्ययन की पद्धति और दायरा
शोधकर्ताओं ने इन रक्त नमूनों में 185 अलग-अलग एंटीजन के विरुद्ध मौजूद एंटीबॉडी की जाँच की। इन एंटीजन में सामान्य वायरस और बैक्टीरिया के साथ-साथ ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़े कुछ लक्ष्य भी शामिल थे। वैक्सीन लगने से पहले और उसके बाद लिए गए नमूनों की तुलना कर AI और डीप-लर्निंग मॉडल की मदद से उन पैटर्न को चिह्नित किया गया, जो मजबूत और कमजोर वैक्सीन रिस्पॉन्स वाले लोगों के बीच अंतर कर सकते थे।
अध्ययन का नेतृत्व करने वाले ASU बायोडिजाइन इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक और वर्जीनिया जी. पाइपर सेंटर फॉर पर्सनलाइज्ड डायग्नोस्टिक्स के निदेशक जोशुआ लाबेयर के अनुसार, 'कुछ ऐसे बायोमार्कर मिले हैं, जिन्हें AI के जरिए देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वैक्सीन लगने से पहले ही कौन व्यक्ति बेहतर रिस्पॉन्स देने की संभावना रखता है।'
'सेंटिनल एंटीबॉडी' — क्या है यह नई अवधारणा
रिसर्च में कुछ विशेष एंटीबॉडी का संबंध बेहतर कोविड-19 वैक्सीन रिस्पॉन्स से पाया गया। इनमें स्टैफिलोकोकस ऑरियस, RSV और ह्यूमन रेस्पाइरोवायरस 3 जैसे सामान्य सूक्ष्मजीवों के विरुद्ध बनी एंटीबॉडी शामिल थीं। वैज्ञानिकों ने इन्हें 'सेंटिनल एंटीबॉडी' की संज्ञा दी है।
गौरतलब है कि ये एंटीबॉडी सीधे कोविड-19 वायरस से नहीं लड़ रही थीं। बल्कि इनका स्तर शरीर की पहले से मौजूद इम्यून तैयारी का संकेत देता है — अर्थात यह एक प्रकार का 'इम्यून फिंगरप्रिंट' है जो वैक्सीन की प्रभावशीलता का पूर्वानुमान दे सकता है।
कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोगों पर क्या मिला
अध्ययन के अनुसार, HIV, मल्टीपल मायलोमा, कुछ प्रकार के कैंसर, ऑटोइम्यून बीमारी, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और ऑर्गन ट्रांसप्लांट से जुड़े व्यक्तियों में कोविड वैक्सीन के बाद एंटीबॉडी रिस्पॉन्स कम रहने की संभावना अधिक पाई गई। हालाँकि, यह नियम सार्वभौमिक नहीं था — कमजोर इम्यून सिस्टम वाले कुछ लोगों ने भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत रिस्पॉन्स दिया।
दूसरी ओर, लगभग 5 से 6 प्रतिशत स्वस्थ लोगों में भी वैक्सीन के बाद कमजोर रिस्पॉन्स देखा गया। यह इस बात का प्रमाण है कि केवल उम्र, लिंग या किसी ज्ञात बीमारी के आधार पर वैक्सीन की प्रभावशीलता का अनुमान लगाना अपर्याप्त हो सकता है।
AI की भूमिका और शोध की विशेषता
इस रिसर्च की विशेषता यह है कि वैज्ञानिकों ने केवल एक या दो एंटीबॉडी को देखकर निष्कर्ष निकालने की बजाय रक्त में मौजूद 185 एंटीबॉडी संकेतों के पूरे पैटर्न का विश्लेषण किया। AI मॉडल ने इन सभी संकेतों को एकीकृत कर यह जानने का प्रयास किया कि किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम वैक्सीन के लिए कितना तैयार है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalized Medicine) की माँग तेजी से बढ़ रही है।
आगे क्या होगा
शोधकर्ताओं के अनुसार, यदि आगे के अध्ययनों में इन नतीजों की पुष्टि होती है और अन्य प्रकार के टीकों में भी इसी तरह के संकेत मिलते हैं, तो भविष्य में वैक्सीन रणनीति को कहीं अधिक व्यक्तिगत और लक्षित बनाया जा सकेगा। इससे उन लोगों की पहचान पहले से की जा सकेगी जिन्हें अतिरिक्त खुराक या वैकल्पिक सुरक्षा उपायों की आवश्यकता हो सकती है।