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अफ्रीका में इबोला प्रकोप: सीरम इंस्टीट्यूट बंडिबुग्यो वैक्सीन उत्पादन में तेज़ी लाएगा, WHO का समर्थन

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अफ्रीका में इबोला प्रकोप: सीरम इंस्टीट्यूट बंडिबुग्यो वैक्सीन उत्पादन में तेज़ी लाएगा, WHO का समर्थन

सारांश

मध्य अफ्रीका में इबोला के बंडिबुग्यो स्ट्रेन से 650 से अधिक मौतों के बीच भारत का सीरम इंस्टीट्यूट ऑक्सफोर्ड और CEPI के साथ मिलकर ChAdOx1 BDBV वैक्सीन का उत्पादन तेज़ कर रहा है — जो इस स्ट्रेन के लिए दुनिया की पहली संभावित स्वीकृत वैक्सीन होगी।

मुख्य बातें

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इबोला के बंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए ChAdOx1 BDBV वैक्सीन का उत्पादन तेज़ कर रहा है।
परियोजना ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और CEPI के सहयोग से संचालित; WHO और अफ्रीका CDC का समर्थन प्राप्त।
DRC और युगांडा में इस वर्ष अब तक 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले और 650 से ज़्यादा मौतें दर्ज।
बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।
वैक्सीन ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका COVID-19 वैक्सीन की वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है।
भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला नहीं; हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग बढ़ाई गई।

मध्य अफ्रीका में जारी इबोला वायरस के प्रकोप से निपटने के वैश्विक प्रयासों में भारत एक निर्णायक भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। रिपोर्टों के अनुसार, पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) इबोला वायरस के बंडिबुग्यो स्ट्रेन को लक्षित करने वाली वैक्सीन के विकास और उत्पादन की प्रक्रिया को तेज़ी से आगे बढ़ा रहा है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में इस वर्ष की शुरुआत से अब तक 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज हो चुके हैं और 650 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है।

वैक्सीन परियोजना का ढाँचा

मॉडर्न डिप्लोमेसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह परियोजना ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशंस (CEPI) के सहयोग से संचालित की जा रही है। इसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिज़ीज़ कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (अफ्रीका CDC) का भी समर्थन प्राप्त है। अफ्रीका CDC के महानिदेशक जीन कासेया ने पुष्टि की है कि इस वैक्सीन का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा किया जाएगा।

ChAdOx1 BDBV: क्यों है यह वैक्सीन खास

ChAdOx1 BDBV नाम की यह वैक्सीन उसी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है जिसका उपयोग ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका COVID-19 वैक्सीन में किया गया था। गौरतलब है कि इबोला के अधिक चर्चित ज़ैरे स्ट्रेन के विपरीत, बंडिबुग्यो वैरिएंट के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि इस वैक्सीन उम्मीदवार का विकास वैश्विक स्वास्थ्य समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

स्थापित तकनीक के उपयोग से क्लीनिकल परीक्षण हेतु आवश्यक डोज़ तैयार होने के बाद बड़े पैमाने पर उत्पादन और वितरण की प्रक्रिया को तेज़ी से संचालित किया जा सकेगा।

WHO और वैश्विक एजेंसियों की प्रतिक्रिया

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने हाल ही में कहा कि बंडिबुग्यो स्ट्रेन के विरुद्ध एक प्रभावी वैक्सीन मौजूदा प्रकोप को नियंत्रित करने में सहायक होगी और भविष्य की महामारियों के लिए तैयारी को भी सुदृढ़ बनाएगी। WHO ने इस वैक्सीन उम्मीदवार के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी त्वरित कर दिया है।

भारत में स्थिति और निगरानी

रिपोर्टों के अनुसार, भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं किया गया है। हालाँकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ा दी है और प्रमुख हवाई अड्डों पर प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की स्क्रीनिंग तथा आवश्यकता पड़ने पर आइसोलेशन की व्यवस्था की गई है। विशेषज्ञों ने इबोला के मौजूदा प्रकोप को एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता के रूप में वर्णित किया है।

आगे क्या होगा

सरकारें और वैक्सीन निर्माता अपनी तैयारियों को मज़बूत करने और वैक्सीन विकास में तेज़ी लाने में जुटे हैं। यदि क्लीनिकल परीक्षण सफल रहे, तो SII की उत्पादन क्षमता इस वैक्सीन को वैश्विक स्तर पर शीघ्रता से उपलब्ध कराने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

ध्यान देने वाली बात यह है कि ChAdOx1 BDBV अभी भी क्लीनिकल परीक्षण चरण में है और बंडिबुग्यो स्ट्रेन के लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन न होना एक गंभीर रिक्तता को उजागर करता है। प्रश्न यह है कि क्या नियामकीय त्वरण और उत्पादन क्षमता मिलकर इस प्रकोप की गति से आगे निकल पाएंगे, या यह वैक्सीन अगले प्रकोप के लिए तैयारी का हिस्सा बनकर रह जाएगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीरम इंस्टीट्यूट कौन सी इबोला वैक्सीन बना रहा है?
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और CEPI के सहयोग से ChAdOx1 BDBV नामक वैक्सीन का उत्पादन कर रहा है, जो इबोला के बंडिबुग्यो स्ट्रेन को लक्षित करती है। यह वैक्सीन उसी वायरल वेक्टर तकनीक पर आधारित है जो ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राज़ेनेका COVID-19 वैक्सीन में उपयोग की गई थी।
अफ्रीका में इबोला का मौजूदा प्रकोप कितना गंभीर है?
रिपोर्टों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत से अब तक कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य और युगांडा में 1,500 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और 650 से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। WHO और अफ्रीका CDC इसे एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य चिंता मान रहे हैं।
बंडिबुग्यो इबोला स्ट्रेन के लिए पहले कोई वैक्सीन क्यों नहीं थी?
बंडिबुग्यो इबोला वायरस एक अपेक्षाकृत दुर्लभ स्ट्रेन है, इसलिए अब तक इसके लिए कोई स्वीकृत वैक्सीन विकसित नहीं की जा सकी। मौजूदा स्वीकृत वैक्सीनें मुख्यतः अधिक सामान्य ज़ैरे स्ट्रेन के विरुद्ध प्रभावी हैं।
क्या भारत में इबोला का कोई खतरा है?
रिपोर्टों के अनुसार, भारत में इबोला का कोई सक्रिय मामला दर्ज नहीं हुआ है। हालाँकि, स्वास्थ्य अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ाई है और प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग की जा रही है।
इस वैक्सीन परियोजना में कौन-कौन सी संस्थाएँ शामिल हैं?
इस परियोजना में सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और CEPI मुख्य भागीदार हैं। WHO और अफ्रीका CDC इसे समर्थन प्रदान कर रहे हैं, और WHO ने वैक्सीन उम्मीदवार के मूल्यांकन की प्रक्रिया को भी त्वरित किया है।
राष्ट्र प्रेस
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